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TM Investigation: वैज्ञानिकों से बातचीत का दावा निकला झूठा! जानिए बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान की सच्चाई?

भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। इस बार मामला उनके उस दावे से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उनकी टीम की बातचीत वैज्ञानिकों और NASA से हुई है तथा अब वह अपनी “शक्तियों” का उपयोग केवल लोगों के मन की बात बताने तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष मिशनों में भी मदद करेंगे।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और उनके अनुयायियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि बागेश्वर धाम और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के बीच किसी प्रकार का संपर्क स्थापित हुआ है। इसी दावे की सच्चाई जानने के लिए ‘द मूकनायक’ की इन्वेस्टिगेशन टीम ने पूरे मामले की पड़ताल की और सीधे नासा से संपर्क किया। जांच के दौरान जो जवाब सामने आया, उसने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘द मूकनायक’ को NASA ने बताई यह सच्चाई

‘द मूकनायक’ की टीम ने NASA को ईमेल भेजकर पूछा था कि क्या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, उनकी टीम, बागेश्वर धाम से जुड़े किसी प्रतिनिधि अथवा उनके वैज्ञानिकों के बीच किसी प्रकार की आधिकारिक बातचीत हुई है? इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या NASA ने कभी उनसे किसी वैज्ञानिक सहयोग या संवाद को लेकर संपर्क किया है?

इसके जवाब में NASA की ओर से कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट एलिजाबेथ शॉ ने स्पष्ट रूप से कहा कि NASA को “ऐसे किसी व्यक्ति के साथ किसी आधिकारिक जुड़ाव की जानकारी नहीं है।” NASA ने अपने उत्तर में यह भी कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी प्रकार की बातचीत या वैज्ञानिकों के साथ किसी संपर्क की जानकारी नहीं है।

NASA के इस जवाब से साफ पता चलता है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अथवा बागेश्वर धाम से जुड़े किसी प्रतिनिधि के साथ NASA की कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई। साथ ही यह दावा भी प्रमाणित नहीं हो सका कि NASA के वैज्ञानिकों ने किसी प्रकार से उनसे सहयोग मांगा हो।

क्या कहा था धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने?

कुछ समय पहले अपने एक धार्मिक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दावा किया था कि अब वह अपनी कथित शक्तियों का उपयोग केवल लोगों के मन की बात बताने के लिए नहीं करेंगे, बल्कि वैज्ञानिकों की भी मदद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी टीम की कुछ वैज्ञानिकों से बातचीत हुई है और वह NASA के वैज्ञानिकों तथा अंतरिक्ष में जाने वाले लोगों की सहायता करेंगे।

उनके इस बयान को उनके समर्थकों द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित किया गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई तरह के दावे किए गए। हालांकि, अब NASA के जवाब के बाद इन दावों की सत्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

द मूकनायक के डिप्टी एडिटर अंकित पचौरी ने NASA से पूछे यह सवाल

NASA से क्या पूछा गया?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दावों की सत्यता जानने के लिए “द मूकनायक” प्रतिनिधि की ओर से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA को आधिकारिक ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया। ईमेल में पूछा गया था कि क्या NASA का धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री या बागेश्वर धाम से किसी प्रकार का आधिकारिक या अनौपचारिक संपर्क, संवाद अथवा सहयोग रहा है। साथ ही यह भी सवाल किया गया था कि क्या NASA वैज्ञानिक अनुसंधान या अंतरिक्ष मिशनों में किसी प्रकार की “दैवीय सहायता” संबंधी दावों को मान्यता देता है।

इस ईमेल के जवाब में NASA की ओर से एलिजाबेथ शॉ ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “NASA has no awareness of any official engagement with the individual as mentioned. That is all we have.” यानी NASA को बताए गए व्यक्ति के साथ किसी भी आधिकारिक जुड़ाव या संपर्क की जानकारी नहीं है। NASA की इस प्रतिक्रिया के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा किए गए दावों की सच्चाई सामने आई चुकी है, की उनकी टीम की बातचीत नासा एवं उनके वैज्ञानिकों से नहीं हुई है।

NASA ने ईमेल पर कहा- "उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं"

NASA के जवाब से क्या स्पष्ट हुआ?

