NGT ने दी भोपाल के अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी: पर्यावरणीय शर्तों के पालन के साथ आगे बढ़ेगा काम, कटेंगे 7871 पेड़!

01:02 PM May 22, 2026 | Ankit Pachauri

भोपाल। राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास को 10 लेन में विस्तारित करने के बहुचर्चित प्रोजेक्ट को लेकर चल रहे विवाद पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की नई दिल्ली बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एनजीटी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को परियोजना आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके साथ स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सभी शर्तों और नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।

यह मामला भोपाल के पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना द्वारा दायर याचिका के बाद एनजीटी पहुंचा था। याचिका में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, पर्यावरणीय क्षति, शहरी तापमान में वृद्धि और मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की।

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एनएचएआई ने कहा- राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट

सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने अधिकरण को बताया कि अयोध्या बायपास का चौड़ीकरण राष्ट्रीय महत्व की आधारभूत संरचना परियोजना है। भोपाल में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स और जाम की समस्या को कम करने के लिए यह प्रोजेक्ट जरूरी है।

एनएचएआई ने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अनुमति प्राप्त की गई है तथा प्रतिपूरक वृक्षारोपण पर्यावरणीय मानकों और ग्रीन हाईवे नीति के तहत किया जाएगा।

एनजीटी बोला- अनुमति में कोई अवैधता नहीं

एनजीटी ने उपलब्ध दस्तावेजों, रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद माना कि वृक्ष कटाई की अनुमति में प्रथम दृष्टया कोई अवैधता नहीं पाई गई है। हालांकि अधिकरण ने पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं।

अधिकरण ने यह दिए निर्देश:

मध्यप्रदेश वृक्ष संरक्षण कानून और पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।

ग्रीन हाईवे नीति के तहत प्रतिपूरक वृक्षारोपण और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त तकनीकी समिति 15 वर्षों तक पौधारोपण की निगरानी करे।

केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की सभी सिफारिशों का पालन किया जाए।

पिछले वर्षों में CAMPA मद में जमा और उपयोग की गई राशि का पूरा विवरण NHAI प्रस्तुत करे।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण निधि और पौधों के जीवित रहने की स्थिति की जांच करता रहे।

हरित क्षेत्र जरूरी, लेकिन विकास परियोजनाएं भी आवश्यक

अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि शहरी हरित क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक हैं, लेकिन राष्ट्रीय महत्व की आधारभूत संरचना परियोजनाएं पर्यावरणीय नियमों और प्रतिपूरक उपायों के अनुपालन के साथ आगे बढ़ सकती हैं।

इसके साथ ही अधिकरण ने मूल आवेदन और लंबित अंतरिम आवेदनों का निराकरण कर दिया।

भोपाल से दिल्ली तक पहुंचा था मामला

गौरतलब है कि एनएचएआई अयोध्या बायपास को आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 836.91 करोड़ रुपए की लागत से 10 लेन में बदल रहा है। करीब 16 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 7871 पेड़ काटे जाने प्रस्तावित हैं। इनमें कई पेड़ों की उम्र 40 से 80 वर्ष तक बताई गई है।

पिछले वर्ष दिसंबर में तीन दिनों के भीतर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई शुरू हुई थी, जिसके बाद पर्यावरणविदों और नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले ने तूल पकड़ा और एनजीटी में याचिका दायर की गई। इसके बाद 8 जनवरी तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी गई थी। मामले की प्रारंभिक सुनवाई भोपाल बेंच में हुई, लेकिन बाद में इसे नई दिल्ली बेंच स्थानांतरित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता बोले- फिलहाल रोक बरकरार

याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने कहा कि 22 दिसंबर को पेड़ों की कटाई पर दिया गया स्थगन आदेश फिलहाल प्रभावी बना हुआ है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अंतरिम राहत बताया। उनके अनुसार, हजारों पेड़ों की कटाई पर लगी रोक अभी जारी रहने से पर्यावरणीय नुकसान को तत्काल रोका जा सकेगा।

विरोध के बाद उठा था मामला

पेड़ों की कटाई के खिलाफ भोपाल के कई पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन चलाया था। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे, उमाशंकर तिवारी, नितिन सक्सेना, सुयश कुलश्रेष्ठ और राशिद नूर सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया था कि एनएचएआई हरियाली उजाड़ रही है।

पर्यावरणविदों का कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए एलिवेटेड रोड या सीमित विस्तार जैसे विकल्प अपनाए जा सकते थे। उनका तर्क था कि जिन पेड़ों को काटा जा रहा है, उनमें कई 80 से 100 साल पुराने हैं और उनकी भरपाई नए पौधों से तुरंत संभव नहीं है।

कांग्रेस ने भी किया था प्रदर्शन

पेड़ों की कटाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी विरोध दर्ज कराया था। वरिष्ठ कांग्रेसी रविंद्र साहू झूमरवाला, जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना सहित कई नेताओं ने मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा था कि विकास के नाम पर भोपाल की हरियाली खत्म करना उचित नहीं है और सरकार को पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

NHAI का प्रतिपूरक पौधारोपण प्लान

एनएचएआई ने परियोजना के तहत काटे जाने वाले 7871 पेड़ों के बदले लगभग 81 हजार पौधे लगाने की योजना बनाई है।

अयोध्या बायपास के दोनों ओर 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे।

इनमें छायादार, फलदार और शेड-बेयरिंग प्रजातियों को शामिल किया जाएगा।

पौधों की 15 वर्षों तक देखरेख एनएचएआई करेगा।

इस कार्य पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

नगर निगम के सहयोग से 10 हजार अतिरिक्त पौधे पार्कों, खाली जमीनों और सड़क किनारे लगाए जाएंगे।

झिरनिया और जागरियापुर क्षेत्र में 61 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा।

इन क्षेत्रों को विकसित वन क्षेत्र के रूप में तैयार किया जाएगा।

जून 2026 तक सभी तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

शहर में विकास बनाम पर्यावरण की बहस तेज

अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर भोपाल में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन और एनएचएआई इसे शहर की यातायात समस्या का समाधान बता रहे हैं, वहीं पर्यावरणविदों का कहना है कि दशकों पुराने पेड़ों की क्षति की भरपाई केवल पौधारोपण से संभव नहीं है।