जेएनयू कैंपस में फिर मचा बवाल: वीसी के इस्तीफे की मांग पर आधी रात को भिड़े Left और ABVP छात्र, कई घायल

01:03 PM Feb 24, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर खूनी संघर्ष का गवाह बना है। रविवार आधी रात को कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच जोरदार झड़प हो गई। वामपंथी दल विश्वविद्यालय की कुलपति (VC) शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित के इस्तीफे की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाल रहे थे, जिस दौरान यह विवाद भड़क गया और देखते ही देखते हिंसक हो गया।

क्या है छात्रों के एक-दूसरे पर आरोप?

प्रदर्शनकारी वामपंथी छात्रों का आरोप है कि उनका जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से निकल रहा था, तभी ABVP के सदस्यों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और जमकर पथराव किया।

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वहीं, इसके उलट ABVP ने दावा किया है कि 'इस्तीफे' की आड़ में वामपंथी छात्रों ने लाइब्रेरी में जबरन प्रवेश किया और वहां शांति से अपनी पढ़ाई कर रहे आम छात्रों के साथ मारपीट की। लाठीचार्ज और पत्थरबाजी की इस घटना ने एक बार फिर जेएनयू कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस छेड़ दी है।

एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं 10 से ज्यादा घायल छात्र

रविवार रात हुई इस हिंसक झड़प में 10 से अधिक छात्र घायल हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से कुछ छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों को तुरंत एम्स (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस को कैंपस के बाहर अलर्ट मोड पर रखा गया था। हालांकि, जेएनयू के अपने स्वायत्तता (autonomy) नियमों के चलते, पुलिस प्रशासन को कैंपस के अंदर जाकर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन की आधिकारिक अनुमति का इंतजार करना पड़ा। बिना इजाजत पुलिस अंदर प्रवेश नहीं कर सकती थी।

आखिर क्या है इस पूरे हंगामे की जड़?

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित का एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू है, जो 16 फरवरी 2026 को रिलीज़ हुआ था।

यूजीसी (UGC) के नियमों पर चर्चा करते हुए वीसी ने कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिसे छात्र 'जातिवादी' और 'अपमानजनक' करार दे रहे हैं। इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "आप हमेशा विक्टिम कार्ड (पीड़ित होने का दिखावा) खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते। जैसा अश्वेत लोगों के साथ हुआ था, ठीक वैसा ही यहां दलितों के लिए हुआ है।"

छात्र संगठनों का कड़ा विरोध

एसएफआई (SFI), आइसा (AISA) और जेएनयूएसयू (JNUSU) जैसे छात्र संगठनों ने वीसी के इस बयान को दलितों के संघर्ष का अपमान और 'वोक कल्चर' के नाम पर संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यूजीसी के नियमों को "तर्कहीन" और "अनावश्यक" बताने वाली वीसी की पृष्ठभूमि आरएसएस (RSS) से जुड़ी है और उन्होंने दलितों को "स्थायी पीड़ित" का लेबल दिया है। AISA ने अपने बयान में स्पष्ट किया:

"आइसा जेएनयू के छात्रों, निष्कासित जेएनयूएसयू पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के साथ उनके इस संघर्ष में पूरी एकजुटता से खड़ा है। यह लड़ाई कैंपस में मौजूद ब्राह्मणवादी ताकतों और छात्रों को उनके लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के अधिकार से वंचित करने वाले अन्यायपूर्ण निष्कासन के खिलाफ है।"

जेएनयू प्रशासन और कुलपति की सफाई

इस बीच, जेएनयू प्रशासन ने घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कैंपस में "उपद्रवी व्यवहार" और "सार्वजनिक संपत्ति को बार-बार नुकसान पहुंचाने" जैसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ उचित व सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, बढ़ते विवाद को देखते हुए वीसी शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने स्पष्ट किया है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका मतलब सिर्फ इतना था कि किसी भी व्यक्ति को स्थायी रूप से "पीड़ित" की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।