+

स्कॉलरशिप अटकी, हॉस्टल में पानी-सफाई नहीं: सब्र टूटा तो नागपुर में परेशान आदिवासी स्टूडेंट्स ने उठाया ये कदम!

नागपुर- आदिवासी विकास विभाग की योजनाओं में लगातार हो रही देरी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) भुगतान में रुकावट और शासकीय वसतिगृहों (होस्टल) की जर्जर सुविधाओं के विरोध में नागपुर में आदिवासी विद्यार्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। 15 मई को स्टूडेंट्स सिविल लाइन्स स्थित जनजाति विकास कमीश्नर कार्यालय के बाहर धरना लगाकर बैठ गए जिसमें नागपुर के 14 शासकीय आदिवासी वसतिगृहों से आए 500 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए। विद्यार्थी प्रचंड गर्मी के दौर में दिनभर प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे और कईयों ने प्रदर्शन स्थल पर ही रात गुजारी।

आदिवासी विद्यार्थी संघ-विदर्भ, नागपुर की ओर से प्रस्तुत ज्ञापन में विभाग की योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। ज्ञापन के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित शासकीय वसतिगृह योजना के तहत राज्यभर में 495 वसतिगृह मंजूर हैं, जिनमें से 491 कार्यान्वित हैं। इनमें 283 लड़के व लड़कियों के वसतिगृह शामिल हैं। शासन निर्णय क्रमांक आविशी/2004/प्र.क्र.9/का.12 दिनांक 9 अगस्त 2004 के तहत भारत सरकार की इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को स्कूली परीक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उनके शिक्षा खर्च को वहन करना है। इसके अंतर्गत निर्वाह भत्ता, शिक्षा शुल्क, परीक्षा शुल्क तथा अन्य शुल्क दिए जाते हैं।

होस्टलों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी बताई गई है। कई जगहों पर पेयजल की अपर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता का अभाव, सुरक्षा के अपर्याप्त उपाय और अभ्यास के लिए उपयुक्त वातावरण नहीं है।

आदिवासी विद्यार्थी संघ के अध्यक्ष गणेश इरपाची ने आरोप लगाया कि शासन का उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित निवास, आर्थिक सहायता और प्रतिस्पर्धी वातावरण उपलब्ध कराना है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। DBT, शिष्यवृत्ति, निर्वाह भत्ता, शैक्षणिक साहित्य, मेडिकल खर्च, ड्रेस कोड और शैक्षणिक सहल जैसी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान हो रहा है। कई विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है और निधि वितरण में देरी के कारण पढ़ाई जारी रखना कठिन हो गया है।

वसतिगृहों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी बताई गई है। कई जगहों पर पेयजल की अपर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता का अभाव, सुरक्षा के अपर्याप्त उपाय और अभ्यास के लिए उपयुक्त वातावरण नहीं है। अनेक वसतिगृहों में कंप्यूटर, Wi-Fi, प्रिंटर, पुस्तकालय तथा स्पर्धात्मक परीक्षाओं की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ रहे हैं।

विद्यार्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का तत्काल समाधान नहीं निकाला गया तो वे प्रदेश स्तरीय आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।

21 सूत्री मांगपत्र सौंपा

आदिवासी विद्यार्थी संघ ने विस्तृत 21 सूत्री मांगों का मांगपत्र सौंपा है। इसमें शैक्षणिक सत्र 2025-26 के सभी बकाया बिलों ड्रेस कोड, शैक्षणिक सहल, मेडिकल तथा अन्य शैक्षणिक खर्चों का तत्काल भुगतान, वसतिगृह प्रवेश प्रणाली में सुधार कर शैक्षणिक अवधि 10 महीने से बढ़ाने, अतिरिक्त DBT की तत्काल मंजूरी, नागपुर शहर के मध्यवर्ती स्थान पर सुसज्ज वाचनालय एवं अभ्यासिका स्थापित करने, सभी वसतिगृहों में कंप्यूटर, Wi-Fi एवं प्रिंटर की सुविधा उपलब्ध कराने, स्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए दर्जेदार पुस्तकें, संदर्भ सामग्री एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

इसके अलावा महाविद्यालयीन प्रवेश तिथि से DBT लागू करने, TRTI योजनाओं में देरी रोककर पात्र विद्यार्थियों को समय पर लाभ देने, आदिवासी विकास विभाग द्वारा वार्षिक रोजगार मेलों का आयोजन करने, चौकीदार पद की भर्ती में परीक्षा शुल्क कम करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया विभाग द्वारा पारदर्शी तरीके से चलाने, वसतिगृहों की क्षमता 1000 न रखकर उचित विभाजन कर प्रत्येक को स्वतंत्र प्रशासनिक दर्जा देने, आदिवासी समाज की बैकलोग पदभर्ती तुरंत पूरी करने, PESA भर्ती प्रक्रिया शुरू करने, 12,500 विशेष पदों की भर्ती करने, आदिवासी लड़कियों के लिए अलग सरकारी इमारत एवं सुरक्षित निवास सुविधा उपलब्ध कराने, बकाया शिष्यवृत्ति सीधे खातों में जमा करने, शोध प्रबंध राशि 8,000 रुपये, मेडिकल बिल (सरकारी एवं निजी) मंजूर करने, ड्रेस कोड राशि बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा शैक्षणिक सहल राशि 10,000 रुपये करने की मांग की गई है।

कई हॉस्टल में कंप्यूटर, Wi-Fi, प्रिंटर, लाइब्रेरी, कॉम्पिटिटिव एग्जाम की किताबें जैसी सुविधाओं की कमी के कारण, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के छात्र कॉम्पिटिटिव एग्जाम में पीछे रह जाते हैं।

आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी विद्यार्थी संघ-विदर्भ, नागपुर के अध्यक्ष गणेश एस. इरपाची, उपाध्यक्ष मोहित पंधरे, आँचल परतेती, सचिव सागर गांगुर्डे और कोषाध्यक्ष शेखर कोराम कर रहे हैं। विद्यार्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का तत्काल समाधान नहीं निकाला गया तो वे प्रदेश स्तरीय आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।

जानकारी के अनुसार आदिवासी विकास विभाग ने इस मामले पर 25 मई को बैठक बुलाई है, जिसमें विद्यार्थियों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। विद्यार्थी शासन के सकारात्मक और त्वरित निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह आंदोलन आदिवासी विद्यार्थियों के शिक्षा, भविष्य और मौलिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

Trending :
facebook twitter