दिल्ली: 'हम पंडित हैं, तू चूहड़ा है... मेरा कुछ नहीं होगा', सरेआम दलित युवक से बदसलूकी; वीडियो होने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली

04:31 PM May 16, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मेहरौली इलाके से जातिगत उत्पीड़न और पुलिस की घोर लापरवाही का एक मामला सामने आया है। यहां एक दलित युवक विपिन कुमार दुग्गल को सरेआम एक अज्ञात व्यक्ति ने भद्दी जातिसूचक गालियां दीं और मारपीट की कोशिश की। पीड़ित के पास घटना का वीडियो और आरोपी की गाड़ी का नंबर होने के बावजूद पुलिस पिछले कई दिनों से एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।

यह पूरी घटना 10 मई 2026 की शाम लगभग 5:35 बजे की है। विपिन कुमार दुग्गल बाजार से अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। पूर्व मेयर सतबीर सिंह के आवास के पास एक काले रंग की हीरो स्प्लेंडर (DL3SFP1057) पर सवार व्यक्ति, जो उनके सामानांतर गाड़ी से चल रहा था, उसे कट मारने (खतरनाक तरीके से बाइक चलाने) से विपिन ने मना किया तो वह अपशब्द कहना शुरू कर दिया।

मामूली कहासुनी में आरोपी अचानक आक्रामक हो गया और उसने विपिन को धक्का देते हुए अपमानित करना शुरू कर दिया। पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने सरेआम चिल्लाते हुए कहा, "मैं तुझे जानता हूं... हम पंडित हैं, तू चूहड़ा है... तू चूहड़ा है... हां तुझे कह रहा हूं"। जब विपिन ने अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, तो आरोपी ने खुद को सेना का जवान बताते हुए धमकियां दीं कि पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

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पीड़ित ने तुरंत 112 नंबर पर पीसीआर को कॉल की और मेहरौली थाने पहुंचकर अपनी लिखित शिकायत (डीडी नंबर 145A) दी। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी अपने कुछ साथियों के साथ दबाव बनाने के लिए थाने पहुंचा और वहां भी बदसलूकी की। हालांकि, जैसे ही पीड़ित ने लिखित शिकायत दर्ज करानी शुरू की, आरोपी मौका देखकर वहां से फरार हो गया।

इस मामले की जांच एसआई नवीन कुमार को सौंपी गई है, लेकिन पुलिस का रवैया बेहद टालमटोल वाला रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोपी का मोबाइल नंबर (76XXXXXX94) और ट्रू कॉलर के विवरण पुलिस को सौंपे हैं। इसके बावजूद जांच अधिकारी लगातार फोन उठाने से बचते रहे और कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल आश्वासन देते रहे।

पुलिस की इस उदासीनता से परेशान होकर पीड़ित ने 12 मई को डीसीपी (दक्षिण), एसीपी (मेहरौली) और एसएचओ को ईमेल भेजकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने दोबारा थाने जाकर एसएचओ से मुलाकात की, तो उन्होंने घटना के चार दिन बाद भी इस मामले की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

द मूकनायक ने इस पूरे मामले की पड़ताल करते हुए पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास किया। इस मामले की जांच कर रहे एसआई के मोबाइल नंबर पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए 2 बार कॉल किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। स्पष्ट साक्ष्य मौजूद होने और एससी/एसटी एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध होने के बावजूद दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करना एक बेहद चिंताजनक विषय बन जाता है।