मनरेगा के नए अवतार 'VB-G RAM G' का असर: महज 15 दिनों में 67.6 लाख मजदूरों के नाम कटे, मंत्रालय ने दी यह दलील

11:31 AM Jul 16, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: 1 जुलाई, 2026 को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की जगह नए कानून 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' (VB-G RAM G), 2025 ने ले ली है। इस बड़े बदलाव के महज दो सप्ताह के भीतर ही पंजीकृत मजदूरों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह 'लिबटेक इंडिया' (LibTech India) के एक विश्लेषण के मुताबिक, नई व्यवस्था लागू होने के पहले 15 दिनों में पंजीकृत श्रमिकों का आंकड़ा 27 करोड़ से घटकर 26.33 करोड़ रह गया है।

इसका सीधा मतलब है कि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम से जुड़े कुल कार्यबल में से 2.5 प्रतिशत यानी 67.6 लाख मजदूरों के नाम हटा दिए गए हैं।

केवल पंजीकृत ही नहीं, बल्कि सक्रिय मजदूरों की संख्या में भी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार काम करने वाले सक्रिय श्रमिकों की संख्या 10.84 करोड़ से गिरकर 10.57 करोड़ हो गई है। यह आंकड़ा 2.43 प्रतिशत यानी लगभग 26.3 लाख सक्रिय मजदूरों की गिरावट को दर्शाता है।

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हालांकि, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने इन आंकड़ों और निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि यह विश्लेषण बहुत ही कम समय के आंकड़ों पर आधारित है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मजदूरों और जॉब कार्ड के रिकॉर्ड का निरंतर सत्यापन, अद्यतन और नवीनीकरण किया जाता है। इसलिए, पंजीकृत और सक्रिय मजदूरों की संख्या एक 'गतिशील आंकड़ा' (Dynamic figure) है, जो रिकॉर्ड अपडेट होने के साथ हमेशा बदलता रहता है।

मंत्रालय ने इस कटौती की जिम्मेदारी राज्यों पर डालते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी नाम को हटाने के लिए राज्यों को केंद्र द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का सख्ती से पालन करना होता है। सरकार का यह भी दावा है कि ई-केवाईसी (e-KYC) या फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान) पूरा न होने के कारण किसी को काम न मिलने की कोई भी शिकायत अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसके साथ ही, नए कानून के तहत अब तक 1.91 लाख श्रमिकों को कवर करते हुए लगभग 84,000 नए 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' भी जारी किए जा चुके हैं।

लिबटेक इंडिया के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि पंजीकृत और सक्रिय मजदूरों की संख्या में आई इस शुद्ध गिरावट का एक बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से तीन राज्यों— बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना से है। अकेले बिहार में 5.98 लाख, उत्तर प्रदेश में 8.06 लाख और तेलंगाना में 7.2 लाख मजदूरों को सूची से बाहर किया गया है।

शोधकर्ता समूह का कहना है कि बदलाव के दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया था कि ई-केवाईसी से सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक कि नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। साथ ही, लंबित ई-केवाईसी के कारण किसी भी मजदूर को काम देने से मना नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ढांचे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जो मजदूर तकनीकी कारणों से ई-केवाईसी या फेशियल रिकग्निशन-आधारित सत्यापन (FRS) पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें नाम कटने से कैसे बचाया जाएगा।

लिबटेक इंडिया के शोधकर्ता वेंकटेश्वरलू कुरुवा ने बताया कि सरकार की ओर से यह नहीं बताया गया है कि ऐसे छूटे हुए मजदूरों को नई व्यवस्था में कैसे शामिल किया जाएगा, उनकी पहचान कैसे होगी, या गलती से नाम कटने पर उसे तुरंत बहाल करने की प्रक्रिया क्या होगी। लिबटेक ने इस हालिया गिरावट को डिजिटल अनुपालन से जुड़ी चौथी सबसे बड़ी कटौती करार दिया है। इससे पहले 2022-23 में आधार (Aadhaar) आधारित भुगतान, 2025 में अनिवार्य ई-केवाईसी और 2026 में चेहरे की पहचान आधारित उपस्थिति सत्यापन के दौरान भी श्रमिकों की संख्या में इसी तरह की भारी कमी देखी गई थी।

कुरुवा ने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता डेटाबेस सत्यापन के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस पैटर्न को लेकर है जहां हर अनिवार्य डिजिटल नियम लागू होने के बाद मजदूरों की संख्या में भारी गिरावट आती है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन गरीब और कमजोर मजदूरों को भुगतना पड़ता है जो तकनीकी, कनेक्टिविटी, यात्रा, जरूरी दस्तावेज या जमीनी समर्थन की कमी जैसी बाधाओं से जूझ रहे हैं।

संस्था ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा यह स्पष्ट नहीं करता कि इन मजदूरों के नाम आखिर क्यों हटाए गए। क्या उनका ई-केवाईसी या चेहरे का सत्यापन लंबित था, क्या उन्हें नाम काटने से पहले कोई पूर्व सूचना दी गई थी, क्या ग्राम सभा द्वारा कोई सत्यापन किया गया था, या फिर क्या उनके पास अपील करने का कोई तंत्र मौजूद है? इसके अलावा, प्रभावित मजदूरों के लिंग, उम्र या जाति का कोई विवरण भी उपलब्ध नहीं है।

इन तमाम चिंताओं के बीच, ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि 'VB-G RAM G' के लागू होने के बाद से अब तक रोजगार मांगने वाले 76.71 लाख श्रमिकों को सफलतापूर्वक काम उपलब्ध कराया गया है।