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अंबेडकर जयंती विवाद: CURaj में दलित प्रोफेसर 4 घंटे पुलिस हिरासत में, ईमेल लिखा था- 'मैं राजनीतिक सभा में नहीं आऊंगा'

अजमेर- राजस्थान के केंद्रीय विश्वविद्यालय (Central University of Rajasthan) में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार को पुलिस ने उनके ही कार्यालय से जबरन उठाकर करीब चार घंटे तक हिरासत में रखा। आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी एफआईआर या शिकायत के, सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल न होने की बात कही थी। डॉ. कुमार ने इसे अपनी आवाज दबाने की साजिश बताया है और आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस के साथ मिलकर उनके साथ सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण व्यवहार किया।

प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार, जो खुद अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, पर आरोप है कि उन्होंने 15 अप्रैल को डिप्टी चीफ मिनिस्टर के कार्यक्रम को बाधित करने की साजिश रची। लेकिन उनके शिकायत पत्र के अनुसार, हकीकत कुछ और ही है। पुलिस ने उनके ऑफिस में घुसकर मोबाइल छीन लिया, लैपटॉप बैग फेंक दिया, धमकियां दीं और 4 घंटे तक यूनिवर्सिटी प्रशासन भवन में हिरासत में रखा। क्या यह अम्बेडकर जयंती मनाने का तरीका है या SC/ST समुदाय की आवाज को कुचलने की साजिश?

डॉ. राकेश कुमार ने विस्तृत शिकायत पत्र में 10 लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें अजमेर के एसपी हर्ष वर्धन अग्रवाल, इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी, कांस्टेबल राम गोपाल, बाजरंग लाल मोर्या, अनिल कुमार, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. आनंद भालेराव, रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा, डॉ. प्रमोद कामले, डॉ. आनंद कुमार और पीआरओ अनुराधा मित्तल शामिल हैं। प्रोफेसर के अनुसार, 15 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे जब वे यूनिवर्सिटी बस से उतरकर अपने ऑफिस पहुंचे, तभी चार पुलिसकर्मी उनके ऑफिस में घुस पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर डिप्टी सीएम के कार्यक्रम को बाधित करने वाले हैं।

डॉ. राकेश कुमार ने तुरंत पूछा कि ऐसा कौन सा ईमेल है जिसमें उन्होंने ऐसा लिखा है। पुलिस ने कहा कि ईमेल अंग्रेजी में है और वे उसे पढ़ नहीं सकते। प्रोफेसर ने अपना ईमेल दिखाया जिसमें साफ लिखा था – “I can't be a part of a crowd, especially for a political gathering. Sorry!” यानी वे राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। फिर भी पुलिस ने उनके ऑफिस में हंगामा मचाया। इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी ने महंगे लैपटॉप वाला बैग फेंक दिया, कुर्सी खींचकर उनके पास बैठ गए और उन्हें पूरी तरह घेर लिया। उन्होंने धमकी दी कि जेल भेज देंगे। प्रोफेसर ने कहा कि अगर अपराधी हैं तो जेल भेज दें, लेकिन पहले शिकायत या FIR की कॉपी दिखाएं। इसके बावजूद पुलिस ने उनका मोबाइल छीन लिया, ऑफिस का दरवाजा बंद करने का मौका नहीं दिया और छात्रों-शिक्षकों के सामने उन्हें घसीटकर बाहर ले गए।

पुलिस वाहन में रखकर इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी ने एसपी हर्ष वर्धन अग्रवाल और रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा से बात की। डॉ. राकेश कुमार ने सुना कि अमरदीप शर्मा दयाराम चौधरी की तारीफ कर रहे थे। बाद में उन्हें यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के ऑफिस के पास एक कमरे में 4 घंटे यानी दोपहर 1:30 बजे तक हिरासत में रखा गया। मोबाइल वापस मिला तो पता चला कि मीडिया ने इस घटना को कवर कर दिया। लेकिन यूनिवर्सिटी की पीआरओ अनुराधा मित्तल ने मीडिया को झूठ बोला कि यूनिवर्सिटी ने पुलिस को कोई ईमेल नहीं भेजा। डॉ. राकेश कुमार का आरोप है कि उन्होंने ईमेल सिर्फ 34 लोगों (32 SC/ST फैकल्टी, VC और रजिस्ट्रार) को भेजा था। फिर पुलिस को किसने भेजा? उन्होंने प्रो. आनंद भालेराव, अमरदीप शर्मा, डॉ. प्रमोद कामले और डॉ. आनंद कुमार पर साजिश रचने का आरोप लगाया है।

राकेश कुमार का कहना है कि कुछ समय पहले, विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर पर कुछ छात्राओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा जिसमें कुछ छात्राएँ SC/ST समुदाय की थीलेकिन कुलपति ने इस मामले को दबा दिया, क्योंकि वह प्रोफेसर उनके करीबी सहयोगी हैं।

क्या सवाल उठाना है प्रताड़ना की असली वजह ?

