बोधगया, बिहार- बोधगया महाविहार मुक्ति आंदोलन के 44 दिन हो चुके हैं, तेज होते आन्दोलन और बौध समुदाय को मिल रहे समर्थन आदि को देखते हुए पिछले दिनों BTMC (बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति) के महंत त्रिवेणी गिरी ने एक प्रेस वार्ता में आंदोलनकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि "बुद्ध ने हमें स्वीकार किया है और हम उनकी प्रेरणा से ही इस मंदिर की सुरक्षा-संरक्षण कर रहे हैं।" उन्होंने आंदोलन को "सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश" बताया।
इसके जवाब में आंदोलन के नेतृत्वकर्ता और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. विलास खरात ने महंत के दावों को "झूठा और इतिहास-विरोधी और संविधान-विरोधी" बताते हुए देते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है। खरात ने कहा कि BTMC एक भ्रष्ट संस्था बन चुकी है, जिसमें घोटाले और जाली बिलों का सिलसिला चल रहा है। उन्होंने कहा, "BTMC को RSS और भाजपा नियंत्रित कर रही है।"
खरात ने कहा, " महंत BTMC का सदस्य है, महंत ने प्रेस वार्ता में क्यों ये सब बोला? क्या BTMC के अन्य सदस्यों ने महंत को आगे किया है? क्या RSS-BJP के ब्राह्मणों या बिहार सरकार ने उनको बोलने को कहा है? यह अंतरराष्ट्रीय मामला है और RSS-BJP के लोगों ने ही महंत को प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बोला है...यह महंत ब्राह्मण ने बौद्ध स्थल पर नाजायज रूप से कब्जा क्यों किया है?
प्रेस वार्ता में महंत ने दावा किया था कि ब्राह्मण 500 साल से यहाँ है। इसको चुनौती देते हुए खरात ने कहा कि 1895 के न्यायिक फैसले में भी महंतों के मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्राह्मणों ने आसपास के गावों से राजस्व एकत्र करने के लिए मुगल शासक के साथ समझौता किया जिससे उनकी एंट्री हुई। एक पत्रकार के सवाल पर कि "ब्राह्मण महाविहार को क्यों नियंत्रित कर रहे हैं?", महंत ने प्रतिक्रिया दी थी, "बौद्धों का यहाँ क्या काम?"— जिसकी खरात ने व्यापक आलोचना की।
वार्ता में महंत त्रिवेणी गिरी ने कहा, "बौद्ध, जैन, सिख हिंदू हैं।" इस पर खरात ने स्पष्ट किया- बौद्ध, जैन, सिख अलग धर्म हैं। बौद्ध हिन्दू नहीं हैं". खरात ने आगे कहा, " स्वामी दयानंद सरस्वती ने 'सत्यार्थ प्रकाश' (पेज 81) में लिखा: 'हिंदू' शब्द गाली है, हिन्दू का अर्थ होता है; दुष्ट, नीच, कपटी और गुलाम। हिन्दू की संकल्पना संविधान विरोधी है, न्याय समता और समानता संविधान की संकल्पना है। क्या यह संविधान के समता, न्याय और भाईचारे के सिद्धांतों से मेल खाता है?" खरात ने आगे यह भी कहा - हम यहाँ के मूल निवासी हैं, ब्राह्मणों का डीएनए भारतीय नहीं है. " इन्हें अगर मनुस्मृति इतनी ही प्रिय है तो इन्हें अपनी मूल मातृभूमि वेस्ट यूरेशिया जाना चाहिए। ब्राह्मण देश के संविधान का खुलेआम अपमान कर रहे है। इसपर मूलनिवासी बहुजनों को गंभीरता सोचना होगा!"
महंत का ये दावा कि "बुद्ध ने हमें स्वीकार किया है, हम बुद्ध की प्रेरणा से यहां सेवा कर रहे हैं," इस पर डॉ. खरात का जवाब था, "क्या बुद्ध ने कभी लिखकर दिया कि उनके मंदिर की देखभाल ब्राह्मण करेंगे? यह झूठ है। बोध गया को शिव मंदिर कहना, बुद्ध की मूर्तियों को पांडवों की मूर्ती बताकर बोधगया का संरक्षण कर रहे हो ? "
डॉ. खरात ने BTMC के घोटालों और भ्रस्टाचार को उजागर करते हुए कहा: सतीश दास ने BTMC के जाली बिल और फर्जी खर्चों के दस्तावेज दिखाए हैं, लेकिन बिहार सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही।
डॉ. खरात ने घोषणा की कि 6 अप्रैल को नागपुर के बेझनबाग ग्राउंड में एक बड़ी जनसभा होगी, जहाँ BTMC के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोला जाएगा। उन्होंने कहा "ब्राह्मणवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकना होगा। BTMC का विघटन करके महाबोधि मंदिर बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।"
उन्होंने आगे कहा 1949 में बना BT एक्ट संविधान लागू होने से पहले बना अधिनियम है और इसलिए इस एक्ट को निरस्त करने की मांग सही है, सरकार को बोध गया का प्रबधन पूर्ण रूप से बौध समुदाय को सौंपना होगा"।