145 साल बाद सेंट स्टीफेंस कॉलेज को मिली महिला प्रिंसिपल लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय ने रोकी नियुक्ति, जानें पूरा मामला

03:07 PM May 15, 2026 | Geetha Sunil Pillai

नई दिल्ली- दिल्ली विश्वविद्यालय ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में नई प्रिंसिपल की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। कॉलेज के शासी निकाय (सुप्रीम कौंसिल) ने 2 दिन पहले ही प्रोफेसर सुसान एलियास को नए प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की थी, जो 145 साल के इतिहास में इस प्रतिष्ठित कॉलेज की पहली महिला प्रिंसिपल होतीं। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने यूजीसी नियमों का हवाला देते हुए चयन समिति के गठन में अनियमितता बताते हुए इस नियुक्ति को आगे बढ़ाने से रोक दिया है।

14 मई को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा सेंट स्टीफेंस कॉलेज के शासी निकाय के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि चयन समिति यूजीसी 2018 के विनियमों के अनुसार सही ढंग से नहीं बनाई गई थी। इसलिए इस समिति की सिफारिशें लागू नहीं की जा सकतीं। पत्र में यूजीसी के न्यूनतम योग्यता विनियम 2018 के खंड 5.0 और उपखंड आठ-ए का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

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प्रोफेसर सुसान एलियास की नियुक्ति घोषणा

यूजीसी नियमों के अनुसार कॉलेज प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए चयन समिति में शासी निकाय का अध्यक्ष अध्यक्षता करेगा, शासी निकाय के दो सदस्य, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के दो नामित विशेषज्ञ, तीन उच्च शिक्षा विशेषज्ञ, विषय विशेषज्ञ और जरूरत पड़ने पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला या दिव्यांग श्रेणी का प्रतिनिधि शामिल होना चाहिए। माइनॉरिटी संस्थान होने के कारण कुछ विशेष प्रावधान भी हैं। लेकिन कॉलेज की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय से विशेषज्ञों का नामांकन नहीं कराया गया, जिसके कारण चयन समिति गठन ही अमान्य माना गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने कॉलेज को निर्देश दिया है कि नई प्रिंसिपल की नियुक्ति आगे न बढ़ाई जाए और यूजीसी 2018 के पूर्ण प्रावधानों के अनुसार नई चयन समिति गठित करके पूरी प्रक्रिया दोबारा चलाई जाए। यह पत्र सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से जारी किया गया है।

पत्र में कहा गया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से एक्सपर्ट्स के नामांकन के लिए अनुरोध नहीं किया गया, इसलिए समिति UGC नियमों के अनुरूप नहीं बनी। क्वोरम के लिए दो एक्सपर्ट्स सहित पांच सदस्य जरूरी हैं और पूरी प्रक्रिया, मिनट्स, स्कोरिंग और मेरिट लिस्ट के साथ एक ही दिन में पूरी होनी चाहिए। DU ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नई प्रिंसिपल की नियुक्ति आगे न बढ़ाई जाए और UGC 2018 तथा विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस के अनुसार नई चयन समिति गठित कर प्रक्रिया दोहराई जाए। यह पत्र सक्षम अथॉरिटी की मंजूरी से जारी किया गया।

कौन हैं प्रो. सुसन एलियास?

प्रो. सुसान एलियास कंप्यूटर साइंस की विशेषज्ञ हैं। उन्होंने IIT Madras और Anna University से डबल PhD प्राप्त किया है। वे सेंट स्टीफेंस में पहले से शिक्षण कार्य कर रही हैं और 1 जून से प्रिंसिपल जॉन वर्गीज का स्थान लेने वाली थीं। उनकी नियुक्ति को कॉलेज के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा था, क्योंकि 1881 में स्थापित इस संस्थान में 145 वर्षों में कभी महिला प्रिंसिपल नहीं रही।

सेंट स्टीफेंस कॉलेज माइनॉरिटी संस्थान है और पहले भी DU के साथ प्रिंसिपल नियुक्ति को लेकर विवाद हो चुके हैं। 13वें प्राचार्य जान वर्गीज का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त होने के बाद एक मार्च से यह पद औपचारिक रूप से रिक्त था। वर्ष 2022 में प्रिंसिपल प्रो. जॉन वर्गीज के कार्यकाल विस्तार को DU ने UGC नियमों का पालन न करने का हवाला देते हुए अवैध बताया था। वर्तमान मामले में भी यही मुद्दा उठा है कि विश्वविद्यालय से एक्सपर्ट्स नोमिनेट कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

DU का कहना है कि कॉलेज केंद्र सरकार से पूर्ण वित्त पोषित है, इसलिए UGC नियमों का पालन अनिवार्य है। कॉलेज की ओर से अभी तक इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन यह मामला उच्च शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

दिल्ली का सबसे पुराना कॉलेज है सेंट स्टीफेंस

सेंट स्टीफेंस कॉलेज ईसा मसीह के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने वाला एक धार्मिक फाउंडेशन है। इसका उद्देश्य अपने सदस्यों को आध्यात्मिक, नैतिक, बौद्धिक और सौंदर्यात्मक मूल्यों का एहसास कराना है।

कॉलेज की स्थापना 1 फरवरी 1881 को कैम्ब्रिज मिशन टू दिल्ली द्वारा की गई थी। संस्थापक और पहले प्रिंसिपल Rev. Samuel Scott Allnutt थे। शुरू में यह चांदनी चौक के कटरा खुशल राय, किनारी बाजार के पास एक छोटे से घर में मात्र पांच छात्रों और तीन शिक्षकों के साथ शुरू हुआ। 1891 से 1941 तक यह कश्मीरी गेट के पास सेंट जेम्स चर्च के निकट वाले भवन में रहा। 1941 में यह वर्तमान स्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय एनक्लेव में शिफ्ट हो गया। भवनों का डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट Walter George ने किया।

कॉलेज पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था, फिर पंजाब विश्वविद्यालय से, और 1922 में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्थापना के साथ इसके तीन मूल constituent कॉलेजों में शामिल हुआ। यह दिल्ली का सबसे पुराना कॉलेज है और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।