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एमपी में नाबालिग बच्चों से अपराध की स्थिति भयाभय! भोपाल में 10 साल की बच्ची से छेड़छाड़, पड़ोसी युवक गिरफ्तार

भोपाल। राजधानी भोपाल के कमलानगर थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के पड़ोस में रहने वाले 28 वर्षीय युवक पर उसे अकेला देखकर अपने घर ले जाने और वहां उसके साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। बच्ची ने आरोपी की हरकत का विरोध करते हुए शोर मचाया। आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचा और आरोपी को पकड़ लिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

अकेला देखकर बच्ची को घर ले जाने का आरोप

पुलिस के अनुसार बच्ची स्कूली छात्रा है और आरोपी युवक उसके पड़ोस में रहता है। गुरुवार दोपहर बच्ची घर के आसपास मौजूद थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे अकेला देखा और कथित तौर पर बहला-फुसलाकर अपने घर के अंदर ले गया। आरोप है कि घर के अंदर पहुंचने के बाद युवक ने बच्ची के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। बच्ची ने इसका विरोध किया और मदद के लिए शोर मचाने लगी।

शोर सुनकर पड़ोसी पहुंचा, आरोपी को पकड़ा

बच्ची के शोर की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति को संदेह हुआ। वह तुरंत आरोपी के घर पहुंचा। वहां बच्ची को बाहर निकालने के बाद उसने आरोपी को पकड़ लिया। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही कमलानगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

परिजनों की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट में प्रकरण

घटना के बाद बच्ची के परिजनों ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और घटना की जांच शुरू कर दी है। मामले में बालिका के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एमपी में POCSO के 3721 मामले दर्ज

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में बच्चों के साथ यौन अपराधों से संबंधित POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स) अधिनियम के तहत 3,721 मामले दर्ज किए गए। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में चौथे स्थान पर रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में सबसे अधिक 5,320 मामले दर्ज हुए, जबकि महाराष्ट्र में 4,829 और उत्तरप्रदेश में 3,671 मामले सामने आए। आंकड़े बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करते हैं और प्रभावी रोकथाम व त्वरित न्याय की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

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