Dalit History Month: कर्नाटक में 'रोहित एक्ट' को लेकर जोरदार मांग— एक्टिविस्ट बोले, '14 अप्रैल अंबेडकर जयंती तक कानून लाएं'

02:13 PM Apr 02, 2025 | Geetha Sunil Pillai

बेंगलुरु : दलित हिस्ट्री मंथ की शुरुआत के साथ ही सामजिक न्याय और समता की पैरवी करने वाले सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं। दलित छात्र रोहित वेमुला की स्मृति में 'रोहित एक्ट' लागू करने की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अभियान से जुड़े संगठनों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 14 अप्रैल (डॉ. अंबेडकर जयंती) तक इस कानून को लागू करने की घोषणा करें। इस प्रस्तावित एक्ट का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करना और दलित-बहुजन छात्रों के लिए समान शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करना है।

'कैंपेन फॉर रोहित एक्ट' के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को बेंगलुरु में प्रेस वार्ता कर कहा कि "बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान की प्रस्तावना हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान का वादा करती है। लेकिन भारतीय संविधान के 75 साल बाद भी दलित-बहुजन युवाओं के लिए ये वादे पूरे नहीं हुए हैं। रोहित वेमुला और पायल तडवी की संस्थागत हत्याएं इस वादे के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण हैं।"

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 2021 के संसदीय डेटा का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं ने बताया कि 2014 से 2021 के बीच आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 122 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से 68 एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय से थे। इसके अलावा, दिसंबर 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 2018-2023 के बीच 13,000 से अधिक दलित-बहुजन छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज भी कर्नाटक में शिक्षा प्राप्त करने में जाति एक बड़ी बाधा है।

उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती) तक रोहित एक्ट लागू करने के लिए जरूरी कदमों की घोषणा करें। साथ ही, इस कानून को लागू करने के लिए दलित-छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक समिति बनाई जाए और कर्नाटक के उच्च शिक्षा क्षेत्र को भेदभाव से मुक्त बनाने के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। "जाति का उन्मूलन हमारा अंतिम लक्ष्य है और सरकार को इसके लिए उचित कदम उठाने चाहिए," उन्होंने जोर देकर कहा।

कार्यकर्ताओं ने याद दिलाया कि रोहित की मां राधिका वेमुला और पायल तडवी की मां आबेदा तडवी ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था ताकि केंद्र सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बेहतर कदम उठाए।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज भी कर्नाटक में शिक्षा प्राप्त करने में जाति एक बड़ी बाधा है। एक ओर सरकार सार्वजनिक शिक्षा के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं करा रही, वहीं दूसरी ओर शिक्षा का निजीकरण तेजी से बढ़ रहा है। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि दलित छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक समिति बनाई जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कर्नाटक का उच्च शिक्षा क्षेत्र भेदभाव से मुक्त हो और सभी को समान अवसर मिलें।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को डीएसएस ओक्कुटा के राज्य समन्वयक मावल्ली शंकर, वरिष्ठ दलित कार्यकर्ता बसवराज कौठाल, संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत अश्विनी के.पी., नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी की सहायक प्रोफेसर अश्ना सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय कलबुर्गी के छात्र नेता नंदकुमार पी. और विभिन्न छात्र संघों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।

रोहित वेमुला कौन थे?

रोहित चक्रवर्ती वेमुला (30 जनवरी 1989 - 17 जनवरी 2016) हैदराबाद विश्वविद्यालय (University of Hyderabad) में पीएचडी के एक भारतीय छात्र थे। वे आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से थे और सामाजिक विज्ञान (सोशियोलॉजी) में शोध कर रहे थे। रोहित आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) के सक्रिय सदस्य थे, जो दलित छात्रों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाला संगठन था।

17 जनवरी 2016 को रोहित ने विश्वविद्यालय के हॉस्टल में आत्महत्या कर ली। उनकी मृत्यु का कारण विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनके और चार अन्य छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को माना गया। यह कार्रवाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक सदस्य पर कथित हमले के आरोप के बाद हुई थी। रोहित और उनके साथियों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद वे कैंपस में खुले में रह रहे थे। उनकी आत्महत्या ने देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए और जातिगत भेदभाव, शिक्षा संस्थानों में उत्पीड़न, और दलित अधिकारों पर बहस को तेज कर दिया।

रोहित की जाति को लेकर विवाद रहा है। उनकी मां राधिका वेमुला ने दावा किया कि वे अनुसूचित जाति (SC) के माला समुदाय से थे, लेकिन तेलंगाना पुलिस की 2024 की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया कि रोहित वड्डेरा समुदाय (OBC) से थे, जो अनुसूचित जाति में नहीं आता। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि रोहित ने अपनी जाति की सच्चाई छिपाने के डर से आत्महत्या की, हालांकि इस निष्कर्ष को उनके परिवार और समर्थकों ने खारिज किया है।

रोहित ने अपनी मृत्यु से पहले एक मार्मिक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने सामाजिक असमानता, पहचान के संकट, और अपने सपनों (विज्ञान लेखक बनने) का जिक्र किया। यह पत्र उनकी संवेदनशीलता और वैचारिक गहराई को दर्शाता है।

रोहित एक्ट क्या है?

"रोहित एक्ट" कोई मौजूदा कानून नहीं है, बल्कि यह एक प्रस्तावित विधेयक या नीति का नाम है, जिसे रोहित वेमुला की मृत्यु के बाद उनके समर्थकों और कुछ राजनीतिक दलों ने उठाया। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न, और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक विशेष कानून बनाना है।

कांग्रेस पार्टी ने अपने 2024 लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में "रोहित वेमुला एक्ट" लाने का वादा किया था। इस प्रस्तावित कानून के तहत:

  • विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, या अन्य आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे।

  • छात्रों के लिए सुरक्षित और समावेशी माहौल सुनिश्चित करना।

  • उत्पीड़न के मामलों में त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई।

हालांकि, अभी तक यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे कानून के रूप में लागू नहीं किया गया है। रोहित की मृत्यु के बाद, खासकर उनके समर्थकों और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले संगठनों द्वारा, यह मांग समय-समय पर उठती रही है।