ग्वालियर- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने रविवार को अनिल कुमार मिश्रा और उनके साथियों के खिलाफ दर्ज SC/ST एक्ट मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। डिवीजन बेंच ने याचिका संख्या WP-2/2026 (अनिल कुमार मिश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को पक्षकार (रिस्पॉन्डेंट नंबर 5) के रूप में जोड़ने की अनुमति दे दी।
जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोति की बेंच ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 15-ए(3) का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ित को सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के हरिराम भांभी बनाम सत्यनारायण (AIR 2021 SC 5601) फैसले का भी जिक्र करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को सभी कार्यवाहियों की सटीक और समयबद्ध सूचना दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि संशोधित याचिका की प्रति शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से या उनके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को दोपहर 2 बजे तक सौंप दी जाए। यदि पता पर कोई नहीं मिले तो नोटिस चस्पी (एफिक्सचर) के माध्यम से पहुंचाई जाए, जिसमें वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। साथ ही, जांच अधिकारी को शिकायतकर्ता के व्हाट्सएप नंबर पर याचिका की कॉपी भेजने का आदेश दिया गया। राज्य सरकार को एक दिन के अंदर अतिरिक्त जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है।

अनिल मिश्रा की जमानत याचिका पर आज कोई फैसला नहीं हुआ। कोर्ट ने मामले को प्राथमिकता देते हुए 5 जनवरी को सुबह 10:30 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है, जो लिस्ट के शीर्ष पर ही लिया जाएगा। बहुजन नेताओं ने कोर्ट में हुई कारवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला उन ताकतों के मुंह पर तमाचा है जो बाबा साहब के अपमान को 'अभिव्यक्ति की आड़' में छिपाने की कोशिश कर रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे संविधान की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। मामले में याचिकाकर्ता पक्ष के वकील जे.पी. मिश्रा, पवन पाठक समेत 20 अधिवक्ता पेश हुए, जबकि राज्य की ओर एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अन्य गवर्नमेंट एडवोकेट्स ने पक्ष रखा।
ग्वालियर हाईकोर्ट : अनिल मिश्रा रहेगा जेल में
— Sunil Astay (@SunilAstay) January 4, 2026
संविधान का अपमान करने वालों को आज फिर करारा झटका लगा है।
रविवार को डिवीजन बेंच ने साफ़ संदेश दे दिया है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के फोटो जलाने, अभद्र व नफरती भाषा का इस्तेमाल,सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और दंगा भड़काने… pic.twitter.com/3LrpTCMM8z
क्या है पूरा विवाद
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अनिल कुमार मिश्रा और उनके सहयोगियों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबा साहब) के फोटो जलाने, अभद्र और नफरत भरी भाषा का इस्तेमाल करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा दंगा भड़काने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है, जो संविधान के अपमान और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने से संबंधित है। अनिल मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द करने या जमानत की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे अपराधों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। विवाद तब और गहराया जब याचिकाकर्ताओं ने इसे 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' बताने की कोशिश की, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।