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दलित बस्ती में शराब की दुकान का महिलाओं ने किया विरोध, तो पुलिस ने भांजी लाठियां – MP के सागर खुरई में क्या है ये विवाद?

सागर- जिले के खुरई क्षेत्र के तलैया नाका वार्ड में अहिरवार समाज के आवासीय इलाके में स्थित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय निवासियों ने फिर से विरोध प्रदर्शन किया। रहवासियों का कहना है कि दुकान बच्चों और युवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है तथा सामाजिक दृष्टि से अनुपयुक्त स्थान पर खुली है।

पूर्व में कई ज्ञापनों के माध्यम से प्रशासन को सूचित किया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने दुकान हटाने का 15 दिन का आश्वासन दिया था। लेकिन अवधि बीतने के बावजूद दुकान नहीं हटी, जिसके चलते रहवासियों ने चक्का जाम कर दिया। लोकल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब दुकान खोलने की कोशिश की गई तो महिलाओं समेत स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। कुछ महिलाओं ने दुकान पर पथराव किया और शराब के क्रेट जलाने की घटना भी हुई।

प्रदर्शन के दौरान उप तहसीलदार और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस टीम देर रात तक मौके पर डटी रही और स्थिति को नियंत्रित किया। रहवासियों ने दुकान को पूर्ण रूप से हटाने की मांग दोहराई और कहा कि किसी भी हालत में इसे आवासीय क्षेत्र में नहीं चलने देंगे। प्रदर्शन में महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल थे।

आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस घटना को साझा करते हुए दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं और बालिकाओं पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सागर कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा दुकान तत्काल हटाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्दोष नागरिकों पर कोई अनुचित कार्रवाई हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी) के तहत राज्य में कोई नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी। मौजूदा दुकानों का विस्तार या पुनर्स्थापन भी नहीं होगा। नीति का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, राजस्व संरक्षण और पवित्र स्थानों के आसपास प्रतिबंध बनाए रखना है। इस मामले में दुकान नए आवंटन या पुरानी दुकान की जगह पर खुलने का मुद्दा प्रतीत होता है, जिसे लेकर स्थानीय विरोध जारी है।

प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि दुकान को आवासीय क्षेत्र से हटा दिया जाएगा, लेकिन क्रियान्वयन न होने से तनाव बढ़ा। इस मामले में भीम आर्मी नेता सुनिल अस्तेय ने सरकार से कारवाई की मांग करते हुए कहा, " यदि निर्दोष नागरिकों पर किसी प्रकार की अनुचित अथवा झूठी कार्रवाई की जाती है, तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी!"

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