दलित समाज से आते हैं 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दीपके, इंस्टाग्राम पर 1.45 करोड़ फॉलोअर्स, भारत में X अकाउंट बैन

04:11 PM May 21, 2026 | Rajan Chaudhary

नई दिल्ली: भारत के न्यायिक और राजनीतिक इतिहास में शायद ही कभी किसी एक मौखिक टिप्पणी ने इतने व्यापक और विस्फोटक जन-आंदोलन का रूप लिया हो, जितना इस समय देखने को मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा फर्जी डिग्रियों के मामले की सुनवाई के दौरान युवाओं को "कॉकरोच" कहने के विरोध में उपजी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अब महज़ एक सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं रह गई है। इस आंदोलन में दो ऐसे बड़े और ऐतिहासिक मोड़ आ चुके हैं, जिसने देश के राजनीतिक विश्लेषकों और सत्ता प्रतिष्ठान को हिला कर रख दिया है।

पहला मोड़ यह है कि बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे इस आंदोलन के सूत्रधार और फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुलकर अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि को सामने रखा है और स्पष्ट किया है कि वह दलित समुदाय से आते हैं।

दूसरा यह कि इस आंदोलन ने मात्र चार दिनों के भीतर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, जिसके बाद बदले की कार्रवाई के तहत भारत में इसके आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल को पूरी तरह से प्रतिबंधित (Withheld) कर दिया गया है।

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"मैं दलित हूँ और यह व्यवस्था के खिलाफ शोषितों की आवाज़ है"

शुरुआत में खुद को केवल एक "आलसी और बेरोजगार" युवा के तौर पर पेश करने वाले CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके की सामाजिक पृष्ठभूमि इस पूरे आंदोलन को एक नई वैचारिक धार देती है। अभिजीत की राजनीतिक समझ और उनका दलित विमर्श कोई नई बात नहीं है। 6 जून 2024 को दोपहर 1:04 बजे किए गए अपने एक एक्स (ट्विटर) पोस्ट में अभिजीत ने खुलकर अपनी पहचान और महाराष्ट्र की दलित राजनीति पर बेबाक टिप्पणी की थी।

लोकसभा चुनावों के बाद इंडिया (INDIA) गठबंधन के संदर्भ में प्रकाश अंबेडकर की राजनीति की आलोचना करते हुए अभिजीत ने लिखा था: "प्रकाश अंबेडकर के अहंकार ने उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया। एक दलित समुदाय से आने के नाते, मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा कि महाराष्ट्र में दलित उनके इंडिया (INDIA) गठबंधन से हाथ न मिलाने को लेकर कितने नाखुश थे। जब दलित इंडिया गठबंधन के पीछे खड़े थे, तब प्रकाश अंबेडकर ने इसके विपरीत रास्ता चुना। हालांकि मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें भाजपा के एजेंट के रूप में नहीं देखता, लेकिन समुदाय के लोगों को यकीन था कि वह इंडिया गठबंधन से हाथ न मिलाकर भाजपा की मदद कर रहे हैं। आप 16 सांसद सीटों की मांग तब नहीं कर सकते जब राज्य में आपका एक भी विधायक न हो।"

अभिजीत का यह पोस्ट स्पष्ट करता है कि वह महज़ एक 'क्रॉनिकली ऑनलाइन' युवा नहीं हैं, बल्कि ज़मीनी राजनीतिक हकीकत और बहुजन समाज की नब्ज़ को गहराई से समझते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी को सिर्फ 'युवा विरोधी' नहीं, बल्कि 'ऐतिहासिक रूप से शोषित और वंचित तबके' के प्रति तंत्र की गहरी संवेदनहीनता के रूप में देखा जा रहा है। जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग युवाओं को 'कॉकरोच' कहते हैं, तो यह उस सामंती और जातिवादी मानसिकता का प्रदर्शन है जो सदियों से शोषितों को कीड़ा-मकोड़ा समझती आई है।

मात्र 4 दिनों में 1.45 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स: भाजपा के डिजिटल साम्राज्य को पछाड़ा

इस आंदोलन की जमीनी और डिजिटल ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी ने लोकप्रियता का एक ऐसा रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है जिसे हासिल करने में पारंपरिक राजनीतिक दलों को दशक लग जाते हैं। लेटेस्ट मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJP के इंस्टाग्राम हैंडल पर फॉलोअर्स की संख्या अविश्वसनीय रूप से 1.05 करोड़ से बढ़कर अब 1.45 करोड़ (14.5 मिलियन) के पार पहुंच चुकी है।

इन्स्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी के फ़ॉलोवर्स

इस रिकॉर्ड-तोड़ संख्या के साथ CJP ने दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी इंस्टाग्राम फॉलोइंग के मामले में बहुत पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में भाजपा के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर लगभग 87 लाख (8.7 मिलियन) फॉलोअर्स हैं, जबकि CJP उनसे कई लाख आगे निकल चुकी है।

