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नोएडा श्रमिक प्रदर्शन हिंसा: कस्टडी में टॉर्चर के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार को दोनों गिरफ्तार आरोपियों को पेश करने का आदेश

उत्तर प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने नोएडा में 13 अप्रैल को श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए दो लोगों को अपने समक्ष पेश करने को कहा है। यह आदेश तब आया जब गिरफ्तार किए गए इन व्यक्तियों के परिवारों ने पुलिस हिरासत में उन्हें बेरहमी से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वे 18 मई 2026 को दोपहर 2 बजे तक आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को अदालत के समक्ष पेश करें। शीर्ष अदालत आदित्य के भाई केशव आनंद द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि आदित्य और रूपेश ने प्रदर्शन के दौरान व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भीड़ को उकसाने और हिंसा भड़काने का काम किया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत में आदित्य का मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आदित्य पेशे से एक इंजीनियर है और वह बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी भी चलाता है। इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए वकील ने कहा कि आदित्य हमेशा से मजदूरों के बुनियादी अधिकारों के लिए अभियान चलाता रहा है और उनके भाषणों की रिकॉर्डिंग इस बात का पुख्ता सबूत है।

इसके साथ ही अधिवक्ता ने अदालत के सामने यह भी दावा किया कि वकीलों को आदित्य की कानूनी तौर पर प्रभावी ढंग से मदद करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने हिरासत में प्रताड़ना के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि गिरफ्तारी से जुड़ी सभी कानूनी औपचारिकताओं का पूरी तरह से पालन किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना भी शामिल है।

दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि वे प्रतिवादी संख्या 1 यानी राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता के भाई आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को 18 मई 2026 को दोपहर 2 बजे इस अदालत में पेश किया जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बीच दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी।

इससे पहले 17 अप्रैल को नोएडा पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को कथित मास्टरमाइंड के रूप में पहचाना था। इनमें खुद को ऑटो रिक्शा चालक बताने वाला रूपेश रॉय, मनीषा चौहान और एनआईटी जमशेदपुर (NIT Jamshedpur) से बीटेक स्नातक आदित्य शामिल थे। इसके ठीक एक दिन बाद नोएडा पुलिस और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की एक संयुक्त टीम ने आदित्य को तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया था। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया गया था।

पुलिस ने अपने एक आधिकारिक बयान में बताया था कि आदित्य आनंद के खिलाफ फेज 2 पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उस पर इलाके में श्रमिकों के धरने और प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का आरोप है। पुलिस का यह भी आरोप है कि इस पूरे आंदोलन से जुड़ी भड़काऊ गतिविधियों की साजिश रचने और उन्हें लागू करने में उसकी ही मुख्य भूमिका थी।

इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की है। इन दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।

नोएडा में हुए इस प्रदर्शन और उसके बाद भड़की हिंसा के मामले में अब तक कुल 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ था बल्कि यह पूरी तरह से पूर्व नियोजित था। उनका आरोप है कि 'बाहरी लोगों के एक संगठित सिंडिकेट' ने इस पूरी हिंसा की साजिश रची थी। हालांकि, गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजनों ने पुलिस के इन सभी दावों और साजिश के आरोपों से साफ इनकार किया है।

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