'फुले' का धमाकेदार ट्रेलर छू रहा दिल—क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म

11:45 AM Mar 26, 2025 | Geetha Sunil Pillai

मुंबई– 24 मार्च को फुले का ट्रेलर रिलीज हुआ और इसने आते ही सबका दिल जीत लिया।अनंत नारायण महादेवन की डायरेक्शन वाली ये जीवनी फिल्म महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की बेबाक जिंदगी को सामने लाती है, जिसमें प्रतीक गांधी और पत्रलेखा मुख्य किरदार निभा रहे हैं।

ज्योतिराव गोविंदराव फुले 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सातारा में जन्मे थे और इस साल उनकी 198वीं जयंती है। वे एक समाज सुधारक, जातिवाद विरोधी कार्यकर्ता, विचारक और लेखक थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी को दलितों और अपने जाति के अंतर्गत दबे लोगों की शिक्षा और उनके समरसता के लिए समर्पित किया था। उन्होंने मराठी शब्द ‘दलित’ का उपयोग अपनी लेखनी में शुरू किया था, जिससे उस समय समाज द्वारा अत्याचारित अस्पृश्यों और निर्वंशी लोगों को संदर्भित किया गया था। ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला था, जो भारत में महिला शिक्षा के प्रति एक क्रांतिकारी कदम था। उन्होंने उस समय के जल संकट को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान भी शुरू किया था।

ज्योतिराव फुले की जयंती के मौके पर 11 अप्रैल 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी- ये फिल्म और ट्रेलर देखकर साफ है कि ये इतिहास को दिल से जोड़ने वाली कहानी है। डांसिंग शिवा फिल्म्स, किंग्समेन प्रोडक्शंस और जी स्टूडियोज ने इसका निर्माण किया है।

दो मिनट से थोड़ा ज्यादा का ये ट्रेलर कमाल का है। ये आपको पुराने भारत में ले जाता है, जहां ज्योतिराव और सावित्रीबाई समाज के सख्त नियमों से भिड़ते हैं। जाति और औरतों पर बंधन की दीवारों को तोड़ते हुए, पुणे में लड़कियों का पहला स्कूल खोलने की उनकी जंग दिखती है। सीन जोरदार हैं—ज्योतिराव गुस्साए चेहरों के सामने डटा हुआ है, तो सावित्रीबाई चुपचाप लेकिन जोश से भरी उन लड़कियों को पढ़ाती है जिन्हें कोई याद नहीं रखता। ट्रेलर में एक लाइन है—“हमारा देश भावनाओं से चलता है”—जो दिमाग में बस जाती है। ये ट्रेलर एक सच्ची कहानी का ऐसा टुकड़ा है जो लोगों को बोलने पर मजबूर कर रहा है। ट्रेलर में ज्योतिराव कहते हैं- अंग्रेजों की गुलामी तो सिर्फ 100 साल पुरानी है लेकिन उस गुलामी से लोगों को स्वतंत्र करना चाहता हूँ जो 3000 साल पुरानी है।

X पर ट्रेलर को 24 घंटे हुए और लोग इसके दीवाने हो गए हैं। एक यूजर ने लिखा- “#PhuleTrailer देखा और बोलती बंद! ताकत, भावनाएं और कहानी की गहराई कमाल की है। ये लेजेंडरी होने वाला है!” उसने ट्रेलर का यूट्यूब लिंक शेयर किया। एक अन्य यूजर ने कहा, “#PhuleTrailer आ गया और ये जोर से चोट करता है! एक कहानी जो सुनानी जरूरी थी—और ये शानदार लग रही है।” लिंक के व्यूज तेजी से बढ़ रहे हैं।

बाकी लोग भी पीछे नहीं हैं। एक यूजर ने लिखा, “अगर #PhuleTrailer से कुछ समझ आए, तो ये फिल्म सब कुछ बदल देगी। एक्टिंग गजब की है, और कहानी दिल को झकझोर देती है—अच्छे तरीके से!” “#PhuleTrailer ने ठंडक दे दी! असर, माहौल, मैसेज—सब कुछ परफेक्ट है। ये कुछ खास होने वाला है! x पर एक यूजर का सन्देश: “#PhuleTrailer देखा और फंस गया! कहानी जबरदस्त लगती है, किरदार भूलने लायक नहीं। ये एक शानदार सफर होगा।” X पर हंगामा मचा है—लोग इसे जरूर देखने वाली फिल्म बता रहे हैं, और उत्साह बढ़ता जा रहा है।

फुले ज्योतिराव और सावित्रीबाई की उस जंग को दिखाती है जो इंसानी और सच्ची थी—दो लोग जिन्होंने पूरे सिस्टम को ललकारा।

क्यों देखें फुले?

तो लोग क्यों कह रहे हैं कि इसे मिस मत करना? पहली बात, ये कोई बोरिंग इतिहास की क्लास नहीं है। फुले ज्योतिराव और सावित्रीबाई की उस जंग को दिखाती है जो इंसानी और सच्ची थी—दो लोग जिन्होंने पूरे सिस्टम को ललकारा।” उन्होंने सिर्फ बातें नहीं कीं, बदलाव लाए—लड़कियों को पढ़ाया, जाति के नियम तोड़े। ट्रेलर से लगता है कि फिल्म उनकी मेहनत, हिम्मत और उस प्यार को दिखाएगी जो दुनिया को बेहतर बनाता है।

एक्टिंग की बात करें तो प्रतीक गांधी, जिन्होंने स्कैम 1992 में कमाल किया, ज्योतिराव बनकर ऐसे फिट हुए जैसे उनके लिए ही बना हो। पत्रलेखा की सावित्रीबाई दिल जीत रही है—वो ताकतवर भी है और प्यारी भी। डायरेक्टर महादेवन ने लाइव इंडिया को कहा, “इन दोनों ने सबके खिलाफ जाकर खेल बदला। ये प्रेरणा देता है, और सच्चा है।”

वक्त भी एकदम सही है। 11 अप्रैल को रिलीज के साथ ये ज्योतिराव को समर्पित है, लेकिन आज के लिए भी एक आईना है—जाति और नाइंसाफी पुरानी बातें नहीं, आज भी हैं। फुले उपदेश नहीं देगी; ये आपको उस लड़ाई का वजन महसूस कराएगी।

फुले का ट्रेलर लोगों को लुभा रहा है क्योंकि ये दमदार है, दिल को छूता है। 11 अप्रैल को कैलेंडर चिह्नित करें, फुले सिर्फ फिल्म नहीं—एक क्रांति का टिकट है।