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सपा नेता की 'ब्राह्मणों' पर अभद्र टिप्पणी से गरमाई यूपी की सियासत: मायावती का अखिलेश पर तीखा प्रहार, कहा- 'माफी मांगें सपा मुखिया'

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई एक कथित अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारी सियासी उबाल ला दिया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस विवाद में कूदते हुए सपा नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला है।

बुधवार सुबह 10:23 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट करते हुए मायावती ने सपा मुखिया (अखिलेश यादव) की चुप्पी को कटघरे में खड़ा किया और उनसे ब्राह्मण समाज से तत्काल माफी मांगने की मांग की है।

बसपा सुप्रीमो मायावती का बयान

मायावती ने अपने बयान में सपा की 'संकीर्ण जातिवादी राजनीति' पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. मायावती ने कहा कि सपा प्रवक्ता के गैर-जिम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सपा मुखिया को तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना और पश्चाताप करना चाहिए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि इस अभद्र टिप्पणी को लेकर हर तरफ भारी आक्रोश है और मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मामला थम नहीं रहा है। लेकिन सपा नेतृत्व की खामोशी से यह स्थिति और अधिक तनावपूर्ण व गंभीर होती जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से साबित हो गया है कि सपा का चाल और चरित्र दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज की तरह ही ब्राह्मण समाज-विरोधी भी है और यह मानसिकता अब पहले से कहीं ज्यादा गहरी हो गई है।

अपनी पार्टी का बचाव करते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा ने हमेशा 'सर्वसमाज' की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर आदर-सम्मान व उचित भागीदारी दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बसपा में 'यूज़ एंड थ्रो' (इस्तेमाल करो और फेंको) की नीति नहीं चलती।

मायावती ने वर्तमान (भाजपा) सरकार के रवैये की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज में मौजूदा सरकार के प्रति जो जबरदस्त नाराजगी है, वह भी किसी से छिपी नहीं है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ। एक कार्यक्रम के दौरान भाटी को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि, "न तो ब्राह्मण अच्छा होता है, और न ही कोई तवायफ।"

इस आपत्तिजनक बयान के बाद, ब्राह्मण समाज के लोगों में भारी रोष फैल गया। नोएडा के सेक्टर 53 निवासी सुशील कुमार शर्मा की लिखित शिकायत पर सेक्टर 24 थाने में भाटी के खिलाफ धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

विवाद बढ़ता देख राजकुमार भाटी ने माफी मांग ली है। उनका तर्क है कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से काटकर "गलत प्रचार" फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया है।

अन्य राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर सपा घिरती हुई नज़र आ रही है और अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष ने भी उस पर हमला तेज़ कर दिया है. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इस बयान से समाजवादी पार्टी का "असली चरित्र और नफरत भरी मानसिकता" एक बार फिर जनता के सामने बेनकाब हो गई है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एक्स पर पोस्ट कर इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि विचारधारा में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पूरे समुदाय का अपमान कतई स्वीकार्य नहीं है। राय ने मांग की कि सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं है, बल्कि सपा को ऐसे गैर-जिम्मेदार नेता के खिलाफ तुरंत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

2026 के इस ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रम ने यूपी में 'ब्राह्मण वोट बैंक' की राजनीति को फिर से केंद्र में ला दिया है। एक ओर सपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है, तो दूसरी ओर बसपा, कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे के जरिए सपा के 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) और सर्वसमाज के दावों की हवा निकालने में जुट गए हैं।

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