रामनारायण बघेल हत्याकांड | केरल में दलित प्रवासी लिंचिंग केस में परिवार को मिलेगा ₹8.25 लाख का अतिरिक्त मुआवजा, लेकिन पुलिस जांच में कमियों ने बढ़ाई परेशानी!

10:34 AM Jul 17, 2026 | Geetha Sunil Pillai

त्रिशूर- रामनारायण बघेल के परिवार को न्याय की लड़ाई में एक बड़ी राहत मिली है, जिला-स्तरीय निगरानी समिति ने उन्हें पहले से स्वीकृत राशि के अलावा अतिरिक्त 8.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इससे पहले गत वर्ष ही केरल सरकार ने रामनारायण के परिवार को 30 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान किया था। अतिरिक्त मुआवजा के फैसले से परिवार को आर्थिक परेशानियों से तो राहत मिलेगी लेकिन इस मामले में चल रही पुलिस जांच को लेकर अदालत द्वारा खामियां बताये जाने से परिवार चिन्तित है।

बघेल के परिवार ने हाल ही त्रिशूर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केरल सरकार से अपील की कि वह सुनिश्चित करे कि रामनारायण की कथित सामूहिक हत्या की जांच पटरी से न उतरे, जांच में तेजी लाई जाए और सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। परिवार ने कहा कि अदालत द्वारा पुलिस के आरोपपत्र में कमियां पाए जाने के बाद उन्हें गहरा दुख हुआ है और यह जांच में बार-बार हुई चूक का सबूत है। उन्होंने कहा कि अदालत का यह निष्कर्ष कि आरोपपत्र में कमियां हैं, जांच के दौरान पुलिस की ओर से बार-बार हुई चूक का प्रमाण है और यह बेहद चिंताजनक है कि इतने गंभीर मामले में पुलिस ने ऐसी लापरवाही बरती।

परिवार ने केरल सरकार और पुलिस से मांग की कि जांच इस तरह से की जाए कि न्याय मिल सके और ऐसी क्रूर नस्लीय सामूहिक हत्या राज्य में दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार को कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए और परिवार की मांग के अनुसार तुरंत एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करना चाहिए। परिवार ने पुलिस से यह भी आग्रह किया कि वह अदालत में पहले ही दायर किए गए आरोपपत्र में सभी कमियों को दूर करे और जल्द से जल्द एक नया, कानूनी रूप से सही आरोपपत्र पेश करे।

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मीडिया को संबोधित करते हुए रामनारायण की पत्नी ललिता बघेल, उनकी मां श्यामाबाई बघेल, भाई शशिकांत, जस्टिस फॉर रामनारायण बघेल एक्शन काउंसिल के अध्यक्ष के. शिवरामन, संयोजक एडवोकेट के.एस. निसार, सदस्य एम. सुलेमान पलक्कड़ और एडवोकेट निखिल चंद्रशेखरन, जो परिवार के वकील भी हैं, ने दोहराया कि निष्पक्ष जांच और आरोपियों को दंडात्मक सजा सुनिश्चित करना न केवल रामनारायण के मामले में न्याय के लिए बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए भी आवश्यक है।

यह मामला नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद भीड़-लिंचिंग को अपराध घोषित करने वाली धारा 103(2) के तहत दर्ज किया गया जो केरल का पहला मामला है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

वह दर्दनाक हादसा जिसने किया केरल को शर्मिंदा

गौरतलब है कि 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव निवासी 31 वर्षीय दलित प्रवासी मजदूर रामनारायण बघेल की केरल के पालक्कड़ जिले के वालयार इलाके में एक भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बघेल रोजगार की तलाश में केरल आए थे और वालयार के अट्टापल्लम क्षेत्र में उन पर चोरी का संदेह कर लिया गया। हमलावरों ने उन्हें "बांग्लादेशी" कहकर संबोधित किया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक गंभीर चोटें थीं, जिनमें सिर, चेहरे, छाती और पीठ पर बार-बार लाठियों और डंडों से प्रहार किए गए थे।

पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें चार बीजेपी कार्यकर्ता शामिल थे। बाद में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) के तहत दर्ज किया गया, जो भीड़-लिंचिंग को अपराध घोषित करती है और केरल में पहला ऐसा मामला है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

प्रवासी व्यक्तियों को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मुआवजे में कानूनी अडचनें

रामनारायण बघेल के परिवार को कानूनी मदद दे रही एक्शन काउंसिल ने जिला-स्तरीय निगरानी समिति के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें परिवार को पहले से स्वीकृत राशि के अलावा अतिरिक्त 8.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया गया। समिति ने 2 जुलाई को अपनी बैठक में यह निर्णय रामनारायण की मां द्वारा एक्शन काउंसिल के माध्यम से दिए गए आवेदन पर विचार करने के बाद लिया था।

एक्शन काउंसिल के अनुसार इस निर्णय ने एक कानूनी बाधा को भी दूर किया, जो आमतौर पर केरल के बाहर के व्यक्तियों को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मुआवजा देने में आती थी, जब उन्हें राज्य के भीतर जाति-आधारित अत्याचारों का सामना करना पड़ता था। एक्शन काउंसिल ने इस निर्णय को न्याय की लड़ाई में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और मांग की कि यही लाभ केरल में जाति अत्याचारों के सभी पीड़ितों को दिया जाए।

परिवार ने कहा कि रामनारायण के मामले में मुआवजे की सरकार की त्वरित स्वीकृति और एससी/एसटी अधिनियम के तहत रीलीज राशि दलितों के खिलाफ अत्याचारों के सभी मामलों में आदर्श बननी चाहिए। उन्होंने एक्शन काउंसिल के निरंतर हस्तक्षेप का श्रेय दिया, जिसने सरकार को तेजी से कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुआवजा अकेले अन्याय को नहीं मिटा सकता। उन्होंने कहा कि यह मामला नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद केरल में भीड़-लिंचिंग को अपराध घोषित करने वाली धारा 103(2) के तहत दर्ज किया गया पहला मामला है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सभी आरोपियों को दंडात्मक सजा सुनिश्चित की जाए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

एक्शन काउंसिल ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से यह जांच करने की भी मांग की कि क्या जांच में कोई चूक हुई है और मांग की कि अपराध में शामिल हर व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाए और उसे कानून के तहत अधिकतम सजा दी जाए। परिवार ने कहा कि वे एक निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर जांच की उम्मीद करते हैं, जिसमें पुलिस की ओर से लापरवाही या पूर्वाग्रह के आरोपों के लिए कोई गुंजाइश न हो। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और अन्य अधिकारियों से मिलकर अपनी मांगों को रखेंगे और न्याय प्राप्त होने तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

मृतक के परिवार को सांत्वना देने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी केरल पहुंचे थे।

शुरू में देरी के आरोप लेकिन बाद में पब्लिक प्रेशर के आगे सरकार झुकी

गौरतलब है कि इस मामले में शुरुआती दौर में जांच में देरी और प्रक्रियागत चूक के आरोप लगे थे। परिवार ने कहा कि प्रमुख कानूनी प्रावधानों को केवल लगातार सार्वजनिक दबाव के बाद ही लागू किया गया, जबकि विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति और परिवार द्वारा मांगे गए अन्य उपायों में भी समय लगा। विरोध प्रदर्शनों और ज्ञापनों के बाद केरल सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के तहत भीड़-लिंचिंग प्रावधान को लागू किया, सुप्रीम कोर्ट के तेहसीन एस. पूनावाला दिशानिर्देशों को लागू करना शुरू किया और परिवार को मुआवजा स्वीकृत किया। इससे पहले रामनारायण के भाई शशिकांत बघेल ने भारत सरकार से ऐसे संघ परिवार संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी, जो उनके अनुसार "खुद को राष्ट्रवादी और धार्मिक मानते हैं जबकि जाति और धर्म के नाम पर लोगों की हत्या करते हैं।"