डिजिटल विशेषज्ञों के अनुसार, इंस्टाग्राम का पूरा सिस्टम एल्गोरिद्म पर काम करता है। CJP द्वारा पोस्ट किए गए छोटे-छोटे वीडियो—जिनमें तीखा व्यंग्य, युवाओं का गुस्सा, रोज़गार की मांग और सिस्टम की खामियों पर सीधी चोट शामिल है—को शुरुआत में ही करोड़ों व्यूज मिले।

युवाओं ने खुद को इस कंटेंट से सीधा कनेक्ट किया। फॉलोअर्स का आंकड़ा महज़ 48 घंटों में 5.5 लाख, तीन दिनों में 62 लाख और चौथे दिन 1.45 करोड़ को पार कर गया। इसके साथ ही, CJP की वेबसाइट पर अब तक 6 लाख से अधिक युवा औपचारिक रूप से सदस्यता के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

बढ़ती लोकप्रियता से डरी सत्ता? भारत में CJP का 'X' अकाउंट किया गया सस्पेंड

जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी की डिजिटल पहुंच मुख्यधारा की राजनीति के लिए चुनौती बनने लगी, वैसे ही तंत्र का दमनकारी रूप भी सामने आ गया। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुष्टि की है कि भारत सरकार की एक 'कानूनी मांग' (Legal Demand) के जवाब में कॉकरोच जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट को भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित यानी 'Withheld' कर दिया गया है। प्रतिबंध से ठीक पहले CJP के एक्स हैंडल पर 2 लाख (200K) से ज्यादा फॉलोअर्स बेहद कम समय में जुड़ चुके थे।

एक्स (X) आमतौर पर तब खातों को प्रतिबंधित करता है जब उसे किसी अधिकृत सरकारी संस्था से "वैध और उचित दायरे में अनुरोध" प्राप्त होता है। जब भी कोई आंदोलन या आवाज़ सत्ता के नियंत्रण से बाहर होने लगती है, तो उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, एक्स अकाउंट पर पाबंदी के बावजूद CJP का इंस्टाग्राम अकाउंट 1.45 करोड़ फॉलोअर्स के साथ पूरी तरह सक्रिय है।

इस डिजिटल सेंसरशिप पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं ने इसे "डर की निशानी" बताया है। CJP ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया था: "हम पूरी तरह से जानते थे कि हमें खत्म करने और हमें असामाजिक तत्वों के रूप में पेश करने की कोशिशें होंगी। लेकिन हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि CJP भारत के संविधान में दृढ़ विश्वास रखती है और हमेशा इसके मूल्यों की रक्षा के लिए काम करेगी।"

संवैधानिक मर्यादा और 5-सूत्रीय एजेंडा: व्यंग्य के पीछे गंभीर संदेश

CJP को महज़ एक 'फनी ट्रेंड' समझने की भूल राजनीतिक दल न करें, क्योंकि इसके घोषणापत्र में शामिल 5 मांगें सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी खामियों पर प्रहार करती हैं:

  1. न्यायपालिका की निष्पक्षता: सेवानिवृत्ति के बाद कोई भी मुख्य न्यायाधीश राज्यसभा सीट या कोई अन्य सरकारी पद नहीं पाएगा।

  2. मताधिकार की सुरक्षा: किसी भी राज्य में यदि कोई वैध वोट डिलीट होता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को जिम्मेदार मानते हुए UAPA के तहत गिरफ्तार किया जाएगा।

  3. सच्चा महिला आरक्षण: संसद की सीटें बढ़ाए बिना महिलाओं को 50% सीधा आरक्षण दिया जाएगा, साथ ही कैबिनेट में भी 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

  4. स्वतंत्र मीडिया की बहाली: बड़े कॉर्पोरेट घरानों (जैसे अंबानी-अडाणी) के स्वामित्व वाले मीडिया हाउसों के लाइसेंस रद्द कर स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जगह बनाई जाएगी।

  5. दलबदल पर पूर्ण रोक: जो भी विधायक या सांसद चुनाव के बाद दल-बदल करेगा, उस पर 20 वर्षों तक चुनाव लड़ने और सार्वजनिक पद संभालने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा।

Gen Z और बहुजन चेतना का अद्भुत संगम

भारत का युवा, विशेषकर 'Gen Z' आज अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। यह वह पीढ़ी है जिसने कोरोना काल में शिक्षा का संकट देखा, जो रोज़गार के सिकुड़ते अवसरों से परेशान है, और जिसने सरकारी परीक्षा पेपर लीक की मार झेली है। ऐसे में देश की शीर्ष अदालत से आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणी के बाद उपजे गुस्से को, एक दलित युवा द्वारा हास्य, व्यंग्य और डिजिटल सक्रियता के माध्यम से सुनियोजित राजनीतिक आवाज़ में बदल देना भारत के भविष्य की राजनीति का एक नया संकेत है।

डिजिटल सेंसरशिप यह साबित करती है कि यह कॉकरोच आर्मी अब सत्ता के गलियारों में खलबली मचाने में पूरी तरह कामयाब रही है।