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MP: बीजेपी ने विधानसभा में किसानों की आवाज उठाने वाले दलित विधायक को नोटिस क्यों दिया?

भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा ने आलोट विधानसभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति के विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मालवीय द्वारा उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर उठाए गए सवालों के परिणामस्वरूप जारी किया गया है। पार्टी ने उनके बयानों और कृत्यों को अनुशासनहीनता मानते हुए, सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल यह उठता है कि जब एक विधायक ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुद्दा उठाया, तो पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता क्यों माना? क्या भाजपा ऐसे सवालों को दबाने की कोशिश कर रही है, जो उसकी छवि को प्रभावित कर सकते हैं?

क्या है मामला?

विधानसभा में, डॉ. मालवीय ने मुख्यमंत्री द्वारा सिंहस्थ महाकुंभ के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन उज्जैन के किसानों की चिंताओं को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि पहले सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन 3 से 6 महीनों के लिए अधिग्रहित की जाती थी, लेकिन अब उन्हें स्थायी अधिग्रहण के नोटिस मिल रहे हैं, जिससे वे डरे और परेशान हैं।

मालवीय ने यह भी सवाल उठाया कि स्पिरिचुअल सिटी बनाने का विचार किस अधिकारी ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता किसी शहर में नहीं बसती, बल्कि त्याग करने वाले लोगों में होती है। उन्होंने आशंका जताई कि स्थायी निर्माण और भूमि अधिग्रहण के पीछे कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं की साजिश हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत प्रशासन स्थायी सुविधाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की योजना बना रहा है। कुछ किसान इस अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, जबकि साधु-संत प्रशासन के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, यह मानते हुए कि स्थायी निर्माण से सिंहस्थ का आयोजन भव्य और सुरक्षित होगा।

डॉ. चिंतामणि मालवीय ने 'द मूकनायक' से बातचीत में कहा कि वे विधानसभा में उठाए गए अपने सवाल पर कायम हैं और माफी मांगने का उनका स्वभाव नहीं है। उन्होंने अभी तक नोटिस नहीं मिलने की बात कही और मिलने पर उचित जवाब देने की बात कही। मालवीय ने खुद को पार्टी का सदस्य और विधायक बताते हुए कहा कि पार्टी एक परिवार होती है।

किसान संघ का भी विरोध

भारतीय किसान संघ के प्रांत संगठन मंत्री राहुल धूत ने 'द मूकनायक' से बातचीत में उज्जैन में स्थायी भूमि अधिग्रहण के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि यह किसान हित में नहीं है। उन्होंने मांग की कि स्थायी अधिग्रहण को रद्द कर अस्थायी अधिग्रहण किया जाए और किसानों को उनकी भूमि के अनुरूप उचित मुआवजा एवं किराया दिया जाए।

यह मामला भाजपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और अनुशासन के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। किसानों की समस्याओं को उठाने वाले एक विधायक को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी करना दर्शाता है कि पार्टी ऐसे मुद्दों को दबाने का प्रयास कर सकती है, जो उसकी छवि को प्रभावित कर सकते हैं।

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