जनगणना 2027: 1 अप्रैल से शुरू होगा महाअभियान, दूसरे चरण में होगी बहुप्रतीक्षित जातिगत गणना

01:52 PM Mar 31, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: भारत में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 का पहला चरण इस बुधवार, 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया है कि इस राष्ट्रीय अभ्यास के दूसरे चरण यानी 'जनसंख्या गणना' (पीई) के दौरान जातिगत जनगणना भी कराई जाएगी।

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इस पूरी प्रक्रिया की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना (एचएलओ) शामिल है, जिसमें मुख्य रूप से आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और पारिवारिक संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

जनगणना का दूसरा चरण जनसांख्यिकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक मापदंडों के साथ-साथ प्रवासन और प्रजनन क्षमता से जुड़े आंकड़े प्रदान करेगा। नारायण ने बताया कि राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) के फैसले के अनुसार जातियों की गिनती भी इसी दूसरे चरण के दौरान पूरी की जाएगी।

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पहले चरण के सवालों की अधिसूचना इसी साल 22 जनवरी को जारी कर दी गई थी। वहीं, दूसरे चरण का शेड्यूल और प्रश्नावली आने वाले समय में प्रकाशित की जाएगी।

यह महाअभियान 1 अप्रैल से स्व-गणना के साथ शुरू होगा, जिसमें लोग 15 दिनों की विंडो के दौरान डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा कर सकेंगे। इसके बाद 16 अप्रैल से नामित प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम शुरू किया जाएगा। पहले चरण को अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की विंडो में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नारायण ने आम जनता से प्रगणकों को सटीक जानकारी देने की अपील की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसका इस्तेमाल किसी योजना का लाभ लेने या अदालत में सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकेगा।

जनगणना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत किसी सरकारी या निजी संगठन को नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लोगों से कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे।

जनगणना 2027 का दायरा काफी विशाल है और यह पूरे देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करेगा। इस प्रक्रिया में 784 जिले, 5,127 वैधानिक शहर, 4,580 जनगणना शहर और 6,39,902 गांव शामिल होंगे।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने के सवाल पर नारायण ने कहा कि फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अब तक जनगणना अधिसूचना जारी न करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य के साथ इस विषय को उठाया है। उन्हें उम्मीद है कि राज्य जल्द ही इसे प्रकाशित करेगा क्योंकि यह एक कानूनी अनिवार्यता है और पहले चरण के लिए सितंबर 2026 तक का समय उपलब्ध है।

जातिगत जनगणना की कार्यप्रणाली पर अधिकारियों को कई सुझाव मिले हैं, जिन पर गहराई से चर्चा की जाएगी। इस चर्चा के बाद ही जातिगत गणना से जुड़े अंतिम सवाल तय किए जाएंगे। इस पूरी कवायद के बाद जनगणना के आंकड़ों का पहला सेट साल 2027 में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

गृह मंत्रालय के एक बयान के अनुसार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में मकान सूचीकरण 16 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच होगा। इन जगहों पर 1 से 15 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना का समय दिया गया है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में यह काम 1 मई से 30 मई के बीच होगा। इन राज्यों में डिजिटल स्व-गणना की अवधि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलेगी।

संविधान की सातवीं अनुसूची की क्रम संख्या 69 के तहत जनगणना एक केंद्रीय विषय है। पिछले साल 16 जून को केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 आयोजित करने के अपने इरादे की घोषणा करते हुए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी।

गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक (आरजीआई) कार्यालय द्वारा जारी उस अधिसूचना के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 तय की गई है। हालांकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फ से ढके और गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए यह संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है।