सीकर: एक ही दिन में 5 बाल विवाह पर लगी रोक, 42 साल के विधुर से हो रही थी नाबालिग की शादी

12:17 PM Jul 17, 2026 | Rajan Chaudhary

राजस्थान: सीकर जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर करारा प्रहार किया गया है। गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को पुलिस और बाल अधिकार संरक्षण के लिए काम करने वाले स्वयंसेवी समूहों की संयुक्त कार्रवाई से एक ही दिन में पांच बाल विवाह रुकवाए गए। यह बड़ी सफलता अदालत द्वारा जारी किए गए निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) आदेशों के कारण संभव हो सकी है।

इस संयुक्त कार्रवाई में बचाए गए बच्चों में 9 और 12 साल के दो मासूम लड़के भी शामिल हैं। इन लड़कों की शादी पारंपरिक 'आटा-साटा' (अदला-बदली) प्रथा के तहत उन्हीं की उम्र की लड़कियों से करवाई जा रही थी। इसके अलावा एक अन्य मामले में 18 वर्ष से कम उम्र की एक नाबालिग लड़की को भी बाल विवाह की आग में झोंकने से बचाया गया।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) की सहयोगी संस्था 'गायत्री सेवा संस्थान' को गोकुलपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग की शादी होने की गुप्त सूचना मिली थी। जब संस्था के सदस्य पुलिस के साथ गांव पहुंचे, तो लड़की के परिवार वालों ने सच्चाई छिपाने की भरपूर कोशिश की और दावा किया कि लड़की बालिग है।

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हालांकि, स्कूल के रिकॉर्ड से उसकी जन्म तिथि की पुष्टि होने पर साबित हो गया कि वह 18 साल से कम उम्र की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उस नाबालिग की शादी 42 साल के एक विधुर से करवाई जा रही थी।

इसी जांच के दौरान टीम को एक और हैरान करने वाली जानकारी मिली। पता चला कि उसी परिवार में 9 और 12 साल के दो लड़कों की शादी भी महज कुछ दिनों बाद होने वाली थी। ये शादियां भी आटा-साटा कुप्रथा के तहत ही तय की गई थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गायत्री सेवा संस्थान ने तुरंत बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत सीकर के अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने बिना कोई देरी किए निषेधाज्ञा जारी कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इनमें से कोई भी बच्चा कानूनी उम्र तक पहुंचने से पहले शादी के बंधन में नहीं बंधेगा, जिससे एक साथ पांचों बाल विवाह रुक गए।

बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 13(1) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया यह इंजंक्शन आदेश प्रशासन को विशेष अधिकार देता है। इससे अधिकारी बाल विवाह होने से पहले ही सक्रिय रूप से उसे रोक सकते हैं। आमतौर पर अदालत यह भी घोषित करती है कि इस आदेश के उल्लंघन में किया गया कोई भी बाल विवाह शुरुआत से ही शून्य (अमान्य) माना जाएगा।

अपनी शादी रुकने के बाद 12 वर्षीय लड़के ने राहत की सांस ली और अपने सपनों को साझा किया। उसने बताया कि वह बड़ा होकर एक वकील बनना चाहता है। उसे डर था कि अगर यह शादी हो जाती, तो उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती और मजबूरी में मजदूरी या कोई अन्य काम करना पड़ता।

गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक और राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य शैलेंद्र पंड्या ने गुरुवार को कहा कि सीकर बाल विवाह के खिलाफ बने कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में एक अग्रणी जिले के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल की शुरुआत में अक्षय तृतीया के दौरान भी सीकर में दो लड़कियों का बाल विवाह रोकने के लिए पहली बार कोर्ट इंजंक्शन का इस्तेमाल किया गया था।

पंड्या के अनुसार, स्वयंसेवी संस्थाओं के इस दखल ने एक कड़ा संदेश दिया है कि यह कानून अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।

वहीं, जेआरसी के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने इस सफलता का श्रेय स्थानीय जागरूकता को दिया। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियानों के कारण अब समुदाय के लोग खुद आगे आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि लोग अपने आसपास होने वाले बाल विवाह की सूचना बेझिझक प्रशासन को दे रहे हैं।