भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अनुसूचित जाति कांग्रेस ने मंगलवार को जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति के समक्ष उनकी जाति प्रमाण की जांच कराने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र अवैध रूप से जारी किया गया है और वह अनुसूचित जाति वर्ग की न होकर ठाकुर/राजपूत समाज (सामान्य) से आती हैं।
छानबीन समिति को सौंपे गए दस्तावेज
अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने छानबीन समिति को इस संबंध में लिखित शिकायत दी और शपथ पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सौंपे। प्रदीप अहिरवार ने बताया कि जाति नाम की समानता का लाभ उठाकर प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफल रहीं, जबकि वे वास्तव में इस वर्ग से संबंध नहीं रखतीं।
उन्होंने कहा, "मध्यप्रदेश के विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्रों में बागरी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल नहीं किया गया है, जबकि मालवा और निमाड़ क्षेत्रों में यह जाति अनुसूचित जाति श्रेणी में आती है। जाति नाम की समानता का फायदा उठाकर प्रतिमा सिंह बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा लिया है। इससे न केवल अनुसूचित जाति वर्ग के वास्तविक हकदारों के अधिकारों का हनन हुआ है, बल्कि यह संविधान के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।"
मंत्री पद और विधायक सदस्यता समाप्त करने की मांग
प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा कि उनकी मांग है कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र रद्द किया जाए। इसके साथ ही, उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए और उनकी विधानसभा सदस्यता को शून्य घोषित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "रैगांव विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यदि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी साबित होता है, तो उनकी सदस्यता भी निरस्त होनी चाहिए और इस सीट पर पुनः चुनाव कराया जाना चाहिए, जिससे वास्तविक अनुसूचित जाति वर्ग के व्यक्ति को प्रतिनिधित्व मिल सके।"
संगठन ने चेताया, आंदोलन और न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी
अनुसूचित जाति कांग्रेस ने इस मामले पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे और न्यायालय की शरण में जाने के लिए बाध्य होंगे।
संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं?
भारतीय संविधान के तहत, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर केवल उन्हीं उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति होती है, जो प्रमाणित रूप से अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। यदि कोई व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीतता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में किया गया है।