ग्वालियर- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच द्वारा अनिल कुमार मिश्रा को जमानत देने के फैसले पर अब नया मोड़ आ गया है। आजाद समाज पार्टी ने घोषणा की है कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर चुनौती देगी। आज़ाद समाज पार्टी (ASP) से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय ने कहा, "हम माननीय न्यायालय के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं, ग्वालियर हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।" उन्होंने बताया कि इस मामले पर भीम आर्मी चीफ एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद (सांसद) से बात हुई है और पूरी जानकारी साझा की गई है।
याद रहे, 7 जनवरी को हाईकोर्ट ने याचिका संख्या WP-2/2026 में अनिल मिश्रा को 1 लाख रुपये के बॉन्ड पर जमानत दी थी, लेकिन साफ चेतावनी दी थी कि भविष्य में बाबा साहब के अपमान जैसा कोई कृत्य करने पर तत्काल कठोर कार्रवाई होगी। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोति की बेंच ने पुलिस की बिना विधिवत सूचना के गिरफ्तारी को आधार बनाकर राहत दी, लेकिन मामले की जांच व ट्रायल यथावत जारी रहेगा। कोर्ट ने कहा था कि यह कोई क्लीन चिट नहीं है और सभी टिप्पणियां केवल इस याचिका तक सीमित हैं।
हम सुप्रीम कोर्ट जायेंगे...मिडिया से चर्चा pic.twitter.com/wX1JFRhQe6
— Sunil Astay (@SunilAstay) January 7, 2026
सुनील अस्तेय की पोस्ट में स्पष्ट किया गया कि न्यायपालिका पर आस्था अटूट है और लड़ाई हमेशा संविधान व कानून के दायरे में ही लड़ी जाएगी। " किंतु यह कहना भी उतना ही आवश्यक है कि इस मामले में जो परिस्थितियाँ सामने आई हैं, वे राज्य सरकार और प्रशासन की गंभीर विफलता को उजागर करती हैं। गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई लापरवाही, पुलिस का अपना पक्ष मजबूती से न रख पाना और पूरे घटनाक्रम पर सरकार की निष्क्रियता यह दर्शाती है कि बहुजन समाज के मान–सम्मान और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अपमान जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता दोनों ही सवालों के घेरे में हैं। यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की परीक्षा है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि अनिल मिश्रा पर लगे आरोप समाप्त नहीं हुए हैं, न ही एफआईआर रद्द हुई है और न ही मामला बंद हुआ है। फिर भी, सरकार की कमजोर पैरवी और प्रशासनिक लापरवाही ने जिस स्थिति को जन्म दिया है, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए, न्यायालय के प्रति पूर्ण सम्मान रखते हुए, हम यह घोषणा करते हैं कि हम इस आदेश को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान, बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बहुजन समाज के मान–सम्मान की रक्षा है। सरकार की असफलता के विरुद्ध यह हमारी संवैधानिक और लोकतांत्रिक लड़ाई है, जो न्याय मिलने तक जारी रहेगी।"
क्या है पूरा विवाद
हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा बुधवार रात 8 बजे जेल से बेल पर रिहा हुए. मिश्रा और उनके सहयोगियों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबा साहब) के फोटो जलाने, अभद्र और नफरत भरी भाषा का इस्तेमाल करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के गंभीर आरोप हैं। यह मामला SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है, जो संविधान के अपमान और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने से संबंधित है।
अनिल मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी को चुनौती दी, जिसमें पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। कोर्ट ने जमानत तो दे दी, लेकिन FIR रद्द नहीं हुई और भविष्य में अपमान के प्रयास पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। अब आज़ाद समाज पार्टी ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है, जो राज्य सरकार की कमजोर पैरवी और प्रशासनिक विफलता पर सवाल खड़े करता है। यह घटना सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और बहुजन समाज के मान-सम्मान की रक्षा के लिए एक बड़ी लड़ाई का प्रतीक बनी हुई है।