+

मणिपुर में नहीं थम रहे प्रदर्शन: सीएम के कार्यक्रम में घुसने की कोशिश, नागा बहुल इलाकों में बंद और कांगपोकपी में कर्फ्यू

नई दिल्ली: मणिपुर की मध्य घाटी में विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी है। हालात तब और बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के एक सरकारी कार्यक्रम में घुसने का प्रयास किया। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है।

पिछले एक हफ्ते से यहां लगभग हर रात बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली जा रही हैं। नाइट कर्फ्यू की धज्जियां उड़ाते हुए सैकड़ों लोग हाथों में मशालें लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, जिसके कारण कई बार उनकी सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें भी हुई हैं।

दरअसल, 7 अप्रैल को बिष्णुपुर में एक घर पर हुए प्रोजेक्टाइल हमले में दो मैतेई बच्चों की मौत हो गई थी। इसी घटना के विरोध में पूरी मध्य घाटी में इन प्रदर्शनों का दौर शुरू हुआ है।

मंगलवार को जब थौबल जिले में मुख्यमंत्री द्वारा एक नए ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (बीडीओ) के उद्घाटन की खबर फैली, तो विरोध अचानक तेज हो गया। यह कार्यक्रम स्थल इंफाल के मुख्य केंद्र से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित था।

प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम स्थल तक जाने वाली सड़कों को पूरी तरह से जाम कर दिया और इस आयोजन के बहिष्कार का आह्वान किया। रास्तों पर भारी नाकाबंदी के चलते मुख्यमंत्री को अंततः सड़क मार्ग के बजाय हेलीकॉप्टर से वहां जाना पड़ा।

दोपहर 1:30 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर खोंगजोम फुंद्रेई असम राइफल्स कैंप में उतरा। जैसे ही उनके पहुंचने की खबर इलाके में फैली, भारी भीड़ खोंगजोम से कार्यक्रम स्थल तक का रास्ता रोकने के लिए जमा हो गई।

खोंगजोम बाजार, समरम क्रॉसिंग और अन्य जगहों पर भीड़ को हटाने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोलों सहित कई तरीके अपनाए। तमाम अवरोधों को पार करते हुए करीब एक घंटे की देरी से दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री आखिरकार आयोजन स्थल पर पहुंचे।

उनके पहुंचने से पहले ही प्रदर्शनकारियों ने जगह को घेर लिया था और वहां धावा बोलने की कोशिश की। इसके कारण स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षाबलों को एक बार फिर बल प्रयोग करना पड़ा।

मणिपुर पुलिस ने अपने बयान में बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे के समय पत्थरों और गुलेल से लैस एक बड़ा समूह नए बीडीओ कार्यालय की तरफ बढ़ा। उनका स्पष्ट इरादा इस नवनिर्मित भवन में तोड़फोड़ करना था।

पुलिस की बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद भीड़ उग्र होकर आगे बढ़ती रही। इससे सार्वजनिक संपत्ति, वहां मौजूद गणमान्य लोगों और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

पुलिस के मुताबिक, बिगड़ते हालात को देखते हुए कम से कम बल का प्रयोग किया गया। आखिरी विकल्प के तौर पर तय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भीड़ को हटाने के लिए नियंत्रित फायरिंग की गई।

इस कार्रवाई में हिंसक भीड़ का हिस्सा रहे 40 वर्षीय एलांगबाम नंदबीर सिंह को चोटें आईं। वह हेइरोक पार्ट 2 एलांगबाम लीराक के निवासी हैं और वर्तमान में वीडीएफ एसपीओ ए-कॉय के रूप में कार्यरत हैं।

इन तमाम तनावपूर्ण घटनाओं के बीच किसी तरह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री खेमचंद ने कहा कि नया बीडीओ कार्यालय प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा और जनता तक सेवाओं की पहुंच को आसान और पारदर्शी बनाएगा। उन्होंने शांति, सुशासन और समावेशी विकास के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

दूसरी तरफ, जहां घाटी में तनाव चरम पर है, वहीं यूनाइटेड नागा काउंसिल द्वारा नागा बहुल इलाकों में बुलाया गया तीन दिवसीय 'बंद' भी मंगलवार से प्रभावी हो गया। यह बंद 18 अप्रैल को उखरूल जिले में हुए एक एंबुश हमले में दो नगा लोगों की हत्या के विरोध में नागा समुदाय के इस शीर्ष संगठन ने बुलाया है।

इस बंद के दौरान भी एक नया टकराव देखने को मिला, जब समर्थकों ने कांगपोकपी जिले के एस. चांगौबुंग गांव के प्रवेश मार्ग को रोक दिया। यह गांव नगा बहुल सेनापति जिले की सीमा पर स्थित है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों ने जब इस नाकाबंदी को हटाने की कोशिश की, तो हाथापाई शुरू हो गई। देखते ही देखते यह झड़प पथराव में बदल गई और इलाके में भारी तनाव फैल गया।

हालात पर काबू पाने के लिए कांगपोकपी और सेनापति के एसपी के नेतृत्व में पुलिस और सीएपीएफ के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। इस नई घटना के बाद, कांगपोकपी जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जिले में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया है।

Trending :
facebook twitter