हैदराबाद: वोटर मैपिंग के लिए चुनाव आयोग ने सफाई कर्मचारी को बनाया 'BLO', वीडियो हुआ वायरल

10:50 AM Apr 10, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: हैदराबाद के पुराने शहर इलाके में मंगलवार को एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। यहां के कई निवासियों ने 2002 की मतदाता सूची के आधार पर 'प्री-एसआईआर' (pre-SIR) मैपिंग प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क किया था। लेकिन वहां उन्हें नियमों के जानकार अधिकारी की जगह ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) का एक सफाई कर्मचारी मिला, जिसे वोटर मैपिंग की कोई जानकारी ही नहीं थी।

बरकास इलाके में खुली पोल

यह पूरा वाकया चंद्रायनगुट्टा निर्वाचन क्षेत्र के बरकास इलाके का है। स्थानीय लोगों ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपने बीएलओ का नाम और नंबर देखकर उससे संपर्क किया था। इस मैपिंग प्रक्रिया में निवासियों की मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सैयद जलालुद्दीन जफर ने इस पूरी घटना का खुलासा किया।

उन्होंने बताया, "हम में से लगभग 20 लोग बरकास के सलाला स्थित अल-कुरमोशी ग्लोबल स्कूल में उनका इंतजार कर रहे थे। जब हमने उससे बात की, तो हमें एहसास हुआ कि उसे बीएलओ की भूमिका के बारे में कुछ भी नहीं पता है। जब मैंने एसआईआर मैपिंग का जिक्र किया, तभी वह उस स्थान पर आया।"

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जफर ने आगे बताया कि वह कर्मचारी तेलुगु पढ़ या लिख भी नहीं सकता था। उसने अपना फोन लोगों को पकड़ा दिया और उनसे खुद अपना विवरण ऑनलाइन फॉर्म में दर्ज करने को कहा। जफर ने इस घटना का एक वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर तेजी से वायरल हो रहा है।

नियुक्तियों के नियम और जमीनी हकीकत

नियमों के अनुसार ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो सफाई कर्मचारियों को बीएलओ बनने से रोकता हो। हालांकि, दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि यह जिम्मेदारी आमतौर पर सरकारी या अर्ध-सरकारी कर्मचारियों को दी जाती है। इनमें शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत कर्मचारी, क्लर्क और बिल कलेक्टर जैसे लोग शामिल होते हैं, जिनसे बुनियादी साक्षरता और प्रशासनिक अनुभव की उम्मीद की जाती है।

बीएलओ के रूप में तैनात किए गए एक सफाई कर्मचारी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उन्हें एसआईआर के काम के लिए स्मार्टफोन दिए गए हैं।

"मेरे साथ ऐसे करीब 10 और कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया है। हमें फोन पर पोर्टल खोलकर व्यक्ति को देने के लिए कहा गया था, जो फिर फॉर्म में अपना विवरण भरता है। यदि नाम दिखाई देता है, तो हम टिक लगा देते हैं। मैंने एक ट्रेनिंग सेशन में भी हिस्सा लिया था जहां हमें भुगतान का वादा किया गया था।"

दिनभर सफाई, फिर मैपिंग की ड्यूटी

इस सफाई कर्मचारी की दिनचर्या भी काफी थका देने वाली है। वह सुबह 5 बजे अपना नियमित काम शुरू करता है और दोपहर 2 बजे अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद एसआईआर की ड्यूटी पर लग जाता है। उसने खुद स्वीकार किया कि वह तेलुगु या अंग्रेजी पढ़ना-लिखना नहीं जानता और उसे यह काम शुरू किए हुए अभी केवल दो दिन ही हुए हैं।

चुनाव अधिकारी का क्या है तर्क?

मामले के तूल पकड़ने के बाद चंद्रायनगुट्टा के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी वी. सुरेंद्र ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के चलते ऐसी नियुक्तियां करनी पड़ी हैं।

अधिकारी के अनुसार कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और यह मैपिंग प्रक्रिया बहुत बड़े पैमाने पर चल रही है, इसलिए यह केवल एक अस्थायी व्यवस्था (stop-gap arrangement) है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके क्षेत्र में तीन सफाई कर्मचारी बीएलओ के रूप में काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि यह सुनिश्चित किया गया था कि नियुक्त किए गए कर्मचारी कम से कम 9वीं कक्षा तक पढ़े हों और उन्हें बुनियादी जानकारी हो। प्रशासन का कहना है कि इन कर्मचारियों को जल्द ही बदल दिया जाएगा।