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बुंदेलखंड दलित हत्याकांड की जांच CBI को: द मूकनायक के डिप्टी एडिटर अंकित पचौरी की पुस्तक ‘अंजना’ में है केस की पूरी जानकारी

भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बहुचर्चित बरोदिया नोनागिर दलित हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश पुलिस की जांच पर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है।

इसी चर्चित घटना और उससे जुड़े घटनाक्रम पर पत्रकार, लेखक और द मूकनायक के डिप्टी एडिटर अंकित पचौरी ने अपनी दूसरी पुस्तक “अंजना” लिखी है, जो अमेजन, फ्लिपकार्ट, कैमलबुक और गूगल बुक्स सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। 150 पृष्ठों की यह पुस्तक बुंदेलखंड क्षेत्र में दलितों के उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय की घटना पर आधारित है।

पुस्तक में सागर जिले के बरोदिया नोनागिर कांड को दस्तावेजी शैली में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। इसमें नितिन अहिरवार की हत्या, राजेंद्र की हत्या और अंजना अहिरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़े घटनाक्रम तथा इस घटना के सामाजिक प्रभाव को विस्तार से दर्ज किया गया है।

पुस्तक में लेखक ने केवल घटनाओं का विवरण ही नहीं दिया, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र में दलित समुदाय के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियों, न्याय की लड़ाई और प्रशासनिक कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं को भी सामने लाने का प्रयास किया है। इस घटनाक्रम के माध्यम से लेखक ने यह दिखाने की कोशिश की है कि ग्रामीण समाज में दलित समुदाय किस तरह के दबाव और परिस्थितियों का सामना करता है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेखक अंकित पचौरी ने पुस्तक 'अंजना' भेंट की

2025 में पुस्तक 'आदिवासी रिपोर्टिंग' हुई थी प्रकाशित

यह अंकित पचौरी की दूसरी पुस्तक है। इससे पहले उनकी पहली पुस्तक “आदिवासी रिपोर्टिंग” प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में रहने वाले समुदायों की समस्याओं, उनके जीवन और विकास से जुड़े मुद्दों पर आधारित है। इसमें आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति को पत्रकारिता के अनुभव के साथ प्रस्तुत किया गया है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय अंकित पचौरी लंबे समय से सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों पर लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं। उनकी नई पुस्तक “अंजना” बुंदेलखंड में दलित उत्पीड़न की घटनाओं को समझने और इस विषय पर व्यापक चर्चा को आगे बढ़ाने की एक कोशिश मानी जा रही है।

पत्रकार अंकित पचौरी की पुस्तकें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध
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