मेरठ– उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। 50 वर्षीय दलित महिला की बेरहमी से हत्या और उनकी 20 वर्षीय बेटी के अपहरण के मुख्य आरोपी को तीन दिनों की सघन तलाश के बाद हरिद्वार में गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अपहृत लड़की को बरामद कर लिया गया। पुलिस जांच जारी है, जो इस जघन्य अपराध की परतें खोल रही है।
थाना सरधना क्षेत्र अंतर्गत कपसाड़ गांव में 8 जनवरी को हुई इस घटना के बाद जातिगत तनाव उत्पन्न हो गया था, जिसमें आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की परिवार से मिलने की कोशिश ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भारी ड्रामा पैदा कर दिया। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया। यहां तक कि टोल प्लाजा पर भी चन्द्रशेखर आजाद को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गयी।
हालांकि अब पुलिस की छानबीन के दौरान मामला प्रेम प्रसंग होना बताया जाता है। तीन साल पुराने अंतरजातीय प्रेम प्रसंग का खुलासा हुआ है, जिसमें आरोपी और पीड़ित की बेटी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
वारदात 8 जनवरी को सुबह करीब 8 बजे मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में हुई। 50 वर्षीय दलित महिला सुनीता जाटव और उनकी बेटी रूबी (20 वर्ष) परिवार के गन्ने के खेत की ओर नहर के पास पैदल जा रही थीं, जहां वे गन्ना छीलने वाली थीं। रूबी, जो तीन भाइयों में इकलौती बेटी हैं, आर्थिक तंगी के कारण डेढ़ साल पहले स्कूल छोड़ चुकी थीं और अप्रैल में उनकी शादी तय हो चुकी थी।
उन्हें पारस ठाकुर नामक राजपूत समुदाय के युवक ने रोक लिया, जो स्थानीय डॉक्टर के क्लिनिक में कंपाउंडर का काम करता है। सूत्रों के अनुसार, रूबी और पारस के बीच तीन साल से सहमति से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन सुनीता के हस्तक्षेप ने इसे जानलेवा बना दिया। सुनीता ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की और पारस के जबरन रूबी को अपनी सफेद ऑल्टो कार में ले जाने का विरोध किया, तो आरोपी ने गन्ने की दरांती (तीखी कटाई का हथियार) से उसके सिर पर कई वार किए।
गांववासियों ने सुनीता की चीखें सुनकर मौके पर पहुंचे, लेकिन वह उसी शाम 5 बजे स्थानीय अस्पताल में शिकार हो गईं। पारस रूबी को लेकर भाग गया, आखिरी बार कैली गांव की ओर जाते देखा गया। रूबी के पिता सत्येंद्र कुमार ने आरोपी की गिरफ्तारी और बेटी की बरामदगी तक सुनीता का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया, जिससे भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और दलित समूहों ने अस्पताल पर तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।
दूसरी ओर पारस के परिजनों के मुताबिक पारस अभी नाबालिग है और लड़की बालिग है. दोनों के बीच में प्रेम-प्रसंग था. पहले भी ये दोनों पकड़े गए थे, लेकिन पंचायत में समझौता करा दिया गया था और लड़की को 50000 रुपए का मुआवजा दिया गया था.
पारस और उसके साथी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें हत्या, अपहरण और जातिगत अत्याचार शामिल हैं। 10 से अधिक पुलिस टीमों को जिलों में तैनात किया गया, 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई।
छेड़खानी या प्रेम प्रसंग ?
गांव वालों से जो जानकारी मिली है कि उसके मुताबिक, पिछले 2-3 साल से दोनों आपस में एक-दूसरे को जानते हैं. दोनों एक ही गांव कपसाड के रहने वाले हैं. गांव में ही आते-जाते दोनों में प्यार बढ़ गया. दोनों मिलने-जुलने लगे, लेकिन लड़की के परिवार को ये मंजूर नहीं था. बताया जा रहा है कि अगवा हुई लड़की की शादी कहीं और जगह तय हो गई थी, लेकिन वह शादी नहीं करनी चाहती थी. इसको लेकर माता-पिता से उसका विवाद भी हुआ था. इसी के बाद गुरुवार को लड़की ने प्रेमी पारस को बुलाया और उसी दौरान ये घटना घटी.
वहीं अगवा हुई लड़की के पिता सतेंद्र ने बताया कि 8 जनवरी की सुबह वो खेत में चले गए थे. घर का कामकाज निपटाने के बाद उनकी पत्नी सुनीता और बेटी दोनों खेत की ओर आ रहे थे, तभी पारस राजपूत रास्ते में पहुंचा और बेटी से छेड़खानी करने लगा. इसी दौरान उनकी पत्नी सुनीता पर गड़ासे से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं. इसके बाद वह बेटी को लेकर भाग गया. आनन-फानन में सुनीता को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
पुलिस ने इन दलित नेताओं को रोका
दिल्ली से मेरठ के कपसाढ़ गांव जा रहे कांग्रेस पार्टी के एससी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, सह-प्रभारी प्रदीप नरवाल एवं सांसद तनुज पुनिया को पुलिस ने एक्सप्रेस-वे स्थित काशी टोल प्लाजा पर रोक लिया। कांग्रेस का यह प्रतिनिधिमंडल कपसाढ़ गांव में दलित बेटी के अपहरण और उसकी मां की हत्या की घटना के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा था।
शुक्रवार सुबह अपने समर्थकों के साथ कपसाड गांव जा रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने रास्ते में रोक लिया. रोके जाने से नाराज अतुल प्रधान की मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ जमकर नोंक-झोंक हुई. गुस्से में वह वहीं पर धरने पर बैठ. उनके साथ आईं सपा की महिला कार्यकर्ताओं को गांव के अंदर जाने दिया गया.
उधर शनिवार शाम को नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के दौरे के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा बन गया- पुलिस की रोक-टोक और बेरिकेड भी उन्हें रोक ना पाए। जब गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोका तो चंद्रशेखर भिड़ गए और पैदल ही दौड़ पड़े, आज़ाद बाइक पर सवार होकर कपसाड़ की ओर निकल पड़े।