नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के बीच हाल में हुई मुलाकात ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद बहुजन समाज से लेकर संविधानवादी तक भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर पूर्व CJI के स्वयं एक बुद्धिस्ट और अम्बेडकरवादी होते हुए भी एक कट्टर हिंदूवादी आध्यात्मिक गुरु से मुलाकात की निंदा कर रहे हैं। कई लोग गवई के ‘जूता कांड’ को भी याद कर रहे हैं जब एक वकील ने कोर्ट में ही पूर्व CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।
हाल ही में पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के बीच मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। बागेश्वर बाबा के नाम से मशहूर धीरेंद्र शास्त्री खुले तौर पर ‘हिंदू राष्ट्र’ की स्थापना और मनुस्मृति की हिमायत करते रहे हैं। ऐसे में जब देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति उनसे मिलने पहुंचे, तो बहुजन समाज में आक्रोश फैल गया। पब्लिक इंटरेस्ट लॉयर प्रशांत भूषण ने अपने x अकाउंट से पोस्ट किया, " अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा! पूर्व CJI गवई एक नफ़रत फैलाने वाले धोखेबाज़ के साथ! वह न्यायपालिका को किस तरह का संदेश दे रहे हैं! चौंकाने वाला!"
यूजर्स ने इस मुलाकात को बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों का अपमान बताया। कई यूजर्स ने बाबासाहेब का वह ऐतिहासिक बयान भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने हिंदू राष्ट्र को लेकर चेतावनी दी थी। पत्रकार नदीम अहमद शेख ने कहा, " पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई का बागेश्वर धाम जाना और धीरेंद्र शास्त्री से मिलना चिंता का विषय है, भारत एक बहुलवादी और संवैधानिक देश है यहां के पूर्व CJI जैसी गरिमापूर्ण पदवी वाले व्यक्ति को ऐसे वक्ता से मिलना उचित नहीं लगता जो बार बार हिंदू राष्ट्र की बात करता हैं और दूसरे धर्मों के प्रति तीखी टिप्पणियां करता हो, न्यायपालिका को सबके प्रति निष्पक्ष और समान दिखना चाहिए जब एक पूर्व CJI खुलकर ऐसे मंच पर जाते हैं तो सवाल उठता है क्या संवैधानिक मूल्य और धर्मनिरपेक्षता सिर्फ किताबों तक सीमित रह गए हैं,आस्था व्यक्तिगत है,लेकिन संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति की जिम्मेदारी भी व्यक्तिगत नहीं होती,भारत को सबका साथ, सबका विकास वाले रास्ते पर चलना है, न कि विभाजन की भाषा वाले मंचों पर।"
पत्रकार शकील अख्तर कहते हैं, " जब तक दलित यह नहीं समझेगा कि अंदर से कौन उसकी जंजीरें और कड़ी कर रहा है तब तक राहुल गांधी जैसे बाहर के लोग उसकी ज्यादा मदद नहीं कर पाएंगे। बागेश्वर धाम उर्फ धीरेन्द्र शास्त्री पर दलित विरोधी बयान देने के कई आरोप लगते रहे हैं। खुद उनके भाई पर दलित परिवार को कट्टा लेकर धमकाने के आरोप हैं। ऐसे में जस्टिस गवई का वहां जाना सामान्य दलितों को भी वहां जाने के लिए प्रेरित करने वाला ही होगा। इसीलिए शायद बागेश्वर धाम ने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है फोटो के साथ।"
Can’t believe my eyes! Former CJI Gavai with a hate spewing fraudman! What kind of message is he sending to the judiciary! Shocking! pic.twitter.com/13SKL3Ih4c
— Prashant Bhushan (@pbhushan1) April 22, 2026
एक यूजर ने लिखा, " भीम जयंती अभी-अभी गुज़री है। वही भीम, जिन्होंने हमारे लिए न्याय सुनिश्चित किया और उसी न्याय की बदौलत, जो लोग आज ऊँचे पदों पर आसीन हैं, ऐसा व्यक्ति अंधविश्वास के किसी स्थान पर जाता है।"
पत्रकार आवेश तिवारी लिखते हैं, " यह पूर्व सीजेआई बी आर गवई हैं, एक नंबर के फ्राड, मिथ्याचारी, बड़बोले धीरेन्द्र शास्त्री से सम्मानित हो रहे हैं। मुझे याद है जब एक वकील ने इन पर जूता फेंक कर मारा था मैंने नफरतियों की धज्जियां उड़ा दी थी। जब गवई की ताजपोशी हुई थी तो इसे आंबेडकरवाद की जीत बताया गया था और दलितों की बड़ी उपलब्धि। यह तस्वीर देखता हूं तो शर्म आती है। यह कहने में मुझे कोई ऐतराज नहीं है कि अंबेडकरवादियों ने आज तक अपने लिए किसी ईमानदार नेतृत्व, ईमानदार हीरो को नहीं ढूंढा है। जितने भी मिले किसी की भी रीढ़ सीधी नहीं हैं। यह बेहद अश्लील तस्वीर है।"
अम्बेडकरवादी एक्टिविस्ट रोहित राज लिखते हैं, " इन्ही जज साहब पर दलित होने के कारण जूता फेंक कर मारा गया था l ये देख कर मुझे दुख है हाँ मुझे दुख है की इतना पढ़ा लिखा आदमी जो एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके है वो एक ढोंगी के पास जाते हैl क्या मजबूरी है एक तरफ आप जय भीम कहते हो और वही दूसरी तरफ आप अंधविश्वास मे पड़ जाते हो कमाल हो गया".
एक यूजर ने लिखा, “बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा था – ‘मुझे पढ़े-लिखे लोगों ने धोखा दिया है।’ पूर्व CJI गवई उसी कैटेगरी के व्यक्ति हैं। इन्होंने कोई ऐसा फैसला आज तक नहीं दिया जो सामाजिक न्याय करता हो।”
शास्त्री से मुलाकात से क्यों याद आया 'जूता कांड'
यह मुलाकात तब और अहम हो जाती है जब हम पीछे जाकर देखते हैं कि पूर्व CJI गवई और वकील राकेश किशोर के बीच ‘जूता कांड’ क्यों हुआ था। यह पूरा विवाद खजुराहो की भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ा था। मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची एक प्राचीन मूर्ति का सिर क्षतिग्रस्त हो गया था । इस मूर्ति को पुनर्स्थापित (restore) करने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। 16 सितंबर 2025 को तत्कालीन CJI बी.आर. गवई की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी, सुनवाई के दौरान CJI गवई ने याचिकाकर्ता से कहा था: "आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त हैं। तो अब जाइए और भगवान से ही प्रार्थना कीजिए।" यह टिप्पणी वकील राकेश किशोर को बेहद नागवार गुजरी। 6 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब 11:35 बजे, सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच सुनवाई कर रही थी । इसी दौरान वकील राकेश किशोर ने अपने स्पोर्ट्स शूज़ उतारकर CJI की तरफ फेंकने की कोशिश की। हालाँकि गवई को जूता नहीं लगा और गार्ड्स ने राकेश किशोर को पकड़ लिया लेकिन गवई ने कोई शिकायत नहीं की और राकेश किशोर को माफ़ कर दिया लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने इस मामले में सख्ती बरती और 7 अक्टूबर को राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
पूर्व CJI गवई और धीरेंद्र शास्त्री की मुलाकात ने एक नई बहस छेड़ दी है। क्या संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों को उन विचारधाराओं से सार्वजनिक रूप से जुड़ना चाहिए जो संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ हैं? अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है और क्या पूर्व CJI कोई सफाई देते हैं या नहीं।