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एमपी में OBC 13% आरक्षण पर अब शीर्ष अदालत करेगी सीधी सुनवाई, रिजर्वेशन से जुड़े दो मामले रिकॉल

भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहे ओबीसी आरक्षण विवाद में एक बार फिर बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। ने अपने पूर्व आदेश में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए आरक्षण से जुड़े दो अहम मामलों को रिकॉल कर लिया है। अब 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को होल्ड रखने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत स्वयं सुनवाई करेगी। इस फैसले को प्रदेश में चल रही आरक्षण बहस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे मामले की दिशा और गति दोनों प्रभावित होंगी।

87-13 फॉर्मूले पर फिर से सुप्रीम कोर्ट की नजर

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने 87-13 के फॉर्मूले को चुनौती देने वाले प्रमुख मामलों को अपने पास वापस लेते हुए उनकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय की है। यह वही फॉर्मूला है जिसके तहत 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को रोककर शेष 87 प्रतिशत पर नियुक्तियां और प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही थीं। अब इस व्यवस्था की वैधता और संवैधानिकता पर सीधे सुप्रीम कोर्ट में बहस होगी, जिससे अंतिम निर्णय का रास्ता साफ हो सकता है।

52 प्रकरण जबलपुर हाईकोर्ट को लौटाए गए

इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा बदलाव यह हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुल 52 प्रकरणों को वापस जबलपुर हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया है। वहीं, दो विशेष मामलों को अपने पास रखते हुए खुद सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इन मामलों में दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन शामिल हैं।

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि यह संशोधन 19 फरवरी 2026 के आदेश में किया गया है, जिसमें पहले सभी मामलों को हाईकोर्ट भेज दिया गया था। अब संशोधित आदेश के तहत दो महत्वपूर्ण मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास रख लिया है।

रिव्यू याचिका के बाद बदला कोर्ट का रुख

इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब की ओर से दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका (MA/529/26) दाखिल की गई। इस याचिका पर 20 मार्च 2026 को खुले न्यायालय में विस्तृत सुनवाई हुई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन किया।

संशोधित आदेश 30 मार्च 2026 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि अधिकांश मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट करेगा, लेकिन आरक्षण के मूल मुद्दे से जुड़े दो मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में ही होगी।

हाईकोर्ट में 103 याचिकाओं पर होगी नियमित सुनवाई

इधर, एमपी जबलपुर हाईकोर्ट ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 103 याचिकाओं पर 2 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच नियमित सुनवाई निर्धारित की गई है। कोर्ट ने इन मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए विशेष बेंच गठित करने के निर्देश पहले ही दे दिए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार ने इन सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराया था, जो अलग-अलग खंडपीठों के समक्ष लंबित थे। इनमें से कुछ मामलों की सुनवाई जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच के समक्ष भी प्रस्तावित थी।

द मूकनायक से बातचीत करते हुए अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण मामले में अपने पहले दिए गए आदेश में संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि पहले सभी मामलों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया गया था, लेकिन अब दो महत्वपूर्ण मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास रख लिया है। इन मामलों में 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को रोकने के फैसले पर सीधी सुनवाई होगी, जिससे इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति साफ हो सकेगी।

उन्होंने आगे कहा कि बाकी सभी मामलों को फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया गया है, जहां 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होगी। उनके मुताबिक, इससे प्रक्रिया तेज होगी और बड़ी संख्या में लंबित मामलों का जल्द निपटारा संभव हो पाएगा।

अधिवक्ता ठाकुर ने यह भी बताया कि यह बदलाव रिव्यू याचिका के बाद हुआ है, जिसमें कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंशिक संशोधन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति खत्म होगी और स्पष्ट दिशा सामने आएगी।

प्रदेश में बढ़ेगी सियासी और सामाजिक हलचल

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज होने की संभावना है। एक ओर जहां ओबीसी वर्ग के संगठन इस फैसले को अपनी लड़ाई में अहम पड़ाव मान रहे हैं, वहीं सरकार और अन्य वर्गों की नजर भी अब अप्रैल में होने वाली सुनवाई पर टिक गई है।

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