महाराष्ट्र: पुणे जिले के मांजरी इलाके में स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावास के छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुक्रवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गई। इस कड़े विरोध प्रदर्शन के बीच स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण दो छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, जबकि अन्य छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं।
आदिवासी समुदाय से जुड़े गंभीर मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुल पांच छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी नवनाथ मोरे के अनुसार, 22 वर्षीय विजय भानबडले और 24 वर्षीय राहुल धनवे को सांस लेने में तकलीफ और डिहाइड्रेशन की गंभीर शिकायत के बाद ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। वहीं, 22 वर्षीय निकिता मेटकर, 26 वर्षीय श्वेता गिरनाक और शरद ठोकल अभी भी अपने अनशन पर कायम हैं।
विवादित सरकारी प्रस्ताव का कड़ा विरोध
आंदोलनकारी छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 5 अगस्त को जारी किए गए उस सरकारी प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की है, जिसे वे अपने हितों के खिलाफ मानते हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि इस प्रस्ताव में उम्र की सीमा और पढ़ाई के बीच अंतराल (अकादमिक ब्रेक) को लेकर लगाई गई शर्तें पूरी तरह से अनुचित और अव्यवहारिक हैं।
इसके साथ ही, छात्र उस नए नियम का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं जिसके तहत छात्रावास में रहने वाले छात्रों के किसी भी तरह का रोजगार करने पर पाबंदी लगा दी गई है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शरद ठोकल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार से सवाल किया कि छात्रों को पार्ट-टाइम काम करने से क्यों रोका जाना चाहिए। उनका तर्क है कि ये सभी छात्र 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं और कई छात्रों के लिए अपनी शिक्षा जारी रखने हेतु आर्थिक रूप से सशक्त होना बेहद जरूरी है।
मुआवजे और नई भर्तियों की अहम मांगें
हड़ताली छात्रों ने एक ही जिले के छात्रों के लिए छात्रावास में 70 प्रतिशत रिक्तियां आरक्षित करने वाले दिशा-निर्देश को तुरंत रद्द करने की मांग उठाई है। इसके अलावा, छात्रों ने गढ़चिरौली के एक आदिवासी आवासीय विद्यालय में सांप के काटने से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी पुरजोर मांग की है।
छात्रों का यह भी कहना है कि इन दुखद मौतों की घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए उन्होंने 12,500 आदिवासी पदों पर रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को जल्द लागू करने और सेवा से हटाए गए पेसा (PESA) कर्मचारियों की ससम्मान बहाली के साथ उनकी स्थायी नियुक्ति करने की भी अपील की है।