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हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र पर हमले के खिलाफ ASA का प्रदर्शन; NCSC ने मांगा जवाब

हैदराबाद: सोमवार, 23 फरवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) में एक दलित छात्र पर हुए कथित जातिगत हमले और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ छात्र संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) और फ्रेटरनिटी मूवमेंट जैसे संगठनों ने भी हिस्सा लिया। यह मामला ऐसे समय में गरमाया है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी (UGC) के भेदभाव-रोधी नियमों को लागू करने को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ी हुई है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत एक निजी बहस से हुई, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि समाजशास्त्र (MA Sociology) के द्वितीय वर्ष के छात्र अनुज कुमार के साथ इतिहास (MA History) के द्वितीय वर्ष के छात्र सूर्यवर्धन सिंह बबलू ने मारपीट की। सूर्यवर्धन ऑल इंडियन अदर बैकवर्ड कास्ट्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) के पूर्व अध्यक्ष भी हैं।

एएसए (ASA) के सदस्यों ने बताया कि घटना के दौरान सूर्यवर्धन ने अनुज के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया और उसके रूममेट को भी धमकाया।

प्रशासन और AIOBCSA पर लगे गंभीर आरोप

एएसए ने इस पूरे घटनाक्रम पर एआईओबीसीएसए (AIOBCSA) की चुप्पी की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि यह संगठन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और अनुज की शिकायत को सिरे से नकार रहा है।

इसके अलावा, एएसए ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों पर भी निशाना साधा है। उनका आरोप है कि आरक्षण और समन्वय सेल के संयुक्त रजिस्ट्रार पी. तुकाराम ने शिकायत पर कार्रवाई करने में जानबूझकर देरी की, जबकि चीफ प्रॉक्टर संजय सुबोध ने इस गंभीर मुद्दे पर उदासीन रवैया अपनाया। छात्र संगठन की मांग है कि 'भेदभाव-रोधी सेल' (Anti-Discrimination Cell) इस मामले की गहन जांच करे, सूर्यवर्धन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, और लापरवाही बरतने वाले दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाए।

AIOBCSA का पलटवार और क्रॉस कंप्लेंट

इन आरोपों के जवाब में एआईओबीसीएसए ने एएसए पर अपने ही संगठन के भीतर समान मुद्दों को संभालने में 'दोहरे मापदंड' (selective morality) अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 'एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कमेटी' और 'प्रॉक्टोरियल कमेटी' की आधिकारिक रिपोर्ट और अंतिम फैसले के बाद ही इस मामले में कोई उचित निर्णय लेंगे।

इस बीच, दोनों पक्षों ने विश्वविद्यालय के भेदभाव-रोधी सेल का दरवाजा खटखटाया है। अनुज ने जहां जाति आधारित हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है, वहीं सूर्यवर्धन ने भी अनुज के खिलाफ रैगिंग का मामला दर्ज करवाया है।

मामले में पुलिस और NCSC की एंट्री

इस घटना ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। अनुज ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का भी रुख किया है। आयोग ने इस शिकायत को राचकोंडा पुलिस आयुक्तालय (Rachakonda Police Commissionerate) को अग्रेषित कर दिया है और पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि 30 दिनों के भीतर 'कार्रवाई रिपोर्ट' (action-taken report) सौंपी जाए।

इस मामले की जांच से जुड़े विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने द न्यूज मिनट के हवाले से बताया कि पिछले दो दिनों में सुनवाई आयोजित कर अनुज की शिकायतें सुनी गई हैं। अधिकारी ने कहा, "सुनवाई का पूरा ब्यौरा तैयार कर डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर (DSW), चीफ प्रॉक्टर और चीफ वार्डन को सिफारिशें भेज दी गई हैं। सूर्यवर्धन ने भी अनुज के खिलाफ रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई है। ये शिकायतें एक हफ्ते पहले ही आगे भेज दी गई थीं और फिलहाल मामले की जांच जारी है।"

UGC के नए नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह कैंपस विवाद उस वक्त सामने आया है जब हाल ही में केंद्र सरकार ने परिसरों में जाति, लिंग और विकलांगता आधारित भेदभाव से निपटने के लिए 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) नियम, 2012' में संशोधन कर नए नियम जोड़े हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसके कार्यान्वयन पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि ये नियम "अस्पष्ट हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है।"

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