डॉ. राकेश कुमार लंबे समय से यूनिवर्सिटी में छात्रों, शिक्षकों और अकादमिक घोटालों पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने द मूकनायक को बताया कि प्रो. आनंद भालेराव और अमरदीप शर्मा कभी उनके ईमेल का जवाब नहीं देते। अमरदीप शर्मा के ईमेल में गंभीर व्याकरण और टाइपिंग की गलतियां होती हैं, जिसकी उन्होंने कई बार शिकायत की। हाल ही में उन्होंने यूनिवर्सिटी में अकादमिक घोटालों का मुद्दा उठाया था। इससे पहले, बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर पर कुछ महिला छात्राओं (जिनमें SC/ST भी शामिल) के साथ सेक्सुअल हरासमेंट का आरोप लगा था। यह मामला महीनों तक चला, लेकिन प्रो. आनंद भालेराव ने इसे दबा दिया क्योंकि वो शिक्षक उनके करीबी हैं। उक्त प्रोफेसर पर आरोप के बावजूद उन्हें स्टूडेंट्स वेलफेयर का डीन और बाद में विभागाध्यक्ष बना दिया गया।

Email में लिखा था- SC/ST समुदाय बिकाऊ नहीं

12 अप्रैल को SC/ST सेल कन्वीनर डॉ. आनंद कुमार ने ईमेल भेजा कि 15 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती मनाई जाएगी और हर SC/ST फैकल्टी को कम से कम 5 छात्रों को डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में लाना चाहिए। राकेश कुमार का कहना है कि बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल को हुआ तो आयोजन एक दिन देरी से रखने का भी कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने ईमेल का जवाब दिया कि SC/ST समुदाय बिकाऊ नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब आप SC/ST छात्राओं के साथ हरासमेंट के मामले में खड़े नहीं हो सके, तो उन्हें राजनीतिक कार्यक्रम में कैसे ला सकते हैं? उन्होंने साफ लिखा कि वे राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। चार अन्य SC/ST फैकल्टी सदस्यों ने भी यही चिंता जताई, लेकिन डॉ. आनंद कुमार और डॉ. प्रमोद कामले (SC/ST लाइजन ऑफिसर) ने कोई जवाब नहीं दिया।

डॉ. राकेश कुमार का आरोप है कि यही असली वजह थी। वाइस चांसलर प्रो. आनंद भालेराव और रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा ने पुलिस को बुलाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। पुलिस ने पहले उन्हें रजिस्ट्रार ऑफिस बुलाया, लेकिन वे ऑफिस में ही मिलने को कह रहे थे। यूनिवर्सिटी कैंपस पर बिना प्रशासन की अनुमति के पुलिस कैसे घुस आई? हिरासत यूनिवर्सिटी प्रशासन भवन में ही क्यों की गई जबकि कैंपस पर कोई पुलिस थाना नहीं है? प्रोफेसर पूछते हैं – क्या भारत लोकतंत्र है या तानाशाही? क्या सवाल उठाना, चिंता जताना और राजनीतिक कार्यक्रम से दूर रहना भी अपराध है?

डॉ. राकेश कुमार की दो मुख्य मांगें हैं। पहला – उनके खिलाफ दर्ज शिकायत या FIR की कॉपी दी जाए। दूसरा यह कि सभी आरोपी पुलिसकर्मियों, खासकर इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी को सख्त सजा दी जाए। वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, दोनों डॉक्टर्स और पीआरओ के कॉल रिकॉर्ड्स तथा ईमेल का गहन जांच हो। डॉ. राकेश कुमार ने लिखा है कि वे माफी नहीं चाहते, क्योंकि इससे उनका मानसिक आघात कम नहीं होगा। वे 9 साल से यूनिवर्सिटी में सम्मानपूर्वक काम कर रहे थे, लेकिन एक दिन में उनकी गरिमा को ठेस पहुंचा दी गई।

द मूकनायक ने कुलपति प्रोफेसर आनंद भालेराव, रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा और अजमेर एसपी को भेजे ईमेल में डॉ. राकेश कुमार के आरोपों को लेकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन अभी तक किसी से कोई जवाब नहीं प्राप्त हुआ। जवाब मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी।

SC समुदाय के प्रोफेसर का कहना है कि अम्बेडकर जयंती मनाने वाले वाइस चांसलर ने खुद अम्बेडकर के लोगों को हिरासत में रखकर उनका अपमान किया। क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है? प्रोफेसर ने मामले की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग व अन्य संगठनों को भी भेजी है, पूरा मामला अब मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। क्या राजस्थान पुलिस और सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में पारदर्शी जांच कराएगा या फिर SC/ST आवाज को दबाने की कोशिश जारी रहेगी?

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