भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सह प्रभारी और दिल्ली से विधायक रहे सतीश उपाध्याय पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा है। यह आरोप आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने लगाया है। भारती ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना को पत्र सौंपकर न सिर्फ इस आरोप की जानकारी दी है, बल्कि यह भी बताया कि पीड़ित आदिवासी महिला लापता है और उसकी सुरक्षा खतरे में है।
सोमनाथ भारती ने बुधवार को डीजीपी से मुलाकात कर उन्हें यह पत्र सौंपा। उन्होंने महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है। इस मुलाकात के बाद भारती ने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने बीजेपी की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, “चाल, चरित्र और चेहरा की बात करने वाली बीजेपी अब इस मामले में क्या करती है, यह देखना होगा।”
क्या लिखा है पत्र में?
डीजीपी को सौंपे गए पत्र में भारती ने दावा किया है कि वे स्वयं दिल्ली विधानसभा में मालवीय नगर सीट से 10 वर्षों तक विधायक रहे हैं और पिछली बार वे सतीश उपाध्याय से बेहद मामूली अंतर से हारे थे। भारती ने कहा कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि उपाध्याय ने मध्यप्रदेश में अपने खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी चुनावी हलफनामे में छिपाई है।
भारती के मुताबिक यह मामला एक आदिवासी महिला से यौन शोषण का है, जो बीजेपी की ही महिला कार्यकर्ता रही है। उन्होंने लिखा कि “उपाध्याय ने सह प्रभारी के रूप में पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता का शारीरिक शोषण किया और अब वह महिला लापता है।"
कोर्ट से मांगी गई जानकारी, सुनवाई 8 अप्रैल को
सोमनाथ भारती ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सतीश उपाध्याय के खिलाफ चल रहे केस की जानकारी मांगी है और इस मामले में सुनवाई 8 अप्रैल को होनी है। उन्होंने कहा कि "मैं यह जानने के लिए भोपाल आया हूं कि यह मामला किस थाने में दर्ज है और किस कोर्ट में चल रहा है, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।"
डीजीपी से मुलाकात के बाद सोमनाथ भारती ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली बीजेपी अब इस बेटी के लिए क्या करती है? यह देखना जरूरी है। बीजेपी को चाहिए कि वह इस मामले की जांच कराए और पीड़िता को न्याय दिलाए।”
सोशल मीडिया पर वायरल हुई चिट्ठी
सोमनाथ भारती ने सिर्फ डीजीपी को ही नहीं, बल्कि भोपाल जिला न्यायालय के न्यायाधीश को भी एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने यही बातें दोहराईं हैं। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हालांकि, इस पत्र में उपाध्याय के खिलाफ दर्ज केस की विस्तृत जानकारी या FIR नंबर का उल्लेख नहीं है, जिससे कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं।