झोली फैलाई, खून को बनाया स्याही — जानिए रायपुर धरना स्थल पर क्या-क्या कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के सेवामुक्त B.Ed सहायक शिक्षक

03:13 PM Mar 23, 2025 | Geetha Sunil Pillai

रायपुर- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सेवा से बर्खास्त किए गए बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने अपनी नौकरी बहाली और समायोजन की मांग को लेकर एक मार्मिक और चौंकाने वाला कदम उठाया है। तीन महीनों से शांतिपूर्ण आंदोलन करने के बाद भी जब उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रभावित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्रिमंडल के सदस्यों को अपने खून से लिखे पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई।

इस दौरान महिला शिक्षकों सहित सैकड़ों प्रभावित शिक्षकों ने धरना स्थल पर अपने खून से संदेश लिखे और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरियों के लिए नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और शिक्षा के अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।

नौकरी छूटने के बाद से ही प्रभावित शिक्षक लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 18 दिसंबर 2024 से सैकड़ों प्रभावित शिक्षक रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन करने लगे।

उन्होंने सरगुजा से रायपुर तक 350 किलोमीटर की 'अनुनय यात्रा' निकाली, जिसमें उन्होंने दिन-रात चलकर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की। इसके अलावा, उन्होंने 'जल सत्याग्रह' किया, जिसमें शिक्षकों ने घंटों तक ठंडे पानी में खड़े रहकर अपनी पीड़ा जताई।

आर्थिक तंगी को उजागर करने के लिए उन्होंने सामूहिक भूख हड़ताल भी की और न्याय की प्रार्थना के लिए यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए। इसके बाद आदिवासी महिला शिक्षकों ने 'दंडवत प्रणाम' कर सदन दरबार में सरकार से गुहार लगाई। सरकार का ध्यानाकर्षण करने के लिए करीब 50 शिक्षकों ने मुंडन कराया।

19 जनवरी 2025 से 26 फरवरी तक पंचायत चुनावों के कारण आचार संहिता लग जाने से आंदोलनरत शिक्षकों को प्रदर्शन रोकना पडा. बाद में 27 फरवरी से एक बार फिर बेरोजगार शिक्षक तूता धरना स्थल पर जमा होने लगे और वर्तमान में 500 से ज्यादा शिक्षक समायोजन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

क्या है मामला?

सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त 2023 को आदेश दिया कि B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां केवल 11 अगस्त 2023 से पहले तक ही मान्य होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना के लिए D.Ed अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की शरण ली और B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां खारिज करने की मांग की. इस पर B.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों द्वारा भी याचिका लगाई गई.

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 10 दिसंबर, 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया कि प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के लिए डीएड उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस फैसले के बाद बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। इन शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने भर्ती विज्ञापन में दोनों योग्यताओं को मान्यता दी थी, फिर अब बीएड शिक्षकों को बाहर करना अन्यायपूर्ण है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर डी.एल.एड धारकों की नियुक्ति की जाए। इस आदेश से बी.एड शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई जिन्होंने 14 महीनों तक सेवाएं दी ।

शिक्षकों ने कहा कि सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण उन्हें खून से पत्र लिखने जैसा कदम उठाना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करने के लिए मजबूर होंगे।

खून से हस्तलिखित पत्र में बर्खास्त सहायक शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि शिक्षकों के भविष्य को बचाने के लिए वे त्वरित निर्णय लेकर समायोजन की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ कराएं।

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की एक सरकारी प्राथमिक शाला में रहे सहायक शिक्षक सुमित बोरकर ने बताया तीन महीने से सैलरी बंद हो गयी है और जमा पूँजी भी समाप्त हो चुकी है, ऐसे में आर्थिक सकंट के कारण रोजाना धरना स्थल तक आना जाना भी मुश्किल हो चुका है, भविष्य की चिंता में दिमाग भी काम नहीं कर है, मानसिक तनाव से सभी परेशान हैं. बताया जाता है कि बीएड शिक्षकों को सेवा से निकाल दिए जाने के बाद डीएड टीचर्स की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन होते ही इनकी सेवा में नियुक्ति के आदेश जारी किये जायेंगे. ऐसे में बीएड सहायक शिक्षकों को अपने अपने स्कूलों में लौटने की उम्मीद ख़त्म हो चुकी है. अब समायोजन ही इनकी एकमात्र आस है.

रविवार को शहीद दिवस पर बेरोजगार टीचर्स ने रैली निकाली. शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे त्वरित निर्णय लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित करें और समायोजन की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने कहा, "जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"