जयपुर- सांगानेर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा क्षेत्र के एक गांव में पिछले कई सालों से सरकारी स्कूल भैंसों के तबेले में संचालित हो रहा है। सोमवार को ' स्कूल ठीक करो अभियान' के तहत जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की टीम इस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची तो स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें रोक दिया गया और सरेआम मारपीट व पत्थरबाजी की गई। हमले में कारों के शीशे फोड़े गए, टीम के सदस्यों के कपड़े फाड़े गए और ट्यूब में पत्थर डालकर प्रहार किया गया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस पूरे प्रकरण पर राजस्थान पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सीजेपी टीम का नेतृत्व आशुतोष रांका कर रहे थे। उन्होंने दो दिन पहले इस दौरे की घोषणा की थी। सोमवार को जब टीम मौके पर पहुंची तो कुछ निवासियों द्वारा योजनाबद्ध हमला किया गया। अशुतोष ने घटना का ब्योरा देते हुए कहा, “रामपुरा, कंवरपुरा में पिछले काफ़ी सालों से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है। लेकिन जब हम वहाँ निरीक्षण करने पहुंचे तो सरेआम मारपीट, पत्थरबाजी की गई। कारों के शीशे फोड़े गए, टीम पर पत्थर बरसाये गए। कपड़े फाड़े गए। ट्यूब में पत्थर डालकर टीम को मारा गया। मेरे कपड़े फाड़े गए। यह सब मदन दिलावर के कहने पर हुआ है। मदन दिलावर को बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंज़ूर है। लेकिन स्कूल ठीक हो जाये, यह मंज़ूर नहीं। मदन दिलावर जी - आपने आज गुंडे भेजकर पूरे देश में राजस्थान को शर्मसार कर दिया। लेकिन हम इस गुंडागर्दी से डरने वाले लोग नहीं है। स्कूल तो ठीक कराने ही होंगे।”
What the F is happening in Rajasthan?????
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 21, 2026
Goons of BJP are after the blood of Ashutosh and other CJP volunteers.
How can @PoliceRajasthan allow this kind of attack? pic.twitter.com/F3kdPwS4kD
घटना के दौरान गांव के एक निवासी ने सीजेपी टीम के दौरे का विरोध करते हुए कहा, “हम इस मुद्दे को राजनीतिक नहीं बनाना चाहते। हमारे स्कूल के लिए 12 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। गांव वाले खुद स्कूल बनाने में सक्षम हैं। हमने पहले मंदिर बनाया था और शिक्षा का मंदिर भी बनाने में सक्षम हैं। हमें कॉकरोच जनता पार्टी से किसी तरह का समर्थन नहीं चाहिए। हम ऐसी पार्टी का विरोध करते हैं जो देश को बांटने की बात करती है और भगवान राम के बारे में अपशब्द कहती है। हम ऐसे लोगों का विरोध करते हैं। हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो देश के लिए काम करें।”
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस हमले और पुलिस की भूमिका पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा, “राजस्थान पुलिस मूकदर्शक बनी हुई लगती है जबकि गुंडे सरकारी स्कूलों का दौरा करने आए सीजेपी स्वयंसेवकों पर हमला कर रहे हैं। उन्हें स्कूलों के भैंसों के तबेले में चलने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन सीजेपी स्वयंसेवकों के उन स्कूलों में प्रवेश करने से समस्या है। वे आखिर किस चीज की रक्षा कर रहे हैं?”
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, “ये गांव वाले नहीं बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता थे। भाजपा के कार्यकर्ता जनहित के हर काम का विरोध करेंगे। वे सिर्फ ऊपर से मिले आदेशों का पालन करेंगे। अगर किसी को स्कूल देखने से रोका जाता है या हमला किया जाता है तो हम इसकी निंदा करते हैं। कांग्रेस उन सभी लोगों के साथ खड़ी है जो इस सरकार से तंग आ चुके हैं।”
इस पूरे प्रकरण में सीजेपी का आरोप है कि स्कूल की जर्जर हालत सुधारने के प्रयासों का विरोध किया जा रहा है, जबकि गांव के कुछ लोगों का कहना है कि वे खुद स्कूल की मरम्मत कर लेंगे और बाहरी राजनीतिक दखल नहीं चाहते। आशुतोष ने स्पष्ट किया कि बच्चों को तबेले में पढ़ने की स्थिति तो स्वीकार है, लेकिन स्कूल सुधारने की कोशिश पर हमला किया गया। अभिजीत दिपके के बयान से पुलिस की भूमिका पर सवाल और गहरा गया है। घटना की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैली हुई हैं, जिनमें टीम पर हमले और क्षतिग्रस्त वाहनों के दृश्य साफ दिख रहे हैं।
सीजेपी ने कहा है कि वे स्कूलों की स्थिति सुधारने के अपने अभियान से पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत और राजनीतिक टकराव दोनों को उजागर करने वाली यह घटना अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है।