भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बेड़ी गांव में एक 13 वर्षीय दलित छात्र द्वारा आत्महत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि गांव के किराना दुकानदार ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और बेरहमी से पीटा, जिससे आहत होकर छात्र ने फांसी लगा ली। घटना के विरोध में भीम आर्मी और परिजनों ने प्रदर्शन किया और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इधर, कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है।
बेड़ी गांव के रहने वाले किशोरा अहिरवार ने बताया कि उनका बेटा अंशु अहिरवार (13 वर्ष) कक्षा 8वीं में पढ़ता था। शनिवार दोपहर जब वह गांव के ही किराना दुकानदार राम शुक्ला की दुकान पर सामान लेने गया, तो उसने गलती से दुकान में रखा कोई सामान छू लिया। इस पर दुकानदार ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और दुकान का गेट बंद करके लात-घूंसों व जूतों से पीटा।
घर लौटने के बाद अंशु ने अपने छोटे भाइयों अमित और रामरतन को पूरी घटना बताई और फिर गहरे सदमे में चला गया। कुछ देर बाद वह अपने कमरे में गया और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन जब उसे अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद रविवार सुबह अंशु के परिजन और भीम आर्मी के सदस्य शव को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की। प्रशासन द्वारा मांग पूरी न किए जाने पर वे छत्रसाल चौराहे पर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सीएसपी अमन मिश्रा मौके पर पहुंचे और परिजनों को न्याय का आश्वासन दिया। प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई का भरोसा देने के बाद प्रदर्शन शांत हुआ।
सीएसपी अमन मिश्रा ने बताया कि आरोपी दुकानदार राम शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व सदस्य एवं एससी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने द मूकनायक से बातचीत में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलितों पर अत्याचार लगातार जारी हैं, लेकिन सरकार दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने में विफल रही है। छतरपुर की हालिया घटना इसका उदाहरण है, जहां एक नाबालिग दलित छात्र को जातिगत अपमान और मारपीट के बाद आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने आगे कहा कि दलित समुदाय और कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठने वाले। अगर प्रशासन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो हम सड़कों पर उतरकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं, लेकिन मोहन यादव की सरकार दोषियों को बचाने में लगी है।
प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि सरकार दलितों के अधिकारों की रक्षा करने में असफल रही है और जातीय हिंसा के मामलों में अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने मांग की कि इस घटना में शामिल आरोपी को SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त सजा दी जाए और सरकार दलित समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
क्या है कानून?
ऐसे मामलों में जहां जातिगत आधार पर अत्याचार हुआ हो, आरोपी पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है। SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r): जातिसूचक शब्दों से अपमान करने पर सजा।