हैदराबाद: एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की मां ने अपने नाबालिग बेटी के कथित यौन शोषण और POCSO एक्ट मामले में गहरा दर्द व्यक्त करते हुए प्रेस बयान जारी किया है। FIR संख्या 684/2026 के तहत दर्ज इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी बंदी साई भगीरथ केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के पुत्र हैं। मां का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर भावनात्मक रूप से मेनिप्यूलेट किया, बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला और अंततः नाबालिग बच्ची के साथ जबरन दुराचार किया। आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उन्हें ढूंढ रही है।
मां ने बताया कि उनकी बेटी वर्ष 2025 में बंदी साई भगीरथ के संपर्क में आई। शुरू में सामान्य बातचीत थी, जो धीरे-धीरे लगातार संवाद, भावनात्मक आश्वासनों, बार-बार मिलने के लिए मनाने और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए भावनात्मक निर्भरता में बदल गई। परिवार की मां ने कहा, “हमारे सबसे बुरे सपनों में भी हम कल्पना नहीं कर सकते थे कि एक दिन हमें अपनी बेटी की गरिमा और न्याय के लिए समाज के सामने हाथ जोड़कर खड़ा होना पड़ेगा।”
मां ने आगे बताया कि बेटी के अनुसार आरोपी ने उसे पढ़ाई और भविष्य से दूर करने की कोशिश की, बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला, जिसका बेटी ने कई बार विरोध किया। खासतौर पर 31 दिसंबर 2025 की रात और 1 जनवरी 2026 की सुबह मोइनाबाद स्थित निजी परिसर में बेटी को शराब पिलाने के लिए मजबूर किया गया और नशे की हालत में शारीरिक दुराचार किया गया। मां ने कहा, “मेरे लिए अपनी बेटी की आंखों में डर, शर्म और भावनात्मक टूटन देखना असहनीय पीड़ा है।”
परिवार के पास कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत, चैट और मैसेज हैं, जिनमें आरोपी के कथित माफी मांगने, दर्द पहुंचाने की स्वीकारोक्ति और फिर से मिलने-शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव वाले संदेश शामिल हैं। मां ने अपील की है कि सभी डिजिटल सबूतों को तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा जाए, ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।
जनवरी 2026 में संबंध टूटने के बाद बेटी की स्थिति बेहद खराब हो गई। वह पहले वाली हंसमुख बच्ची नहीं रही। वह उदास, आत्मविश्वासहीन, भावनात्मक रूप से टूट चुकी और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी। इस दौरान आरोपी ने कथित तौर पर घबराहट में परिवार से संपर्क कर बेटी की हालत के बारे में पूछा, जो मां को आरोपी की जागरूकता का सबूत लगता है।
मार्च-अप्रैल में जब परिवार कानूनी रास्ता अपनाने की सोच रहा था, तब कथित दबाव और मना करने की कोशिशें शुरू हो गईं। 21 अप्रैल को आरोपी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने परिवार के खिलाफ एक्सटॉर्शन और ब्लैकमेल का मुकदमा दर्ज करा दिया। 22 अप्रैल को एक श्री संगप्पा नामक व्यक्ति परिवार के घर गये और प्रभावशाली लोगों का हवाला देकर मामले को सुलझाने की कोशिश की।
23 अप्रैल को परिवार बंदी संजय कुमार के आवास पर पहुंचा। मां ने कहा, “हम अपनी पीड़ित बच्ची की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद लेकर गए थे, लेकिन वहां राजनीतिक प्रभाव, समर्थकों और ‘परेशान करने वालों’ के परिणामों की बातें सुनकर हम डर गए।” उसके बाद से पूरा परिवार डर और भावनात्मक दबाव में जी रहा है।
8 मई 2026 को परिवार पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन पहुंचा। मां का आरोप है कि पांच घंटे से ज्यादा इंतजार कराया गया, जबकि नाबालिग बच्ची भावनात्मक रूप से टूट चुकी थी। जीरो FIR की बात कहने पर ही शिकायत स्वीकार की गई। उसी दौरान परिवार को पता चला कि करीमनगर टाउन थाने में उनके खिलाफ FIR 253/2026 एक्सटॉर्शन का पहले ही दर्ज हो चुका है।
मां ने कहा कि शुरू में FIR में हल्की और जमानती धाराएं लगाई गईं। बाद में विस्तृत बयान दर्ज होने, सार्वजनिक ध्यान बढ़ने और SIT गठन के बाद POCSO एक्ट की गंभीर गैर-जमानती धाराएं जोड़ी गईं। फिर भी आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं और फरार चल रहे हैं, जो परिवार को हर दिन तोड़ रहा है।
परिवार ने नाबालिग बेटी की पहचान उजागर करने, निजी वीडियो-मैसेजेस के प्रसार और चरित्र हनन की कड़ी निंदा की है। मां ने अपील की कि कोई भी मीडिया या सोशल मीडिया यूजर बेटी की पहचान या निजी सामग्री न फैलाए, क्योंकि इससे बच्ची को डबल आघात पहुंच रहा है।
उम्र के दस्तावेजी विवाद पर मां ने साफ कहा कि POCSO सुरक्षा लागू होती है। उम्र सुधार की प्रक्रिया पहले से शुरू थी और सभी दस्तावेज नाबालिग होने की पुष्टि है। तकनीकी मुद्दों को लेकर ध्यान भटकाने की कोशिशों की उन्होंने निंदा की।
मां ने अपील करते हुए कहा कि “हम बदला या प्रचार नहीं चाहते। हम सिर्फ एक साधारण नागरिक को मिलने वाला न्याय, अपनी बेटी की गरिमा और निष्पक्ष जांच चाहते हैं। हम न्यायपालिका, जांच एजेंसियों, बाल अधिकार संस्थाओं और समाज से हाथ जोड़कर गुहार लगाते हैं कि सबूत सुरक्षित रखे जाएं, जांच बिना किसी दबाव के चले और हमारी बच्ची को डर, धमकी और सामाजिक लक्ष्यीकरण से सुरक्षा मिले।”
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के आर. एस. प्रवीण ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा," आखिरकार तेलंगाना POCSO विक्टिम की माँ ने ताकतवर लोगों की धमकियों, ट्रोलिंग और बेपरवाही के बावजूद अपनी बात रखी। प्लीज़ उनकी बात ध्यान से सुनें।"
बेटे के खिलाफ POCSO केस पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने क्या कहा
अपने होमटाउन करीमनगर में बीते दिनों हिंदू एकता यात्रा को संबोधित करते हुए, बंदी संजय ने कहा कि इन आरोपों से उन्हें और उनके परिवार को परेशानी हुई है। मंत्री बोले, "मेरे बेटे ने कहा कि उसने कोई गलती नहीं की। उसने कहा 'हम दोस्त थे, बाद में अलग हो गए'। उसने कहा कि उसने कोई गलती नहीं की और वह ईमानदारी से इससे बाहर निकलेगा। मैं उसका बचाव नहीं कर रहा हूँ। जिसने भी गलती की है, मेरे बेटे सहित, कानून के सामने सभी बराबर हैं।"
यह मामला पूरे तेलंगाना और देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ नाबालिग बच्ची की मां न्याय और सुरक्षा की गुहार कर रही है, वहीं आरोपी पक्ष ने एक्सटॉर्शन का दावा किया है। पुलिस की SIT जांच कर रही है।