+

संसदीय समिति करेगी रिव्यू : कितना प्रभावी एट्रोसिटी एक्ट, आदिवासियों के वनाधिकार कानून में कहां कमी?

नई दिल्ली- अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के कल्याण व सशक्तिकरण से जुड़े प्रमुख कानूनों तथा नीतियों की प्रभावी समीक्षा के लिए संसद की एक समिति सक्रिय हो गई है। लोकसभा सचिवालय द्वारा हाल ही जारी एक बुलेटिन के अनुसार, समिति ऑन द वेलफेयर ऑफ शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स ने 2026-27 सत्र के दौरान अहम मुद्दों की विस्तृत जांच करने का फैसला लिया है।

समिति खास तौर पर दो अहम कानूनों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एससी/एसटी एट्रोसिटी एक्ट) और अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (फॉरेस्ट राइट्स एक्ट) पर गहन समीक्षा करेगी।

समिति इस बात की जांच करेगी कि एट्रोसिटी एक्ट को जमीन पर कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। क्या इससे हाशिए पर रहे समुदायों के खिलाफ अत्याचारों में वास्तविक कमी आई है? साथ ही कानून लागू करने में आने वाली चुनौतियां, जांच प्रक्रिया में देरी, दोषसिद्धि दर और नीतिगत सुधार की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

फॉरेस्ट राइट्स एक्ट पर फोकस

फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत वन अधिकारों के वितरण, राज्य सरकारों द्वारा क्रियान्वयन और वास्तविक लाभार्थियों (आदिवासी समुदायों) तक पहुंच की समीक्षा की जाएगी। यह देखा जाएगा कि कानून का फायदा इच्छित समुदायों को मिल रहा है या नहीं।

समिति के एजेंडे में सबसे ज्यादा चर्चा वाले मुद्दों में निजी क्षेत्र में एससी-एसटी के लिए आरक्षण शामिल है। यह लंबे समय से बहस का विषय रहा है। समिति केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू) में आरक्षण नीति के क्रियान्वयन, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एससी-एसटी समुदायों के लिए पहलों और एससी/एसटी प्रमाण-पत्र जारी करने से जुड़ी समस्याओं पर भी विचार करेगी।

समिति विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा चलाई जा रही प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेगी ताकि इनका लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंच सके।

समिति की अध्यक्षता सांसद डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते कर रहे हैं। यह समीक्षा हाशिए पर खड़े समुदायों के उत्थान के लिए बनाई गई नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की रिपोर्ट से सरकार को इन कानूनों और योजनाओं में जरूरी सुधारों के लिए ठोस सिफारिशें मिल सकेंगी। रिपोर्ट आने के बाद संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

Trending :
facebook twitter