भोपाल। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का चित्र जलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत चार आरोपी फिलहाल जेल में हैं। बुधवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में अनिल मिश्रा को छोड़कर अन्य तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था, बल्कि सामाजिक सौहार्द और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना ग्वालियर में 31 दिसंबर 2025 की है। उस दिन एसपी कार्यालय के सामने डॉ. आंबेडकर के पोस्टर को जलाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आते ही दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। दलित नेता महेंद्र बौद्ध समेत अन्य लोगों ने एसएसपी ग्वालियर से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पोस्टर जलाने से संविधान निर्माता का अपमान हुआ और दलित समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची।
शिकायत के आधार पर ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अगले ही दिन, 1 जनवरी 2026 की शाम को अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों को मुरैना जाते समय पुरानी छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। एसएसपी कार्यालय और कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर गहमागहमी और विरोध-प्रदर्शन की स्थिति बनी रही।
पुलिस के अनुसार, यह मामला सामाजिक शांति भंग करने और सार्वजनिक भावनाओं को आहत करने से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई। पुलिस ने दावा किया कि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
हाईकोर्ट में क्या-क्या हुआ?
इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच में बीते सोमवार को मैराथन सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए राहत की मांग की। उनका तर्क था कि बिना पर्याप्त आधार और जल्दबाजी में गिरफ्तारी की गई।
सरकार पक्ष ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराया।
पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने संविधान निर्माता के अपमान को गंभीर अपराध बताते हुए सख्त रुख अपनाया और कठोर कार्रवाई की मांग की। सुनवाई के बाद पवन पाठक ने कहा कि अदालत ने सभी पहलुओं को ध्यान से सुना है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। वहीं, रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को गंभीरता से लिया है और एक-दो दिन में निर्णय आने की संभावना है।
6 दिन से जेल में बंद आरोपी
फिलहाल, अनिल मिश्रा समेत चारों आरोपी छ्ह दिनों से जेल में हैं। जिला न्यायालय में आज होने वाली सुनवाई से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अदालत परिसर और आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मामले के सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई संगठनों ने इसे दलित अस्मिता और संविधान के सम्मान से जोड़ते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
द मूकनायक से बातचीत करते हुए अधिवक्ता धर्मेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जिस तरह से आरोपियों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर जलाई, वह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के अधिकारों पर सीधा हमला है। डॉ. आंबेडकर करोड़ों लोगों की आस्था और संघर्ष का प्रतीक हैं, ऐसे में उनकी तस्वीर जलाना समाज में नफरत और विभाजन फैलाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि इस घटना से डॉ. आंबेडकर के करोड़ों अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई हैं और यह सामाजिक न्याय की मूल भावना को नकारने जैसा है। वंचित और पिछड़े समुदायों के अधिकारों पर इस तरह का हमला किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। हमारी मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो और उन्हें कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि संविधान और उसके मूल्यों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।