अंबेडकर नगर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और 'मिशन शक्ति' के दावों के बीच एक दलित मां पिछले एक साल से अपनी अगवा हुई बेटी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रही है। लेकिन न्याय मिलना तो दूर, रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं। जब यह बेबस मां पुलिस के पास गुहार लगाने गई, तो उसे न्याय के बजाय सादे कागज पर जबरन दस्तखत, धमकियां और "चमरिया साली" जैसी भद्दी जातिसूचक गालियां मिलीं।
यह पूरा मामला अंबेडकर नगर जिले के थाना अहिरौली और थाना अकबरपुर से जुड़ा है, जो न्याय व्यवस्था में दलितों की पहुंच और पुलिस-अपराधी-नेता के गठजोड़ की एक खौफनाक तस्वीर पेश करता है।
क्या है पूरा मामला?
अहिरौली थाने के ग्राम तिवारीपुर की रहने वाली उर्मिला (पत्नी मुन्नू) एक दलित महिला हैं। उर्मिला के अनुसार, 2 मई 2024 को गांव के ही रसूखदार सवर्ण युवक वेद प्रकाश मिश्रा उर्फ भोला और उसके भाई सत्य प्रकाश मिश्रा उर्फ सत्तू ने उनकी बड़ी बेटी ज्योति का अपहरण कर लिया था। डायल 100 पर शिकायत के बाद पुलिस ने दबाव बनाकर "गांव-देहात का मामला" बताकर समझौता करा दिया। सुरक्षा की दृष्टि से उर्मिला ने बेटी को अपने मायके ग्राम इमामपुर (थाना अकबरपुर) भेज दिया।
माँ आरोप लगाती है कि, लेकिन मनबढ़ों के हौसले इतने बुलंद थे कि 19 मई 2025 की दोपहर करीब 12 बजे वेद प्रकाश, सत्य प्रकाश और उनके साथी इमामपुर स्थित घर में घुसे और ज्योति को दिनदहाड़े जबरन उठा ले गए। तब से लेकर आज तक ज्योति का कोई सुराग नहीं है।
कोतवाली में दलित मां को गाली: "चमरिया साली... जेल में ठूंस दूंगा"
बेटी के दोबारा अपहरण के बाद जब उर्मिला न्याय के लिए अकबरपुर कोतवाली पहुंचीं, तो पुलिस का रवैया अपराधियों जैसा था। पीड़िता के वीडियो बयान और एसपी को दी गई शिकायत के अनुसार, पुलिस ने न सिर्फ आरोपियों को बचाने का प्रयास किया बल्कि उर्मिला से सादे कागज पर जबरन दस्तखत करवा लिए।
हद तो तब हो गई जब थाना परिसर में पुलिसकर्मियों ने उर्मिला को सरेआम जातिसूचक गालियां दी गईं. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग को दिए शिकायती पत्र में पीड़िता माँ ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए वह शब्द लिखे जो उनके लिए कहा गया- "चमरिया साली, लड़कियों से धंधा कराती है। उल्टा मुकदमा लगाकर जेल में ठूंस दूंगा।" पुलिस ने उर्मिला को धमकाकर भगा दिया कि "तुम्हारे 50 लाठी पड़ेगी, भाग जाओ यहां से।"

आरोपियों का रसूख: कोतवाल से लेकर डिप्टी सीएम तक पहुंच
पुलिस की इस कार्यप्रणाली का कारण सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं। मुख्य आरोपी वेद प्रकाश का भाई सत्य प्रकाश मिश्रा उर्फ सत्तू राजनीतिक रूप से अच्छी पैठ रखता है। तस्वीरों में आरोपी सत्य प्रकाश मिश्रा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु', और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ गुलदस्ते भेंट करता नजर आ रहा है।

सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तो अकबरपुर के कोतवाल श्रीनिवास पांडेय के साथ की है, जिन्हें आरोपी सत्तू मिश्रा उनके जन्मदिन पर स्मृति चिन्ह भेंट कर रहा है। जब कोतवाल ही अपहरण के आरोपियों के साथ खड़े नजर आएं, तो एक गरीब दलित महिला को न्याय कैसे मिल सकता है?
जबरन खाते में डाले 60 हजार, अब आरोपी ने रचा ली दूसरी शादी
पीड़िता के अनुसार, पुलिस की शह पर आरोपियों ने मामले को रफा-दफा करने के लिए जबरन उनके बेटे के बैंक खाते में 60,000 रुपये डाल दिए और कहा कि "लड़की दो-तीन दिन में वापस आ जाएगी।" लेकिन बेटी वापस नहीं आई।
मां के पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब उसे पता चला कि उसकी बेटी को गायब करने वाले मुख्य आरोपी वेद प्रकाश मिश्रा ने कुछ दिन पहले (14 तारीख को) किसी और लड़की से शादी कर ली है। अब उर्मिला को यह खौफ सता रहा है कि अपहरणकर्ताओं ने उसकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी है और शव को कहीं छिपा दिया है।
आज़ाद समाज पार्टी का हस्तक्षेप और कानूनी लड़ाई
प्रशासनिक लापरवाही की हदें पार होने के बाद इस मामले में आज़ाद समाज पार्टी (ASP) के प्रदेश सचिव ने हस्तक्षेप किया। ASP नेता के अनुसार, जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया, तब जाकर नाममात्र के लिए अकबरपुर थाने में (FIR No. 293/2026) दर्ज की गई।
ASP नेता ने द मूकनायक को बताया कि पुलिस ने जानबूझकर FIR में अपहरण और एससी/एसटी एक्ट की वो गंभीर धाराएं नहीं लगाईं जो प्रार्थना पत्र में लिखी गईं थीं, ताकि आरोपियों को आसानी से बचाया जा सके। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है।
आरोपियों द्वारा हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे (Stay) न मिल जाए, इसके लिए ASP पदाधिकारियों ने हाईकोर्ट में कैविएट (Caveat) दाखिल करवा दी है। इसके अलावा राज्य महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और एससी-एसटी आयोग लखनऊ में भी शिकायत दर्ज करा दी गई है।
सिस्टम से उठते सवाल
यह घटना उत्तर प्रदेश के कानून-व्यवस्था के मॉडल पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है. क्या राजनीतिक रसूख रखने वाले अपराधियों के लिए कानून अलग है? एक साल से गायब दलित बेटी को ढूंढने के बजाय पुलिस पीड़ित मां को ही जातिसूचक गालियां क्यों दे रही है? जिस कोतवाल की आरोपियों के साथ मधुर संबंधों वाली तस्वीरें सार्वजनिक हैं, उसके खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करेगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनका अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है।
बहरहाल, उर्मिला की बस एक ही मांग है- "मुझे मेरी बेटी चाहिए, चाहे जैसे भी हो, वो मेरी बेटी को हाजिर करें।"