तिरुवनंतपुरम- बिशप फ्रैंको मुलक्कल रेप केस की सर्वाइवर सिस्टर रनित ने नौ साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान उजागर की है। 2018 में एक बिशप पर यौन हिंसा का आरोप लगाने वाली देश की पहली नन बताती हैं कि फ्रैंको मुलक्कल के बरी होने का फैसला उन्हें गहराई से आहत कर गया, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प अटल है। 'एशियनेट न्यूज' को दिए ख़ास इंटरव्यू में सिस्टर रनित ने कहा, "मैं लोगों को बताना चाहती हूं कि हम अभी भी जिंदा हैं, हम यहां हैं... हमारी जद्दोजहद जारी है।" कान्वेंट में रहने वाली ननों की पीड़ा उजागर करती हुई सिस्टर रनित कहती हैं, " निशब्द रहना ननों की मजबूरी बन जाती है, मठ के भीतर क्या चल रहा है उसे बाहर की दुनिया से छिपाकर, अच्छे वस्त्र पहनकर लोगों के सामने मुस्कुराते हुए सामने आने की क्या पीड़ा होती है ये वही जान सकता है जिसने वह दर्द झेला हो..."।
सिस्टर रनित ने बताया कि उन्होंने सालों तक चुप्पी साधे रखी क्योंकि डर, कलंक और चर्च के कठोर नियमों ने उन्हें मजबूर किया। "मुझे 13 बार बलात्कार का शिकार बनाया गया, लेकिन मैंने पहले आवाज नहीं उठाई क्योंकि कॉन्वेंट छोड़ने पर मुझे 'भागी हुई नन' का ठप्पा लग जाता," उन्होंने कहा। चस्टिटी (पवित्रता) को ननों के लिए सर्वोच्च मूल्य माना जाता है, और इसे 'खो' देने पर तुरंत चर्च से निकाल दिया जाता है। उन्होंने कई महिलाओं को देखा जो चर्च छोड़ने के बाद 'रनअवे नन' कहलाकर जिंदगीभर शर्मिंदगी झेलती रहीं। केवल नन ही नहीं बल्कि उनके परिवार को भी समाज हिकारत की नजरों से देखता है जो उन्हें ताउम्र भोगना पड़ता है।
सिस्टर रनित ने भावुक होकर कहा , "मैं अपनी संतान को यह कैसे बता सकती थी कि मेरी पवित्रता छीन ली गई? एक मां अपने बच्चों के सामने ऐसी बात नहीं कह सकती।"
2018 में केरल के कुराविलंगडु स्थित सेंट फ्रांसिस मिशन होम में रहने वाली वरिष्ठ नन सिस्टर रनित ने जालंधर डायोसिस (धर्मप्रांत) के तत्कालीन बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर कई बार बलात्कार का आरोप लगाया। यह शिकायत भारत में एक अभूतपूर्व घटना थी, क्योंकि इससे पहले कभी किसी नन ने यौन हिंसा के लिए किसी पदस्थ बिशप के खिलाफ औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। जनवरी 2022 में एक निचली अदालत ने फ्रेंको मुलक्कल को बरी कर दिया। 2023 में उन्होंने दिवंगत पोप फ्रांसिस से मुलाकात की और अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वर्तमान में उन्हें जालंधर के बिशप एमेरिटस की उपाधि हासिल है, जो सेवानिवृत्त बिशपों को उनकी पिछली सेवाओं के सम्मान में दी जाने वाली एक मानद उपाधि है।

सिस्टर रनित ने कॉन्वेंट में सामान्य दिखने का दर्द बयां किया। "मुझे मुस्कुराते हुए, साफ-सुथरे कपड़ों में बाहर निकलना पड़ता था, जबकि अंदर से दर्द की चीखें दबाए रखती थी। मैंने सब कुछ अपने अंदर कैद कर लिया।" उन्होंने कहा कि कई कॉन्वेंट्स में ऐसी घटनाएं होती हैं और वे कई ऐसी महिलाओं को जानती हैं जो चुपचाप सहती रहीं। "सभी सच्चाइयां उजागर नहीं की जा सकतीं, मैंने देखा है कि बोलने वालों का क्या हश्र होता है।"
शिकायत के बाद सिस्टर रनित को अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिशप फ्रैंको ने उनके परिवार और साथी ननों को फर्जी केसों में फंसाने की कोशिश की। कुछ ननों ने खुलेआम उनका साथ छोड़ दिया। पैसे के लालच का आरोप लगाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मैंने डायोसीज या फ्रैंको से एक रुपया भी नहीं लिया।" तीन ननों ने उत्पीड़न से तंग आकर चर्च छोड़ दिया, जबकि बाकी तीन, जिसमें वे खुद शामिल हैं, अब कॉन्वेंट में सिलाई का काम करके गुजारा कर रही हैं। उन्होंने Church को अपमानित करने का इरादा न होने की बात कहते हुए कहा, "चर्च लीडरशिप की खामोशी ने हमें सड़कों पर धकेल दिया।"
अभिनेता दिलीप फैसले के बाद जब पीडिता आई सामने तो मिली हिम्मत
उनकी चुप्पी टूटने का एक बड़ा कारण 2017 के एक्ट्रेस अटैक केस का फैसला था, जिसमें मास्टरमाइंड कहे जाने वाले एक्टर दिलीप को बरी कर दिया गया। सिस्टर रनित ने कहा, "यह फैसला मुझे बहुत दुखी कर गया। मैं अपने पुराने दर्द में खो गई। उसे न्याय नहीं मिला, यह सोचकर मेरा दिल चीखा। लेकिन उसी दौरान वह नायिका मुख्यमंत्री के क्रिसमस इवेंट में पहुंची, कितना साहस! इससे मुझे प्रेरणा मिली। अब तक अन्य सिस्टर्स मेरी आवाज बनीं, लेकिन अब मैं खुद बोलूंगी।" सिस्टर रनित ने कहा कि अब वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ेंगी। "सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने तक मैं आराम नहीं करूंगी। न्याय के लिए लड़ाई जारी रखूंगी।"