भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से ईंधन बचत, सादगी और बड़े वाहन काफिलों से बचने की अपील के बावजूद मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं द्वारा निकाली गई वाहन रैलियों पर अब संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सख्ती शुरू हो गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़े-बड़े वाहन काफिलों के साथ स्वागत रैलियां निकालने वाले नेताओं को 17 मई को भोपाल तलब किया गया है। यहां उनसे जवाब मांगा जाएगा कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपील के बावजूद इस तरह की रैलियां क्यों निकाली गईं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पूरे मामले से नाराज है और दिल्ली से प्रदेश संगठन को विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा 10 मई को ईंधन बचत, सार्वजनिक परिवहन और सादगी अपनाने की अपील किए जाने के बाद भी प्रदेश में कई नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन के तौर पर सैकड़ों वाहनों के काफिले निकाले। इसे पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और प्रधानमंत्री के संदेश की अवहेलना माना है।
भाजपा नेताओं ने निकाली रैलियां
दरअसल, हाल ही में विभिन्न जिलों में भाजपा नेताओं के स्वागत और पदभार ग्रहण कार्यक्रमों के दौरान बड़े पैमाने पर वाहन रैलियां देखने को मिली थीं। कई जगहों पर सैकड़ों कारों और बाइक का काफिला सड़कों पर उतरा, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब इसे सार्वजनिक तौर पर उठाया गया और सवाल खड़े हुए कि एक तरफ प्रधानमंत्री देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के ही नेता बड़े वाहन काफिलों के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदेश भाजपा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित नेताओं को भोपाल बुलाया है। 17 मई को होने वाली बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी और अन्य जिम्मेदार नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में नेताओं से पूछा जाएगा कि प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद वाहन रैलियां क्यों निकाली गईं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं का जवाब संतोषजनक नहीं होगा, उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इन नेताओं पर पीएम की अपील रही बेअसर
भाजपा ने कुछ मामलों में पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है। भिंड के भाजपा किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव ने कथित तौर पर करीब सौ वाहनों के काफिले के साथ बग्घी पर सवार होकर रैली निकाली थी। इस मामले में उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। वहीं मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह पर भी कार्रवाई हुई है। बताया गया कि वे लगभग 700 गाड़ियों के काफिले के साथ उज्जैन से भोपाल पहुंचे थे। उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और कुछ अधिकार भी वापस ले लिए गए हैं।
इसके अलावा कई अन्य नेताओं की रैलियां भी सवालों के घेरे में हैं। देवास जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष टिकेंद्र प्रताप सिंह पर करीब 200 वाहनों के काफिले के साथ जिला कार्यालय पहुंचने का आरोप है। ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार चंबल दौरे पर 24 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे थे। सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल खुद ई-रिक्शा में बैठे नजर आए, लेकिन उनके पीछे 30 से अधिक गाड़ियों का काफिला चल रहा था।
महिला आयोग की अध्यक्ष का निकला काफिला
इसी तरह मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के छतरपुर दौरे में सैकड़ों लग्जरी वाहनों के काफिले की चर्चा रही। बताया गया कि इस दौरान ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी। वहीं लघु उद्योग निगम अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन भी ई-रिक्शा से कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन उनके समर्थकों के बड़े वाहन काफिलों को लेकर सवाल उठे।
सीएम ने अपने काफिले से हटाई गाड़ियां
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद अपने काफिले से पांच वाहन कम कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों ने भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाई है। भाजपा संगठन अब यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि प्रधानमंत्री की अपील केवल आम जनता के लिए नहीं, बल्कि पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों के लिए भी समान रूप से लागू है।
प्रधानमंत्री ने की यह अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने, गैरजरूरी विदेश यात्राएं टालने और खाद्य तेल की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने किसानों से रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने, प्राकृतिक खेती और सोलर सिंचाई को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया था। इसके अलावा जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी गई थी। अब भाजपा संगठन चाहता है कि इन अपीलों का पालन पार्टी के भीतर भी सख्ती से सुनिश्चित किया जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस मामले को केवल वाहन रैलियों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे संगठनात्मक अनुशासन और सार्वजनिक संदेश से जोड़कर देख रही है। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भी मामले में रुचि दिखाई है। 17 मई को भोपाल में होने वाली बैठक के बाद यह तय हो सकेगा कि किन नेताओं के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।