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MP में भाजयुमो का कांग्रेस कार्यालयों पर घेराव, भोपाल-इंदौर में हिंसक झड़प, कई घायल

भोपाल। मध्य प्रदेश में शनिवार को राजनीतिक टकराव उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के यूथ विंग द्वारा किए गए प्रदर्शन के विरोध में राज्यभर में कांग्रेस कार्यालयों का घेराव किया। सबसे गंभीर स्थिति इंदौर में बनी, जहां भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सीधी भिड़ंत हो गई और देखते ही देखते माहौल पत्थरबाजी में बदल गया। गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ रहे भाजयुमो कार्यकर्ताओं को रोकने के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थर, बोतलें, टमाटर और संतरे फेंके। इस पथराव में ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर आरएस बघेल घायल हो गए, जिनके सीने में पत्थर लगा और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े और भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता समेत कई लोग घायल बताए गए हैं। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ रोकने की कोशिश की, लेकिन जब तनाव बढ़ा तो वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। लगभग आधे घंटे तक दोनों पक्ष आमने-सामने डटे रहे और नारेबाजी के साथ धक्का-मुक्की होती रही।

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई। भाजपा विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पंढरीनाथ थाने पहुंचे। वहीं भोपाल में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा अपने समर्थकों के साथ हबीबगंज थाने पहुंचे और जिला मंत्री मोहित अग्निहोत्री के घायल होने के मामले में कार्रवाई की मांग की। राकेश परस्ते की शिकायत पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ की कोशिश

भोपाल में भी भारी बैरिकेडिंग के बावजूद भाजयुमो कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय तक पहुंच गए और पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें डंडे चले और कांग्रेस नेता गोपिल कोतवाल के सिर में गंभीर चोट आई। पुलिस ने मामले में कांग्रेस के तीन नेताओं प्रदीप अहिरवार, गोपिल कोतवाल और अमित खत्री पर केस दर्ज किया, जबकि भाजयुमो के आठ कार्यकर्ताओं पर भी प्रकरण कायम हुआ।

कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ता पूर्व नियोजित तरीके से हिंसा और तोड़फोड़ के इरादे से कांग्रेस कार्यालय में घुसने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि उस समय कांग्रेस कार्यकर्ता वहां मौजूद थे और जब भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जबरन प्रवेश का प्रयास किया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अहिरवार के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केवल अपना बचाव किया, लेकिन इसी दौरान पत्थरबाजी हुई जिसमें उनका एक साथी घायल हो गया। उनका कहना है कि घटना एकतरफा उकसावे का परिणाम थी और अगर समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप करता तो टकराव टाला जा सकता था।

अहिरवार ने आगे आरोप लगाया कि इस झड़प में वे स्वयं सहित तीन दलित नेताओं को निशाना बनाकर हमला किया गया। उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी घटना पुलिस की मिलीभगत से हुई और आरोपियों को संरक्षण मिला। उनके अनुसार पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भाजयुमो कार्यकर्ता आक्रामक ढंग से पहुंचे और हमला कर दिया, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

क्या था विवाद?

पूरा विवाद शुक्रवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट के दौरान शुरू हुआ था, जहां यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन किया था। भाजपा ने इसे देश की छवि से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ी आलोचना की, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन बेरोजगारी और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाने के लिए किया गया था। इसी घटनाक्रम के विरोध में मध्यप्रदेश के कई शहरों में भाजयुमो ने प्रदर्शन आयोजित किए। ग्वालियर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन किया और नारेबाजी की।

इंदौर पुलिस के अधिकारियों के अनुसार पथराव करने वालों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जा रही है और पुलिस अधिकारी पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी प्रभावित शहरों में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन कांग्रेस कार्यालयों के बाहर एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। वहीं जबलपुर में भी दिल्ली कार्यक्रम के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन हुआ, जहां बलदेव बाग चौराहे पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर करीब दस थानों की पुलिस, एसडीएम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और पांच सीएसपी स्तर के अधिकारियों को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर हालात सामान्य करने का दावा किया है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक तनाव को और तेज कर दिया है।

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