MP: डॉ. अंबेडकर पर विवादित बयान से कांग्रेस घिरी! प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा- "भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया।"

01:15 PM Jan 10, 2026 | Ankit Pachauri

भोपाल। ग्वालियर के एडवोकेट अनिल मिश्रा के विवादित बयानों से उपजा राजनीतिक विवाद अभी थमा भी नहीं था कि कांग्रेस ने खुद एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस बार मामला सीधे संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर से जुड़ा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) मध्यप्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता रवि सक्सेना द्वारा संविधान लेखन को लेकर दिए गए बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। बयान सामने आते ही अंबेडकर अनुयायियों और बहुजन संगठनों में तीखी नाराज़गी देखी जा रही है और कांग्रेस को चारों ओर से घेरा जा रहा है। सामाजिक न्याय और संविधान की बात करने वाली पार्टी के भीतर से आए इस बयान ने कांग्रेस की वैचारिक प्रतिबद्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रवि सक्सेना ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया और संविधान निर्माण का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। उनका यह बयान प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रवक्ता कक्ष में, एक मीडिया कर्मी के कैमरे के सामने रिकॉर्ड हुआ।

रवि सक्सेना के इस बयान के सामने आने के बाद दलित, आदिवासी और सामाजिक न्याय से जुड़े संगठनों में नाराजगी देखने को मिली है। अंबेडकर समर्थकों का कहना है कि संविधान सभा भले ही एक सामूहिक निकाय रही हो, लेकिन संविधान के प्रारूप, उसकी वैचारिक दिशा और मूल ढांचे में डॉ. अंबेडकर की केंद्रीय भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

Trending :

कांग्रेस के भीतर उठे सवाल

इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदर ही विचारों की भिन्नता खुलकर सामने आ गई है। एक ओर कांग्रेस नेता लोकसभा के नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार सामाजिक न्याय, संविधान और डॉ. अंबेडकर के विचारों की बात करते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता का ऐसा बयान पार्टी लाइन से अलग नजर आया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस लंबे समय से खुद को संविधान और अंबेडकर के विचारों की संरक्षक पार्टी के रूप में प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में पार्टी प्रवक्ता का यह बयान उसकी वैचारिक स्थिति को कमजोर करता है।

पार्टी ने झाड़ा पल्ला

मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस ने रवि सक्सेना के बयान से खुद को अलग कर लिया। पार्टी ने इसे उनकी निजी राय बताते हुए स्पष्ट किया कि इसका कांग्रेस की आधिकारिक विचारधारा से कोई संबंध नहीं है।

द मूकनायक से बातचीत में कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने कहा, “रवि सक्सेना का यह बयान उनका व्यक्तिगत विचार है। पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस पर हम कुछ नहीं कहना चाहते।”

रवि सक्सेना के बयान के बाद अन्य विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि कांग्रेस खुद अपने भीतर ही डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान के मुद्दे पर भ्रमित और बंटी हुई है।

इधर, सामाजिक संगठनों और अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस से इस बयान पर स्पष्ट जवाब देने और प्रदेश प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बयानों से बाबा साहब के अनुयायियों को ठेस पहुँचती है।

द मूकनायक से बातचीत में आजाद समाज पार्टी मध्यप्रदेश के नेता सुनील अस्तेय ने कहा, “कांग्रेस सिर्फ बाबा साहब के नाम पर प्रेम का ड्रामा करती है। इन्हें बाबा साहब के विचारों और उनके बताए मार्ग से कोई लेना-देना नहीं है। यह लोग सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं।”

डॉ. अंबेडकर की भूमिका पर क्यों होता है विवाद?

इतिहासकारों के अनुसार भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया, जिसमें कई सदस्य शामिल थे। लेकिन संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में डॉ. अंबेडकर की भूमिका निर्णायक थी। उन्होंने न सिर्फ संविधान का प्रारूप तैयार किया, बल्कि मौलिक अधिकार, सामाजिक न्याय, समानता, महिलाओं और दलितों-पिछड़ों के अधिकारों को मजबूती से इसमें शामिल कराया।

डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता कहे जाने का कारण यही है कि उन्होंने संविधान को एक सामाजिक दस्तावेज़ के रूप में आकार दिया, जो केवल शासन प्रणाली नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना।