+

MP मंत्री फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला: प्रतिमा बागरी ने कहा – 'जांच करा लें, कांग्रेस नेता को भेजूंगी मानहानि का नोटिस'

भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया है कि बागरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है और उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़कर मंत्री पद हासिल किया, जिससे वास्तविक हकदारों के संवैधानिक अधिकारों की हकमारी हुई है। आरोप के जवाब में मंत्री प्रतिमा बागरी ने द मूकनायक से कहा,- की वह अब कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार पर मानहानि का केस करेंगी।

क्या है मामला?

अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंगलवार में कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता में कहा था कि सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, लेकिन प्रतिमा बागरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर यहां से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर मंत्री पद प्राप्त किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि बागरी उपनाम वाले लोग बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्रों में मूल रूप से ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं, जो अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद, प्रशासनिक मिलीभगत से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया और आरक्षण नीति का दुरुपयोग कर राजनीति में प्रवेश किया गया।

इधर, मंत्री प्रतिमा बागरी ने द मूकनायक से विस्तृत बातचीत में कहा कि उनके दादा, पिता और वह स्वयं अनुसूचित जाति वर्ग से आती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका जन्म एससी वर्ग में हुआ है और उनकी शादी भी बागरी समाज में हुई है।

प्रतिमा बागरी ने कहा कि राजनीति में सक्रिय होने के बाद और मंत्री बनने के कारण कांग्रेस के नेताओं को आपत्ति हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अनुसूचित जाति वर्ग से ही हैं और उनके पास सही जाति प्रमाण पत्र मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं द्वारा उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है, जिसके चलते वह प्रदीप अहिरवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर अहिरवार को मानहानि का नोटिस भेजा जाएगा।

प्रदीप अहिरवार ने प्रतिमा बागरी के आरोपों का खंडन करते हुए द मूकनायक से कहा कि मंत्री में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह उन पर मानहानि का केस कर सकें।

प्रदीप अहिरवार ने आगे कहा कि मंत्री का जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी है और उनके परिवार द्वारा ही तैयार किया गया है। उन्होंने दोहराया कि प्रतिमा बागरी और उनका परिवार राजपूत/ठाकुर समुदाय से आता है, लेकिन केवल जाति नाम की समानता के कारण उन्होंने एससी प्रमाण पत्र का लाभ लिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि 1961 की जाति जनगणना और 2003 व 2007 के सरकारी आदेशों में यह स्पष्ट किया गया था कि राजपूत बागरी समाज के लोग अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकते। 1961 और 1971 की जनगणना में बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के बागरी समाज के लोगों ने खुद को अनुसूचित जाति वर्ग का माना ही नहीं क्योंकि वे राजपूत ठाकुर समुदाय से संबंधित थे।

हालांकि, 1976 में भारत सरकार के राजपत्र के माध्यम से जब अनुसूचित जातियों की सूची को प्रदेश स्तर पर लागू किया गया और सीमा क्षेत्र का बंधन समाप्त कर दिया गया, तब सूची में क्रमांक 2 पर वास्तविक अनुसूचित जाति ‘बागरी’ को शामिल किया गया। इसके बाद, राजपूत बागरी जाति के कुछ लोगों ने जाति नाम की समानता का लाभ उठाते हुए अवैध रूप से अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र बनवाने शुरू कर दिए। इसी प्रक्रिया के तहत प्रतिमा बागरी के परिवार ने भी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित श्रेणी के लाभ प्राप्त किए।

सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए, प्रदीप अहिरवार ने कहा: 2003 में, मध्य प्रदेश सरकार ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया था कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले राजपूत बागरी समुदाय को एससी प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। 2007 में, केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया था कि राजपूत बागरी (ठाकुर) समुदाय अनुसूचित जाति में शामिल नहीं है और उसे एससी प्रमाण पत्र नहीं दिया जाना चाहिए।

प्रदीप अहिरवार ने कहा कि मध्य प्रदेश की उच्चस्तरीय छानबीन समिति के अनुसार, बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के राजपूत बागरी समुदाय बड़े किसान हैं और अनुसूचित जाति की तरह वंचित नहीं माने जा सकते। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी को एससी प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिसके आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ा, जो कि संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।

जाति समानता का लाभ उठाकर हक छीनने का आरोप

अनुसूचित जाति कांग्रेस का कहना है कि जाति नाम समानता का गलत फायदा उठाया गया। उदाहरण के लिए—

'बागरी' उपनाम अनुसूचित जाति (SC) और ठाकुर (सामान्य वर्ग) दोनों में पाया जाता है, लेकिन राजपूत बागरी अनुसूचित जाति में नहीं आते। इसी तरह, 'कुशवाहा' उपनाम माली (पिछड़ा वर्ग) और ठाकुर (सामान्य वर्ग) दोनों में पाया जाता है। कई अन्य जातियों में भी यह समानता है, लेकिन यह आरक्षण नीति का दुरुपयोग करने का आधार नहीं बन सकती।

अनुसूचित जाति समाज के अवसर छीने गए: कांग्रेस

अनुसूचित जाति कांग्रेस ने इसे संविधान द्वारा दिए गए सामाजिक न्याय के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि, "फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए SC के हकदार नेताओं के अवसर छीने गए। सामाजिक न्याय और समानता की नीति का उल्लंघन हुआ। SC समाज के नेताओं को प्रतिनिधित्व से वंचित किया गया। प्रदीप अहिरवार ने द मूकनायक से बातचीत में कहा,- "अगर सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कराती, तो हम इस मुद्दे को उच्च न्यायालय तक लेकर जाएंगे और सड़क से संसद तक आंदोलन करेंगे।"

facebook twitter