NEET घोटाला राष्ट्रीय शर्म, केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक आधार पर तुरंत दें इस्तीफा: IDPD

06:41 PM May 16, 2026 | The Mooknayak

नई दिल्ली: बार-बार सामने आ रहे NEET पेपर लीक घोटाले को लेकर 'इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट' (IDPD) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है। संगठन ने इस पूरे परीक्षा घटनाक्रम को 'राष्ट्रीय शर्म' करार दिया है।

IDPD का कहना है कि इस घोटाले ने देश के छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करने में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, NTA और भाजपा सरकार की पूर्ण विफलता को उजागर कर दिया है। संगठन के मुताबिक, सरकार इस संवेदनशील मामले को महज एक सामान्य प्रशासनिक चूक बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

संगठन ने मांग की है कि इस घोटाले की जवाबदेही सबसे ऊपर से तय होनी चाहिए। इसके तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नैतिक आधार पर तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, ताकि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।

Trending :

IDPD के अनुसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही इस परीक्षा घोटाले की जांच बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या हितों के टकराव के पूरी की जा सकती है।

NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए संगठन ने कहा कि इसकी संरचना और काम करने के तरीके में बुनियादी खामियां नजर आती हैं। यही वजह है कि एक ही प्रकार की गंभीर विफलताएं पिछले कई वर्षों से बार-बार दोहराई जा रही हैं।

जारी बयान के मुताबिक, NTA के 9 वर्षों के अस्तित्व के दौरान अब तक लगभग 20 परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा है, जो पारदर्शी परीक्षा आयोजित करने में इसकी असमर्थता को दर्शाता है।

इस अव्यवस्था के कारण देश के लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को भारी अनिश्चितता, चिंता और गंभीर मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही और असमर्थता को जिम्मेदार ठहराया है।

IDPD ने कहा है कि सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करने में इस तरह की नाकामियों के कारण देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बेहद गंभीर रूप से कमजोर हो रहा है।

सालों तक कठिन परिश्रम, आर्थिक कठिनाइयों और अथक तैयारी के बल पर अपने भविष्य के लिए संघर्ष करने वाले छात्रों के लिए पेपर लीक के बाद परीक्षाओं का रद्द होना एक क्रूर विश्वासघात से कम नहीं है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि भारत के युवाओं को व्यवस्था में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और न्याय चाहिए। युवा अब ऐसे बार-बार होने वाले घोटाले नहीं चाहते जो उनके सपनों को चकनाचूर करते हैं और सार्वजनिक संस्थाओं पर से उनका भरोसा पूरी तरह खत्म करते हैं।

यह संयुक्त वक्तव्य IDPD के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण मित्रा और महासचिव डॉ. शकील उर रहमान द्वारा जारी किया गया है।