NASA की ओर से दिए गए जवाब में साफ कहा गया है कि एजेंसी को इस प्रकार के किसी आधिकारिक संपर्क की जानकारी नहीं है। इसका अर्थ यह है कि NASA, उसके वैज्ञानिकों अथवा प्रबंधन के स्तर पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री या उनकी टीम के साथ किसी संवाद की पुष्टि नहीं हुई है।

द मूकनायक’ की जांच में भी ऐसा कोई दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड या विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि NASA और बागेश्वर धाम के बीच किसी प्रकार की बातचीत हुई थी। ऐसे में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा किया गया दावा तथ्यात्मक रूप से कमजोर और भ्रामक दिखाई देता है।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पक्ष जानने के लिए जब बागेश्वर धाम के आधिकारिक नंबर 70550 05553 पर संपर्क किया गया, तो फोन रिसीव करने वाली महिला ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि “गुरुजी (धीरेंद्र शास्त्री) अभी साधना में हैं।”

जब उनसे कार्यालय या संबंधित पदाधिकारी का संपर्क नंबर मांगा गया, तो उन्होंने जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। वहीं बातचीत के दौरान जब महिला से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “हमें नाम बताने का आदेश नहीं है।”

ISRO के पास भी जानकारी नहीं?

इस मामले में द मूकनायक प्रतिनिधि की ओर से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के ऑफिस ऑफ मीडिया एंड पब्लिक रिलेशंस (OMPR), इसरो मुख्यालय को भी ईमेल भेजकर यह जानने की कोशिश की गई कि क्या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री या उनके प्रतिनिधियों की ओर से इसरो के वैज्ञानिकों से किसी प्रकार की बातचीत, संपर्क या सहयोग का दावा किया गया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इसरो की ओर से कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

वहीं, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पक्ष जानने के लिए उन्हें और बागेश्वर धाम कार्यालय को भी ईमेल भेजा गया। ईमेल में NASA और वैज्ञानिकों से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन खबर प्रकाशित किए जाने तक बागेश्वर धाम या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

करोड़ों अनुयायियों के बीच ऐसे दावों का असर

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के देशभर में बड़ी संख्या में करोड़ो में अनुयायी हैं। उनके कार्यक्रमों में हजारों की भीड़ जुटती है और सोशल मीडिया पर भी उनके करोड़ों फॉलोअर्स बताए जाते हैं। ऐसे में उनके द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व द्वारा वैज्ञानिक संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या तकनीकी सहयोग से जुड़े दावे करते समय तथ्यों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। बिना प्रमाण के इस तरह के बयान जनता के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं और अंधविश्वास को बढ़ावा देने का कारण बन सकते हैं।

पहले भी विवादों में रहे हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इससे पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके चमत्कार, कथित दिव्य शक्तियों और धार्मिक दावों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और तर्कवादी समूहों ने उनके दावों को चुनौती भी दी है।

अब NASA वाले दावे पर सामने आए जवाब ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। ‘द मूकनायक’ की जांच के बाद यह मामला केवल एक धार्मिक बयान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सार्वजनिक दावों की विश्वसनीयता और जवाबदेही का मुद्दा बन गया है।

NASA की ओर से मिले आधिकारिक जवाब और ‘द मूकनायक’ की जांच के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नासा और वैज्ञानिकों से बातचीत को लेकर किया गया दावा प्रमाणित नहीं हो सका। नासा ने स्वयं इस प्रकार की किसी जानकारी से इनकार किया है। ऐसे में यह मामला सार्वजनिक मंचों से किए जाने वाले दावों की सत्यता और जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

जानिए कौन है धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और कथावाचक हैं। उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को गड़ा गांव (छतरपुर) में हुआ माना जाता है। वे हिंदू धार्मिक कथाओं, विशेषकर रामकथा और हनुमान भक्ति के लिए प्रसिद्ध हुए। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया, टीवी और बड़े धार्मिक आयोजनों के जरिए उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनके अनुयायी उन्हें “बाबा बागेश्वर” के नाम से भी जानते हैं। बागेश्वर धाम में आयोजित “दिव्य दरबार” कार्यक्रमों में वे लोगों की समस्याएं और मन की बातें बिना बताए जान लेने का दावा करते रहे हैं, जिसे उनके समर्थक चमत्कार मानते हैं।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का वैज्ञानिकों की मदद का दावा निकला झूठा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की लोकप्रियता जितनी तेजी से बढ़ी, उतने ही विवाद भी उनके साथ जुड़े। सबसे बड़ा विवाद उनके “दिव्य शक्तियों” और चमत्कार संबंधी दावों को लेकर रहा। कई तर्कवादी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके दावों को अंधविश्वास बताया और चुनौती दी। महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने उनके खिलाफ शिकायत भी की थी। इसके अलावा उनके बयानों को लेकर भी समय-समय पर विवाद हुए, जिनमें हिंदू राष्ट्र की मांग, धर्मांतरण, राजनीतिक टिप्पणियां और सामाजिक मुद्दों पर दिए गए बयान शामिल हैं। कई बार उनके कार्यक्रमों में भारी भीड़ और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे।

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