मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर सर्वदलीय सहमति, सुप्रीम कोर्ट में पेश होगा साझा पक्ष

12:30 PM Aug 29, 2025 | Rajan Chaudhary

भोपाल — मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को बताया कि राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने पर सहमति बना ली है। इस मुद्दे पर उनके निवास पर हुई सर्वदलीय बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत सभी दल मिलकर सर्वोच्च न्यायालय में मजबूत पक्ष रखने पर सहमत हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “आज ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने से जुड़ा मामला, जो वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, उस पर सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि सभी दल एकजुट होकर इस मामले में साझा मंच पर खड़े होंगे।”

उन्होंने आगे बताया कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 सितंबर से दैनिक सुनवाई की जाएगी। उससे पहले, 10 सितंबर तक सभी पक्षों के अधिवक्ता मिलकर एक समान रुख तैयार करेंगे।

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कांग्रेस ने बताया अपनी जीत

बैठक में बनी सहमति को कांग्रेस ने अपनी लड़ाई की सफलता करार दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “लगातार संघर्ष और मांग के बाद आखिरकार भाजपा सरकार को मानना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने छह साल पहले ही 27% ओबीसी आरक्षण का मजबूत आधार तैयार कर दिया था। उस समय न केवल अध्यादेश लाया गया, बल्कि कानून बनाकर अपनी प्रतिबद्धता भी साबित की थी।”

हालांकि सिंघार ने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा कांग्रेस की मेहनत का श्रेय खुद लेने की कोशिश कर रही है।

2019 से अदालतों में मामला लंबित

मध्यप्रदेश में ओबीसी समुदाय, जिसकी आबादी लगभग 50% है, को फिलहाल 14% आरक्षण मिलता है। मार्च 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 27% कर दिया था। लेकिन इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती मिली और अतिरिक्त 13% पर रोक लगा दी गई।

इसके बाद विधानसभा ने जुलाई 2019 में ‘मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2019’ पारित किया। हाईकोर्ट ने अस्थायी समाधान के रूप में 87:13 का फार्मूला लागू किया। इसके तहत 87% पदों पर भर्ती होती रही, जबकि 13% पदों पर चयनित उम्मीदवारों की अलग-अलग सूची तैयार कर रोक दी गई।

साल 2024–2025 के दौरान लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया और सभी मामलों को समेकित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अब दैनिक सुनवाई की तारीख तय की है।

13% उम्मीदवारों के भविष्य पर चिंता

बैठक में यह भी तय हुआ कि जिन 13% उम्मीदवारों की सूची रोकी गई है, उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की आयु सीमा जल्द पार होने वाली है, उन्हें आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए समाधान खोजा जाएगा।

इससे पहले, बुधवार 27 अगस्त 2025 को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया, जिसमें उसने अपने पहले के उस हलफनामे को वापस लेने की बात कही, जिसमें 13% सूचियों से जुड़ी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई थी।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने सत्ता में लौटने के बाद जानबूझकर आरक्षण कानून को लागू नहीं किया और ओबीसी समाज को लंबे समय तक उसका हक़ मिलने से वंचित रखा। वहीं, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने कानून तो बना दिया लेकिन उससे जुड़ी कानूनी जटिलताओं का समाधान नहीं किया, जिसके कारण मामला अदालत में अटक गया।

अब निगाहें 22 सितंबर से शुरू होने वाली सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ उम्मीद है कि लंबे समय से अटके इस विवाद पर कोई ठोस रास्ता निकल सकेगा।