नई दिल्ली- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की अस्पताल में भर्ती के दौरान बिताई रात का भावुक अनुभव साझा करते हुए केरल की नर्सों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरी रात वे अपनी मां की चिंता में बेचैन थे, लेकिन हर घंटे चेकअप करने वाली केरल की एक नर्स ने उन्हें सांत्वना दी।
राहुल गांधी ने लिखा, “कल रात मैं अपनी मां के अस्पताल के कमरे में छोटे सोफे पर सो रहा था। जैसे कोई भी बेटा अपनी मां की सेहत को लेकर चिंतित होता है, वैसे ही मैं भी था। पूरी रात मुझे सिर्फ एक चीज ने सांत्वना दी, केरलम की एक नर्स, जो हर घंटे आकर मेरी मां को चेक करती थीं। वे मुस्कुरातीं और उनका हाथ थाम लेतीं।”
सुबह उन्होंने नर्स से पूछा कि क्या वे रात में सोती हैं या पूरी रात काम करती हैं। नर्स ने जवाब दिया, “मैं पूरी रात काम करती हूं।” राहुल गांधी ने आगे कहा, “जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब केरलम की महिलाएं न सिर्फ केरलम में बल्कि दिल्ली, पूरे देश और दुनिया भर में लोगों को सांत्वना दे रही होती हैं, उनका हाथ थाम रही होती हैं और उन्हें सुकून दे रही होती हैं। मेरे लिए यही केरलम की भावना है।”
Last night, I was sleeping on a small sofa in my mother’s room at the hospital, and like any son, I was extremely worried about her health.
— Congress (@INCIndia) March 25, 2026
The whole night, I was comforted by only one thing. I was comforted by a nurse from Keralam who came in every hour to check on my mother.… pic.twitter.com/H3Y8Ltu3ai
केरल की नर्सें भारत और विदेशों में स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2022 की रिपोर्ट “Review of international migration of nurses from the state of Kerala, India” के अनुसार, केरल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नर्सों का प्रवास भारत के कुल नर्स प्रवास का बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट में COVID-19 महामारी के दौरान नर्सों की “अटूट समर्पण और दृढ़ता” की चर्चा की गई है, जहां वे कठिन परिस्थितियों में भी इमरजेंसी केयर और समुदाय को सहायता प्रदान कर रही थीं।
केरल की नर्सों की समर्पण भावना को शोध अध्ययनों में भी उल्लेखित किया गया है। 2022 में मणिपाल जर्नल ऑफ नर्सिंग एंड हेल्थ साइंसेज में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के अनुसार, केरल के चयनित नर्सिंग कॉलेजों में 580 बीएससी नर्सिंग छात्राओं पर किए गए वर्णनात्मक-सहसंबंधी अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश छात्राओं (41.2%) में प्रोफेशनल वैल्यूज का स्तर ‘बहुत अच्छा’ था।
अध्ययन में छात्राओं ने नर्सिंग पेशे को समाज के लिए ‘अत्यावश्यक’, ‘जिम्मेदार’ और ‘नैतिक’ माना, जबकि इसे ‘स्वायत्त’ की बजाय ‘निर्भर’ और ‘बौद्धिक कार्य’ की बजाय ‘यांत्रिक कार्य’ के रूप में भी देखा। चौथे वर्ष की छात्राओं में प्रोफेशनल वैल्यूज सबसे अधिक थे, जबकि पहले वर्ष की छात्राओं में पेशे की स्थिति के प्रति धारणा सबसे बेहतर थी। सामाजिक-आर्थिक स्थिति का छात्राओं की धारणा से संबंध था, लेकिन प्रोफेशनल वैल्यूज से नहीं। इस स्टडी से स्पष्ट होता है कि केरल की बीएससी नर्सिंग छात्राओं में पेशेवर मूल्य उच्च स्तर के हैं, जो उनकी सेवा भावना और समर्पण को मजबूत बनाते हैं।
केरल में नर्सिंग शिक्षा का मजबूत ढांचा इन नर्सों की कुशलता और समर्पण का आधार है। राज्य में बड़ी संख्या में नर्सिंग कॉलेज और स्कूल हैं, जहां हर साल हजारों नर्सें प्रशिक्षित होती हैं। केरल की उच्च साक्षरता दर, विशेष रूप से महिला साक्षरता, और पेशेवर ट्रेनिंग इन नर्सों को सहानुभूति, संवाद कौशल और अनुशासन के लिए जाना जाता है।
जोधपुर के उम्मीद अस्पताल में सेवानिवृत्त 80 वर्षीय सरोजा नायर 70 के दशक की शुरुआत में राजस्थान आई थी, वे बताती हैं, “उन दिनों उत्तरी भारत, खासकर राजस्थान में प्रशिक्षित नर्सों की बेहद कमी थी। पूरे प्रदेश में साक्षरता का प्रतिशत बहुत कम था और महिलाओं की स्थिति तो और भी दयनीय थी।”
उस समय जब केरल से पढ़ी-लिखी और प्रशिक्षित युवतियाँ रोजगार की तलाश में उत्तरी राज्यों में आईं, तो उन्हें अस्पतालों में आसानी से नौकरियाँ मिल गईं। सरोजा बताती हैं, “उस जमाने में नर्सों का बहुत सम्मान हुआ करता था। लोग नर्सों को डॉक्टर से कम नहीं समझते थे। नर्सें भी बेहद सेवा भावना से भरी होती थीं। वे वक्त देखे बिना ड्यूटी करती थीं। चाहे दिन हो या रात, चाहे कोई भी परिस्थिति हो, उनकी सेवा का जज्बा अद्भुत था।”
वे आगे कहती हैं, “वो सेवा का जज्बा और वो दिन बेमिसाल थे। केरल की नर्सों ने न सिर्फ उत्तर भारत के अस्पतालों को मजबूत किया, बल्कि मरीजों के प्रति अपनी निस्वार्थ सेवा से एक नई मिसाल भी पेश की।”
राहुल गांधी के इस भावुक संदेश ने केरल की नर्सों की सेवा भावना को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया है। दिल्ली समेत देश के विभिन्न अस्पतालों में काम करने वाली ये नर्सें रात-दिन मरीजों की सेवा में लगी रहती हैं।
अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी केरल के नर्सिंग ग्रेजुएट्स की डिमांड
केरल में माइग्रेशन (बाहर जाकर बसने) की एक पुरानी परंपरा रही है, और कई हेल्थकेयर प्रोफेशनल नौकरियों के लिए विदेश जा रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में केरल के नर्सिंग ग्रेजुएट्स की बहुत ज़्यादा मांग है, जहाँ काबिल नर्सों की भारी कमी है। केरल की नर्सिंग शिक्षा को मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान, वहाँ दी जाने वाली ट्रेनिंग की गुणवत्ता और ग्रेजुएट्स की काबिलियत को दर्शाती है।
अब तक, केरल सरकार हेल्थकेयर शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर, दोनों को आगे बढ़ाने के मामले में काफ़ी सक्रिय रही है। आयुष्मान भारत जैसे कार्यक्रम या अतिरिक्त नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना से BSc नर्सिंग कोर्सों की संख्या में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। माना जाता है कि इन पहलों का नतीजा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों और हेल्थकेयर की बेहतर गुणवत्ता के रूप में सामने आएगा, जिसका सीधा असर नर्सिंग पेशे पर पड़ेगा। इसी वजह से, समाज में कुछ बेहतर करने की चाह रखने वाले जोशीले युवा उम्मीदवारों के बीच नर्सिंग सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले पेशों में से एक बन गया है।