उदयपुर में जीबीएच अस्पताल की लापरवाही—CMHO ने कहा, 'अस्पताल सिस्टम सुधार लें, नहीं तो होगी कार्रवाई!'

05:00 PM Mar 12, 2025 | Geetha Sunil Pillai

उदयपुर- जी.बी.एच. मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल बेड़वास उदयपुर के विरुद्ध की गई शिकायत को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उदयपुर, डॉ. अशोक आदित्य यादव ने अस्पताल को पाबंद किया है।

परिवादी नरेश जणवा द्वारा जीबीएच अस्पताल के खिलाफ ये शिकायत दी गई थी।नरेश जणवा ने द मूकनायक को बताया कि 3 फरवरी को सीएमएचओ उदयपुर को जीबीएच अस्पताल के विरुद्ध मरीज शंकरलाल देवड़ा के ईलाज में लापरवाही एवं रेफर करने में देरी की शिकायत की गई थी जिसकी कमेटी द्वारा जांच की गई।

सीएमएचओ कार्यालय से जांच कमेटी में एडिशनल सीएमएचओ डॉ. रागिनी अग्रवाल और मां वाउचर योजना के जिला समन्वयक डॉ. शरद शामिल थे। जांच में पाया गया कि अस्पताल द्वारा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में पोर्टल पर क्वेरी जनरेट करने के बाद जवाब सबमिट करने में देरी की गई।

हॉस्पिटल प्रबंधक को पाबन्द किया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में भर्ती करने एवं डिस्चार्ज करने की कार्यवाही में अस्पताल सुधार कर लें, ताकि भविष्य में किसी मरीज को परेशानी ना हो। साथ ही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के कार्मिकों को अपने व्यवहार एवं कार्यप्रणाली के लिए पाबन्द करने को कहा। भविष्य में अस्पताल के विरुद्ध शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सीएमएचओ ने इस कार्रवाई से संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरएसएचएए, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरएसएचएए सहित कलेक्टर उदयपुर को भी अवगत कराया। पीड़ित ने हॉस्पिटल के खिलाफ मरीज को एन वक्त पर ऑपरेशन के लिए मना करने की शिकायत भी की थी, इस पर सीएमएचओ कार्यालय की तरफ से कुछ भी तथ्य पेश नहीं किए गए और ना ही इस बारे में जांच के बाद कोई जिक्र है। मरीज के शरीर में पित्त की थैली फटने से संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा था।

इधर पीड़ित का कहना है कि उन्होंने सीएमएचओ कार्यालय उदयपुर को 3 फरवरी को ही अवगत करवा दिया था, लेकिन इसकी जांच भी कार्यालय की तरफ से एक महीने बाद काफी अनुरोध के बाद की गई। इसको लेकर भी कार्यालय की तरफ़ देरी के कारण स्पष्ट नहीं किए गए। साथ ही जांच भी खानापूर्ति के तौर पर आधी-अधूरी ही की गई।

देवड़ा के दामाद नरेश जणवा जलोदा जागीर ने इसकी शिकायत प्रतापनगर थाना उदयपुर में भी कर रखी है। इसको लेकर भी पुलिस अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर जांच कर रही है। इस पर भी अभी तक अस्पताल प्रशासन ने ढिलाई बरती और अभी तक जवाब नहीं दिया है। जांच अधिकारी एएसआई पर्वत सिंह सिसोदिया है।

यह है मामला...

प्रार्थी नरेश जणवा जलोदा जागीर ने बताया कि अस्पताल में उनके ससुर शंकर लाल देवड़ा खेरोदा को जीबीएच अस्पताल बेड़वास में 24 जनवरी को भामाशाह योजना के तहत भर्ती करवाया गया था। तीन दिन तक गैस्ट्रो स्पेशलिस्ट डॉक्टर अंकुर जैन ने सभी तरह की जांच पूर्ण करने के बाद गैस्ट्रो सर्जन की आवश्यकता बताई, इसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर डॉक्टर शिवराज से बात करके प्रक्रिया चालू करने को कहा। इस पर मरीज और उनके परिजन से भामाशाह योजना में अप्रूवल के लिए 26 जनवरी को रात 9:30 बजे औपचारिकता पूरी कर साइट पर अपलोड कर दिया।

डॉक्टर शिवराज ने भी अपनी ओर से ऑपरेशन के लिए औपचारिकता पूरी कर दी। 27 जनवरी को अचानक से डॉक्टर शिवराज ने बोला कि मैं ऑपरेशन की रिस्क नहीं ले सकता हूं और काम की वजह से दो चार दिन के लिए बाहर जा रहा हूं। इस वजह से मैं मरीज को रेफर कर रहा हूँ। इतना सुनते ही परिजन परेशान हो गए। परिजनों ने चार दिन रुक जाने पर सहमति जताई लेकिन डॉक्टर ने एक नहीं सुनी। दोपहर 12 बजे रेफर करने को कहने के बाद भामाशाह योजना में रेफर अप्रूवल के लिए 27 जनवरी को दोपहर 3.30 बजे फाइल अपलोड की। जयपुर से 4.18 बजे क्वेरी आई, जिसका जवाब आधे घंटे में देना होता है, उसका जवाब इन्होने काफ़ी रिक्वेस्ट करने के बाद 7 बजे दिया।

फाइल पर केवल डिस्चार्ज लिखा, जबकि रेफर लिखना था। रेफर में फाइल जल्दी अप्रूव हो जाती है, जबकि डिस्चार्ज फाइल अप्रूव होने में देरी होती है। प्रतापनगर थाने से भी 2-4 कॉल करके हॉस्पिटल मैनेजमेंट को शीघ्र अति शीघ्र देवड़ा को रेफर करने को बोला। हॉस्पिटल मैनेजमेंट के अनिल भट्ट को थाने से कॉल किया तो उन्होंने बोला कि मैं एमओडी युवराज सिंह को बोलकर अभी रात 11.30 तक मरीज को रेफर करवाता हूं, लेकिन 28 जनवरी सुबह 8 बजे तक भी रेफर नहीं किया।

जणवा ने कहा कि मरीज की जान के साथ हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने जानबूझकर खिलवाड़ किया। जीबीएच हॉस्पिटल की इस घोर लापरवाही के कारण उनकी जान भी जा सकती थी। हॉस्पिटल मैनेजमेंट, संचालक अनिल भट्ट, मैनेजर युवराज सिंह और गैस्ट्रो सर्जन डॉ शिवराज के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।