मणिपुर में साल 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद पहली बार दो कुकी-ज़ो विधायकों ने बुधवार को राजधानी इम्फाल का दौरा किया। ये दोनों विधायक अपने समुदाय के कड़े निर्देशों को दरकिनार करते हुए व्यक्तिगत रूप से मणिपुर विधानसभा के सत्र में शामिल हुए। इस कदम को घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बनी गहरी खाई को पाटने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
कांगपोकपी जिले के तहत आने वाली सैकुल सीट से कुकी पीपल्स अलायंस (KPA) की विधायक किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग और सैटू से निर्दलीय विधायक हाओखोलट किपगेन ने सत्र के पहले दिन विधानसभा में मौजूद रहने का फैसला किया। उन्होंने यह कदम तब उठाया है, जब शीर्ष कुकी संस्था 'कुकी इनपी मणिपुर' ने मैतेई बहुल इम्फाल से पूरी तरह दूर रहने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
वहीं, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और हेंगलेप से उनके भाजपा सहयोगी विधायक लेतज़ामांग हाओकिप ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस सत्र में हिस्सा लिया। इनके अलावा भाजपा के चार अन्य कुकी-ज़ो विधायकों ने सदन से दूरी बनाए रखी और इसमें शामिल नहीं हुए।
ज्ञात हो कि मणिपुर में कुल नौ कुकी-ज़ो विधायक हैं, जिनमें से दो केपीए से हैं। पिछले साल फरवरी में हुए बजट सत्र के दौरान इनमें से छह विधायकों ने वर्चुअली अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह के कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों कुकी विधायकों की सराहना की। कार्यालय ने इसे विधानसभा में उनकी "ऐतिहासिक भौतिक वापसी" करार दिया है। बयान में स्पष्ट किया गया कि इन विधायकों की उपस्थिति पूरे साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, क्योंकि इस दौरान समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि ने सदन की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया था।
सिंह ने विधायक द्वय के इस "सकारात्मक कदम" का श्रेय समुदायों के बीच विश्वास की कमी को दूर करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के अथक प्रयासों को दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही मणिपुर शांति के मार्ग पर चलने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि कुकी इनपी मणिपुर ने अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के इम्फाल घाटी में जाने पर तब तक के लिए रोक लगा रखी है, जब तक कि केंद्र और राज्य सरकारें पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासन की उनकी मांग को स्वीकार नहीं कर लेतीं।
राज्य में फिलहाल कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा में कमी आई है, लेकिन अब पहाड़ियों में नागा और कुकी समूहों के बीच तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह नया विवाद मुख्य रूप से कांगपोकपी में इम्फाल-तामेंगलोंग रोड कॉरिडोर के पास देखने को मिल रहा है।
आंकड़ों की बात करें तो 13 मई के बाद से अब तक कांगपोकपी-तामेंगलोंग मार्ग पर हुई हिंसा की विभिन्न घटनाओं में कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के कम से कम 17 लोगों की जान जा चुकी है।