भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने किसानों को वास्तविक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने और MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग उठाई है। पटवारी ने कहा कि सरकारें कागजों पर एमएसपी बढ़ाने का प्रचार तो करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अपनी उपज घोषित समर्थन मूल्य से भी कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
पटवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदेश की मंडियों में किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणाओं और वास्तविक खरीद व्यवस्था में बड़ा अंतर है। किसान लगातार घाटे में फसल बेच रहे हैं, जबकि सरकार MSP बढ़ाने को उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में गंभीर है तो MSP को केवल घोषणा तक सीमित न रखकर कानूनी अधिकार बनाया जाए।
मध्य प्रदेश को देश का पहला राज्य बनाने की मांग
पत्र में जीतू पटवारी ने मांग की कि मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बने, जहां एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यापारी या एजेंसी MSP से कम मूल्य पर किसानों की उपज खरीदती है तो उसे दंडनीय अपराध घोषित किया जाना चाहिए। इसके लिए कठोर कानून और निगरानी व्यवस्था लागू की जाए ताकि किसानों के साथ होने वाले आर्थिक शोषण को रोका जा सके।
पटवारी ने यह भी कहा कि सरकार को मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जहां किसानों को वास्तविक समय पर फसलों के दाम की जानकारी उपलब्ध हो। उन्होंने हर मंडी में “रियल टाइम प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम” स्थापित करने की मांग की ताकि किसानों को तत्काल जानकारी मिल सके और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो सके। उनका कहना है कि केवल सरकारी दावे करने से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी, बल्कि मजबूत व्यवस्था और कानूनी सुरक्षा की जरूरत है।
बताइए, कौन-सी फसल वास्तव में MSP पर खरीदी जा रही है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में सरकार से सीधा सवाल पूछा कि वर्तमान और पूर्व में घोषित MSP सूची में ऐसी कौन-सी फसल है जिसकी मध्य प्रदेश में वास्तविक खरीद MSP पर हो रही है? उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी फसलें घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही हैं और कितने किसान इसका लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं।
पटवारी ने प्रदेश की मंडियों और खरीद केंद्रों की संयुक्त जमीनी जांच कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहे तो वे स्वयं इस जांच में शामिल होने को तैयार हैं ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका दावा है कि प्रदेश के अधिकांश किसान आज भी बिचौलियों और व्यापारियों के दबाव में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर हैं।
“25 साल की सत्ता के बाद भाजपा को समझना होगा किसानों का दर्द”
पत्र में जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले लगभग 25 वर्षों से प्रदेश में सत्ता में रहने के बावजूद किसानों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने लिखा कि किसानों को अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि कानूनी गारंटी चाहिए। पटवारी ने कहा कि यदि शिवराज सिंह चौहान के गृह राज्य मध्य प्रदेश में एमएसपी की कानूनी सुरक्षा लागू होती है तो यह पूरे देश के लिए “न्यू एग्रो मॉडल” साबित हो सकता है।
उन्होंने दोनों नेताओं से अपील की कि किसान हित में गंभीरता से विचार करते हुए मध्य प्रदेश को किसानों के अधिकारों की रक्षा करने वाला अग्रणी राज्य बनाया जाए। पटवारी ने कहा कि कृषि क्षेत्र की मजबूती और किसानों की आर्थिक सुरक्षा के बिना आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।
MSP को लेकर लगातार बढ़ रही है राजनीतिक बहस
देशभर में MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। किसान संगठनों ने भी कई बार आंदोलन कर यह मांग दोहराई है कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित किया जाए। ऐसे में जीतू पटवारी का यह पत्र मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नए बहस का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या प्रदेश में MSP को लेकर कोई नई नीति बनाई जाती है।